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पैरामेडिकल कॉलेजों को Rajasthan Highcour से बड़ा झटका, नहीं मिली सीटें बढ़ाने या नए कोर्स शुरू करने की अनुमति

जोधपुर, 28 सितंबर

प्रदेश के पैरामेडिकल कॉलेजों को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने National Commission for Allied and Healthcare Profession के फैसले पर मुहर लगाते हुए पैरामेडिकल कॉलेजों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने या सीटें बढ़ाने पर रोक संबंधी राष्ट्रीय आयोग के निर्णय को उचित ठहराया है।

Dr. Justice Pushpendra Singh Bhati और Justice Bipin Gupta की खंडपीठ ने डॉ. दयाल इंस्टिट्यूट, श्रीराम कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंस सहित अन्य कॉलेजों की अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।

गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा स्थापित National Commission for Allied and Healthcare Profession ने 9 दिसंबर 2024 को आदेश जारी कर स्पष्ट किया था कि नए विनियम लागू होने तक किसी भी पैरामेडिकल कॉलेज को न तो नए कोर्स शुरू करने की अनुमति होगी और न ही सीटें बढ़ाने की।

इस आदेश को प्रदेश के कई कॉलेजों ने अपील याचिका के जरिए राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

आयोग ने बताया कि विनियमन का मसौदा अभी लंबित है और जब तक यह अधिसूचित नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं दी जा सकती।

अपीलकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि नए कानून की व्यापकता पूर्व समय से लागू नहीं की जा सकती, जिससे उनकी संस्थाओं को नुकसान नहीं पहुँचना चाहिए।

कॉलेजों की ओर से कहा गया कि उन्होंने सामान्य खंड अधिनियम, 1897 की धारा 6 का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से पूर्वव्यापी संरक्षण की मांग की।

आयोग की ओर से अधिवक्ता निमेष सुथार ने दलील दी कि 2021 का अधिनियम स्पष्ट है और जब तक विनियम नहीं बन जाते, तब तक नए पाठ्यक्रमों की अनुमति नहीं दी जा सकती।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि एलाइड हेल्थ और पैरामेडिकल शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बिना नियम और दिशानिर्देशों के उदारता दिखाना उचित नहीं होगा। साथ ही, अदालत ने National Commission for Allied and Healthcare Profession को शीघ्रता से नए नियम बनाने का निर्देश दिया और अपीलों को खारिज कर दिया।

इस मामले में राजस्थान काउंसिल की ओर से एडवोकेट भवित शर्मा और National Commission for Allied and Healthcare Profession की ओर से एडवोकेट निमेष सुथार ने पैरवी की।

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