जयपुर, 24 सितम्बर।
राजस्थान हाईकोर्ट ने बहुचर्चित प्राध्यापक स्कूल शिक्षा भर्ती परीक्षा 2022 पेपर लीक मामले में सात आरोपियों की ओर से दायर जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया है।
जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकलपीठ ने 25 लाख रुपये में पेपर खरीदकर टीचर बनने की आरोपी कविता लखेरा सहित तीन आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
दो अन्य आरोपियों में ओमप्रकाश पुत्र रामदेव गुर्जर और दीपक लक्षकार उर्फ विष्णु शामिल हैं, जिनकी जमानत याचिकाएं भी हाईकोर्ट ने खारिज की हैं।
वहीं, आरोपी रोशन बांगड़वा, गोपाल, वैदेही मीणा और ओमप्रकाश पुत्र उदाराम को नियमित जमानत दी गई है.
अलग-अलग दलीलें
आरोपियों की ओर से दायर जमानत याचिकाओं में कहा गया कि इस मामले में उन्हें झूठा फंसाया गया है।
याचिका में कहा गया कि केवल सह-अभियुक्त कविता लखेरा के कथनों के आधार पर रोशन बांगड़वा, गोपाल, वैदेही मीणा और ओमप्रकाश पुत्र उदाराम को मामले से जोड़ा गया है।
इसके अलावा, ये सभी आरोपी लंबे समय से न्यायिक अभिरक्षा में हैं और प्रकरण के निपटारे में समय लगने की संभावना है।
वैदेही मीणा की ओर से यह भी दलील दी गई कि वह गर्भवती है और जल्द ही उसकी डिलीवरी होने वाली है.
सरकार का विरोध
राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण में आरोपी ओमप्रकाश पुत्र रामदेव गुर्जर और सुमेर बिश्नोई की बातचीत के प्रमाण मिले हैं।
एफएसएल जांच में लंबित पेनड्राइव में रिकॉर्ड वार्ता से यह स्पष्ट होता है कि 30 लाख रुपये में सौदा हुआ था और नौ लाख रुपये ओमप्रकाश गुर्जर को मिलने थे।
अभियोजन पक्ष ने यह भी दलील दी कि दीपक लक्षकार और कविता लखेरा ने पेपर लीक की साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई और अनुचित साधनों का प्रयोग कर चयन प्राप्त किया.
ठोस सबूत नहीं
हाईकोर्ट ने आरोपी रोशन बांगड़वा, गोपाल, वैदेही मीणा और ओमप्रकाश पुत्र उदाराम की जमानत याचिकाएं मंजूर करते हुए कहा कि अभियोजन के पास उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं और ये लंबे समय से हिरासत में हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपियों को लंबे समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ दिया जाता है।
वहीं, हाईकोर्ट ने माना कि ओमप्रकाश पुत्र रामदेव गुर्जर, दीपक लक्षकार और कविता लखेरा के खिलाफ उपलब्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग और वार्तालाप से उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस चरण पर इन आरोपियों को जमानत का लाभ देना उचित नहीं है।