जयपुर/बीकानेर। प्रदेश के अधिवक्ता समुदाय के लिए बीकानेर से दुखद खबर सामने आई है।
राजस्थान बार काउंसिल के पूर्व चैयरमेन रहे वरिष्ठ अधिवक्ता और श्रीकोलायत के पूर्व विधायक आरके दास गुप्ता का मंगलवार सुबह निधन हो गया।
सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें बीकानेर के हल्दीराम अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
उनके निधन की खबर से बीकानेर के न्यायिक, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लोगो में शोक व्याप्त हैं.
आरके दास गुप्ता ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में राजनीति और न्यायिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वे राजस्थान बार काउंसिल के चेयरमैन भी रहे। उन्होंने 26 नवंबर 2000 से 8 दिसंबर 2001 तक राजस्थान बार काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई।
इसके अलावा, वे बीकानेर में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर भी आठ बार रहे और अधिवक्ताओं के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
1977 में बने विधायक, डेढ़ साल बाद दे दिया इस्तीफा
आरके दास गुप्ता ने जनता पार्टी के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। वर्ष 1977 में वे श्रीकोलायत क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए।
हालांकि, सरकार के साथ मतभेदों के चलते उन्होंने करीब डेढ़ साल बाद ही विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
राजनीति से दूरी बनाने के बाद उन्होंने वकालत को अपने कार्यक्षेत्र के रूप में आगे बढ़ाया और बीकानेर में कानूनी क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई।
बीकानेर के रेल बाइपास और हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर रहे सक्रिय
आरके दास गुप्ता बीकानेर की जनसमस्याओं को लेकर लगातार मुखर रहे। बीकानेर में रेल बाइपास की मांग को लेकर उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया और ऐतिहासिक रेल रोको आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
इसके साथ ही, बीकानेर में राजस्थान हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर भी वे लगातार आवाज उठाते रहे।
कोटगेट और सांखला फाटक जैसे क्षेत्रों में रेलवे से जुड़ी समस्याओं को उन्होंने कानूनी मंच पर प्रमुखता से उठाया।
जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता के कारण शहर में उनकी अलग पहचान थी।
डूंगर कॉलेज से की पढ़ाई, राजस्थान विश्वविद्यालय से हासिल की एलएलबी
आरके दास गुप्ता ने वर्ष 1964 में बीकानेर के डूंगर कॉलेज से बीए की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वर्ष 1966 में राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की।
कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वकालत के क्षेत्र में कदम रखा और अपने अनुभव तथा सक्रियता से अधिवक्ता समुदाय में सम्मान अर्जित किया।
आपातकाल के दौरान भी रहे बंदी
आरके दास गुप्ता के सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय आपातकाल से भी जुड़ा रहा।
वे 26 जून 1975 से 22 जनवरी 1977 तक आपातकाल के दौरान बंदी रहे। इस अवधि में उन्हें बीकानेर और जयपुर की जेलों में रखा गया था।
आरके दास गुप्ता का निधन प्रदेश के विधि समुदाय के साथ साथ राजनीतिक क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति है।
