टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

Rajasthan Highcourt : 9 साल से फरार 75 वर्षीय पूर्व महिला सरपंच की अग्रिम जमानत खारिज, कोर्ट ने कहा जनता के साथ विश्वासघात किया

जयपुर, 3 अक्टूबर
Rajasthan Highcourt ने धौलपुर जिले की ताजपुरा ग्राम पंचायत की 75 वर्षीय पूर्व महिला सरपंच रामरति को लाखों के घोटाले के मामले में अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया है।

जस्टिस शुभा मेहता की एकलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि आरोपिता ने सरपंच रहते हुए ग्राम पंचायत के निर्माण कार्यों के लिए प्राप्त 53,77,150 रुपए की राशि का दुरुपयोग कर आम जनता के साथ आपराधिक विश्वासघात किया है।

बचाव पक्ष की दलील

पूर्व सरपंच की ओर से दायर याचिका पर अधिवक्ता ने दलील पेश करते हुए कहा कि प्रार्थी एक 75 वर्षीय महिला हैं और उनके खिलाफ इस प्रकार का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

अधिवक्ता ने कहा कि प्रार्थी को इस मामले में गलत रूप से फंसाया गया है, और सह-अभियुक्त परसराम को कोर्ट द्वारा दोषमुक्त किए जाने के बाद अब उसके मामले में परिस्थितियां बदल गई हैं।

साथ ही अधिवक्ता ने कहा कि पूर्व सरपंच इस मामले में जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

सरकार का विरोध

राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि यह मामला करीब 9 वर्ष पुराना है और पुलिस ने इस मामले में 20 जुलाई 2016 को चार्जशीट पेश कर दी थी।

सरकार ने कहा कि आरोपी पूर्व सरपंच ने जानबूझकर पिछले 9 साल से फरार रही हैं और उनके खिलाफ दर्ज मामले की जांच में कोई सहयोग नहीं किया गया।

जानबूझकर रही फरार

Rajasthan Highcourt ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता पूर्व सरपंच ने इससे पूर्व वर्ष 2016 में हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी।

जिसे याचिकाकर्ता द्वारा 29 अगस्त 2016 को वापस लेने के आधार पर खारिज कर दिया गया था। इसके बाद अब वर्ष 2025 में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई।

Rajasthan Highcourt ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता पूर्व सरपंच को अपने खिलाफ दर्ज मामले की पूरी जानकारी होते हुए भी वह 9 साल तक फरार रही।

अदालत ने कहा कि आरोपी याचिकाकर्ता ने जानबूझकर अपने सहयोगी सह-अभियुक्त परसराम के खिलाफ ट्रायल पूर्ण होने दिया।

फरारी से ट्रायल में हुई देरी

Rajasthan Highcourt ने कहा कि ट्रायल पूर्ण होने के बाद जब सह-आरोपी को दोषसिद्ध किया गया और अपीलीय कोर्ट द्वारा उसे दोषमुक्त कर दिया गया, तब वह सामने आई।

हाईकोर्ट ने कहा कि प्रार्थी ने अग्रिम जमानत का दूसरा प्रार्थना पत्र 9 साल बाद पेश किया, जबकि उसके फरार रहने से जानबूझकर ट्रायल में देरी हुई।

Rajasthan Highcourt ने पूर्व सरपंच को जानबूझकर 9 वर्षों तक फरार रहने और मामले की देरी का कारण बनने के चलते अग्रिम जमानत देने योग्य नहीं मानते हुए जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

सबसे अधिक लोकप्रिय