जयपुर, 3 अक्टूबर
Rajasthan Highcourt ने पोक्सो अधिनियम के तहत 20 साल की सजा पाए एक 21 वर्षिय कैदी को मानवीय आधार पर 15 दिन की पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया हैं.
Highcourt ने बंदी के पिता के ईलाज के लिए इमरजेंट पैरोल पर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया हैं.
जस्टिस शुभा मेहता की एकलपीठ ने कैदी के पिता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते 9 अक्टूबर 2025 तक की इमरजेंट पैरोल दी हैं.
पिता की ओर से दायर कि गयी याचिका में दलील दी गयी कि उन्हे Ancolosing Spondylitis की गंभीर और दुर्लभ बीमारी हैं .
याचिका में बिमारी का हवाला देते हुए अनुरोध किया कि पिता का उचित इलाज करवाने के लिए तत्काल पैरोल पर रिहा किया जाए.
अधिवक्ता की दलील
अधिवक्ता विश्राम प्रजापति ने अदालत को बताया कि बंदी का जेल में आचरण अच्छा रहा है और इससे पहले भी 29 अगस्त से 12 सितंबर 2023 तक पैरोल दिया गया था, जिसमें उसने किसी प्रकार का दुरुपयोग नहीं किया.
याचिका में कहा गया कि समाज कल्याण विभाग की रिपोर्ट भी बंदी के पक्ष में है.
सरकार ने कहा नियमों में नहीं
राज्य सरकार की ओर से पॉक्सों मामलों में दोषी घोषित किए गए बंदी को पैरोल पर रिहा करने का कोई नियम नहीं होते हुए याचिका का विरोध किया.
लोक अभियोजक ने विरोध करते हुए कहा कि राजस्थान बंदी कारावकाश पर रिहाई नियम, 2021 के नियम 16(2) के अनुसार, पोक्सो अधिनियम के दोषसिद्ध अपराधियों को सामान्य पैरोल पर रिहाई नहीं दी जा सकती.
मानवीय आधार
Rajasthan Highcourt ने दोनो पक्षों की बहस सुनने के बाद कहा कि जस्थान बंदी कारावकाश पर रिहाई नियम, 2021 के नियम के तहत बंदी को पैरोल नहीं दी जा सकती है.
लेकिन पूर्व न्यायिक फैसलो और नियम 11 के मानवीय प्रावधानों के आधार पर बंदी को इमरजेंट पैरोल पर रिहा किया जा सकता हैं.
हाईकोर्ट ने सशर्त बंदी अपूर्व उर्फ रमन को 15 दिन की इमरजेंट पैरोल देने के आदेश दिए हैं.