जोधपुर, 26 सितंबर
जोधपुर में गठित राजस्थान राज्य सिविल अपीलेट अधिकरण की स्थाई पीठ ने पिछले एक साल में केवल 64 दिन की न्यायिक कार्रवाई की हैं.
एक साल में न्यूनतम दिन कार्य के इस आंकड़े के सामने आने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई हैं.
जस्टिस पी एस भाटी और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार और अधिकरण अध्यक्ष से जानकारी मांगी हैं.
आगामी सुनवाई 28 अक्टूबर तय करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि वो इस मामले में RAT की स्थाई पीठ के नियमित क्रियान्वयन की संतुष्टि मिलने के बाद ही जनहित याचिका पर अंतिम बहस के लिए सुनवाई करेगी.
राजस्थान हाइकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने जनहित याचिका दायर इस मामले को उठाया हैं.
हाईकोर्ट के आदेश से गठन
एसोएिशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद पुरोहित और अनिल भंडारी ने अदालत को खंडपीठ ने 19 जुलाई 2022 को जोधपुर में स्थाई पीठ अधिसूचित करने के लिए राज्य सरकार को निर्देश दिए थे.
कोर्ट आदेश की पालना में सरकार ने 4 मई 2023 को अधिसूचना जारी की और जोधपुर पीठ के क्षेत्राधिकार में जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, पाली और बांसवाड़ा संभाग के सभी जिलों को शामिल करते हुए लंबित मामलों और नई अपीलों की सुनवाई जोधपुर में करने का आदेश जारी किया.
8 माह में 39 दिन
अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि स्टाफ की नियुक्ति और संसाधन होने के बावजूद स्थाई पीठ वास्तविक रूप से क्रियान्वत नहीं हो पाई.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि गत वर्ष सितंबर से दिसंबर तक केवल 25 दिन और इस वर्ष जनवरी से अगस्त तक 39 दिन की न्यायिक कार्रवाई जोधपुर पीठ में हुई.
हाईकोर्ट ने इसे बेहद शर्मनाक स्थिति करार देते हुए कहा कि Rajasthan Administrative Tribunal स्थाई पीठ के वास्तविक क्रियान्वयन की पुष्टि के बाद ही याचिका पर अंतिम बहस की जाएगी।