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SI Recruitment 2021 paper leak: कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा ने राजस्थान हाईकोर्ट में दायर की अपील, अदालत की टिप्पणी हटाने का अनुरोध

जयपुर, 27 सितंबर

मशहूर कवि और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता डॉ. कुमार विश्वास की पत्नी, मंजू शर्मा, ने राजस्थान हाईकोर्ट में विशेष अपील दायर की है.

यह अपील 28 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट की एकलपीठ द्वारा SI Recruitment 2021 paper leak मामले में सुनाए गए आदेश और टिप्पणियों के खिलाफ है, जिसमें उन्होंने मंजू शर्मा के खिलाफ टिप्पणियां की गई थीं.

मंजू शर्मा की ओर से दायर विशेष अपील में कहा गया है कि हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मंजू शर्मा के खिलाफ कठोर और अनुचित टिप्पणियां की हैं, जबकि उन्हें न तो इस याचिका में पक्षकार बनाया गया और न ही उन्हें सुनवाई का न्यूनतम अवसर दिया गया।

अपील में यह भी कहा गया है कि यह आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों, ‘audi alteram partem’ के नियम और सुप्रीम कोर्ट तथा राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा स्थापित कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।

अपीलकर्ता ने अदालत से यह अनुरोध किया है कि उनके खिलाफ किए गए प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाया जाए और भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के आदेश पर पुनर्विचार किया जाए।

झूठे आरोप लगाने का एक खतरनाक उदाहरण

मंजू शर्मा की ओर से दायर कि गयी अपील में कहा गया हैं कि अदालतें बिना सुनवाई के किसी व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां नहीं कर सकतीं और यदि ऐसा किया जाता है तो यह आदेश अमान्य माना जाएगा.

मंजू शर्मा ने इस अपील में यह भी कहा है कि यदि इन टिप्पणियों को हटाया नहीं गया तो यह सार्वजनिक अधिकारियों के खिलाफ झूठे आरोप लगाने का एक खतरनाक उदाहरण बनेगा और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बढ़ाएगा।

अपील में अदालत से अनुरोध किया है कि उनके खिलाफ किए गए सभी प्रतिकूल और अनुचित टिप्पणियों को हटाया जाए और केवल पेपर लीक के आधार पर भर्ती रद्द करने का आदेश कायम रखा जाए.

अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन

विशेष अपील में कहा गया है कि अदालत ने मंजू शर्मा को किसी भी पक्षकार के रूप में शामिल किए बिना और उन्हें सुनवाई का अवसर दिए बिना उनके खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी की है जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है.

अपील में कहा गया है कि अदालत की टिप्पणियां बिना किसी ठोस साक्ष्य के की गई हैं। कोई ऑडियो रिकॉर्डिंग, प्रत्यक्ष साक्षी विवरण या भर्ती प्रक्रिया के मार्किंग का कोई ऑडिट ट्रेल नहीं है, जो उन्हें दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त हो.

इ​स्तीफा देने के लिए मजबूर

अपील में कहा गया हैं कि केवल संपर्क का उल्लेख करने वाली चार्जशीट को आधार बनाकर किसी सार्वजनिक अधिकारी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना न्याय का उल्लंघन है.

अपील में यह भी कहा गया है कि अदालत की टिप्पणियों ने मंजू शर्मा की ईमानदारी और नैतिक छवि को धूमिल किया है, जिससे उन्हें सामाजिक और पेशेवर स्तर पर नुकसान हुआ, मानसिक तनाव बढ़ा और उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा.

फैसले के बाद इस्तीफा

गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद मंजू शर्मा ने RPSC के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था।

SI Recruitment 2021 पेपर लीक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद जिस तरह से आयोग के कामकाज और भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठे, उसके बाद मंजू शर्मा की नियुक्ति पर भी सवाल खड़े होने लगे थे।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद, मंजू शर्मा ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेजकर लिखा था कि वह अपनी स्वेच्छा से पद छोड़ रही हैं।

मंजू शर्मा का कार्यकाल 15 अक्टूबर 2020 से 14 अक्टूबर 2026 तक का था और वे इस पद पर कार्यरत थीं।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

राजस्थान हाईकोर्ट ने 28 अगस्त को अपने आदेश में SI भर्ती परीक्षा 2021 को रद्द करने का फैसला सुनाया था।

कोर्ट ने कहा कि आयोग के कुछ सदस्य पेपर लीक और इंटरव्यू प्रक्रिया में धांधली में शामिल थे, जिससे भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि यह “आंतरिक भ्रष्टाचार” है जिसने भर्ती की पवित्रता को ध्वस्त कर दिया।

प्रोफेसर से सदस्य तक

अजमेर की रहने वाली मंजू शर्मा ने राजस्थान यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है। शिक्षा जगत में उनकी पहचान गहरी है। उन्होंने कॉलेज लेक्चरर की परीक्षा पास की और राजस्थान के कॉलेज में बतौर प्रोफेसर अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद उन्हें RPSC का सदस्य नियुक्त किया गया।

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