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Additional Solicitor General भरत व्यास ने किया पदभार ग्रहण, AG, BCR चेयरमेन और वरिष्ठ अधिवक्ता रहे मौजूद

जयपुर, 1 अक्टूबर

राजस्थान हाईकोर्ट के डेज़िगनेटेड सीनियर एडवोकेट और राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता रहे भरत व्यास ने आज राजस्थान के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) के पद पर कार्यभार ग्रहण किया है।

राजस्थान हाईकोर्ट परिसर स्थित ASG कार्यालय में विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना कर कार्यभार ग्रहण किया गया।

बीएपीएस अक्षरधाम, जयपुर के कोठारी स्वामी साधु सर्वदर्शनदास और साधू अक्षरप्रेम दास की मौजूदगी में विशेष पूजा-अर्चना की गई।

इस मौके पर राज्य के महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद और राजस्थान बार काउंसिल के चैयरमेन भुवनेश शर्मा ने माला और साफा पहनाकर पदभार ग्रहण करवाया।

पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान महाधिवक्ता और बार चैयरमेन के साथ ही सौरभ सारस्वत, लोकायुक्त सचिव गौरीशंकर, अतिरिक्त महाधिवक्ता माही यादव, पूर्व बार अध्यक्ष प्रहलाद शर्मा, अधिवक्ता नीरज बत्रा, निधि खंडेलवाल, शिव नारायण बोहरा, कीर्ति स्वरूप चंदेल, राजेंद्र शेखावत, संदीप पाठक, वी. पी. माथुर, नीति माथुर, चंद्रशेखर सिन्हा, सारस्वत पुरोहित सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे।

गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता भरत व्यास को 1 अक्टूबर 2025 से अगले तीन वर्षों तक ASG नियुक्त करने का आदेश जारी किया था।

कैबिनेट की अपॉइंटमेंट्स कमेटी (ACC) की ओर से मंजूरी मिलने के बाद 19 सितंबर को नियुक्ति आदेश जारी किया गया।

राजस्थान के ASG पद पर सीनियर एडवोकेट आर. डी. रस्तोगी कार्यरत थे जिनका कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हुआ। वे 2014 से लगातार पांच बार इस पद पर बने रहे।

चार दशक का अनुभव

वरिष्ठ अधिवक्ता भरत व्यास राजस्थान के प्रतिष्ठित वरिष्ठ अधिवक्ताओं में शामिल हैं, जो वर्ष 1984 से लगातार राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर और जोधपुर पीठ में प्रैक्टिस कर रहे हैं।

उन्होंने अपने 40 वर्ष से अधिक के पेशेवर जीवन में न्यायिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

भरत व्यास वर्ष 1999 से 2003 तक राजस्थान हाईकोर्ट में भारत सरकार के सहायक सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं।

वर्ष 2003 से 2008 तक वसुंधरा राजे सरकार में राजस्थान सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता रहे हैं।

वर्तमान बीजेपी सरकार के साथ ही उन्हें 12 फरवरी 2024 से राजस्थान में अतिरिक्त महाधिवक्ता नियुक्त किया गया।

इसके साथ ही 1999 से 2017 तक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के स्थायी अधिवक्ता रहे हैं।

जयपुर विकास प्राधिकरण के लिए भरत व्यास 1994 से 2008 तक स्थायी अधिवक्ता रहे।

भरत व्यास ने राजस्थान वित्त निगम (RFC), राजस्थान औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO), MDS विश्वविद्यालय अजमेर, जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी, महात्मा गांधी मेडिकल साइंसेज यूनिवर्सिटी जयपुर, जयपुर विद्युत वितरण निगम (JVVNL) सहित कई संस्थाओं के लिए भी प्रतिनिधित्व किया है।

9500 से अधिक मुकदमें

भरत व्यास अब तक 9500 से अधिक मामलों में पैरवी कर चुके हैं, जिनमें परिवहन, भूमि अधिग्रहण, दुर्घटना दावे, राजस्व, किराया नियंत्रण, सेवा मामलों और सार्वजनिक खरीद से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं।

एक अधिवक्ता के रूप में उन्होंने अपना दायरा सिर्फ राजस्थान हाईकोर्ट तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, देश के एक दर्जन से अधिक हाईकोर्ट, सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT), राजस्थान प्रशासनिक ट्रिब्यूनल, डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल, उपभोक्ता विवाद आयोग, फैमिली कोर्ट, लेबर कोर्ट और एनसीएलटी (NCLT) में भी लंबे समय तक पैरवी की है।

जोधपुर से जयपुर

जोधपुर में जन्मे भरत व्यास की प्राथमिक शिक्षा जोधपुर में हुई।

जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से उन्होंने B.Com, LL.B. की डिग्री हासिल की।

अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता एम. एम. व्यास, आर. आर. व्यास तथा राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एम. आर. काला के साथ प्रैक्टिस की।

राज्य की सभी विश्वविद्यालयों में विधि स्नातक पाठ्यक्रम में टॉपर रहने पर वर्ष 1984 में उन्हें के. एन. वांचू स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

अरूण जेटली टीम के सदस्य

भरत व्यास महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन के भामाशाह पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं।

अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत होने के बाद भरत व्यास अधिकांश समय जयपुर में ही रहे।

भरत व्यास को पूर्व वित्तमंत्री अरूण जेटली की कोर टीम का सदस्य माना जाता है। वे लंबे समय तक अरूण जेटली के अधिवक्ता टीम में शामिल रहे।

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