जयपुर, 3 अक्टूबर
Rajasthan Highcourt ने पिछले 2 साल से कोमा में बिस्तर पर इलाजरत वाणिज्य कर अधिकारी सुरेंद्र सिंह चावड़ा के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है।
Justice Ravi Chiraniya ने दो साल तक कोमा में रह रहे अधिकारी को वेतन का भुगतान नहीं करने पर हैरानी जताई।
पत्नी मेघा कंवर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के वाणिज्य कर आयुक्त को अगले 7 दिन में संपूर्ण वेतन देने का आदेश दिया गया है।
दो साल से कोमा में
वाणिज्य कर अधिकारी सुरेंद्र सिंह चावड़ा पिछले दो वर्षों से कोमा में हैं और इस दौरान उन्हें न तो वेतन दिया गया और न ही अन्य कोई लाभ, जबकि उनके इलाज पर भारी खर्च भी हो रहा है।
वेतन नहीं मिलने पर उनकी पत्नी मेघा कंवर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
अधिवक्ता तनवीर अहमद ने मामले में पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि वाणिज्य कर विभाग में असिस्टेंट कमर्शियल टैक्स ऑफिसर के पद पर कार्यरत सुरेंद्र सिंह चावड़ा 07 अगस्त 2023 से कोमा में हैं।
नहीं किया गया भुगतान
अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि चावड़ा को ब्रेन हेमरेज के कारण स्थायी विकलांगता हो गई है और वे 76% लोमोटर डिसेबिलिटी के साथ पूरी तरह से बिस्तर पर हैं। इसके बावजूद विभाग ने उनके अगस्त 2024 से वेतन का भुगतान नहीं किया।
याचिका में कहा गया कि, “कोमा में होने के बावजूद वे परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य हैं। वेतन न मिलने से परिवार को गंभीर वित्तीय कठिनाई का सामना करना पड़ा है। विभाग का रवैया संवेदनशीलता और मानवता के बिल्कुल विपरीत है।”
परिवार कैसे चलता होगा…
मामले की सुनवाई कर रहे Justice Ravi Chiraniya ने इस बात पर हैरानी जताई कि कोमा में इलाजरत एक अधिकारी का उसका ही विभाग साथ नहीं दे रहा है।
Justice Ravi Chiraniya ने मामले में मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “आखिर दो साल से यह परिवार कैसे चल रहा होगा। जब एक महीने की तनख्वाह नहीं मिलती तो पूरा परिवार प्रभावित होता है। यहाँ तो व्यक्ति पिछले दो साल से कोमा में है और इलाज पर भारी खर्च हो रहा है। अदालत ने सरकार से पूछा कि क्या सरकार ने कभी सोचा कि यह परिवार दो वर्षों से कैसे गुजारा कर रहा होगा?”
वित्त सचिव कोर्ट में पेश
Highcourt ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोपहर बाद की सुनवाई में राज्य के वाणिज्य आयुक्त को तलब किया।
कोर्ट आदेश के बाद वाणिज्य कर आयुक्त का चार्ज संभाल रहे राज्य के वित्त सचिव कुमार पाल गौतम वीसी के जरिए कोर्ट में पेश हुए।
Highcourt ने वित्त सचिव से भी पूछा कि आखिर अधिकारी का परिवार कैसे चल रहा होगा। वित्त सचिव को मामले में संवेदनशीलता दिखाने का कहते हुए कोर्ट ने 7 दिन में वेतन देने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग को 7 दिनों के भीतर अधिकारी का पूरा बकाया वेतन भुगतान करना होगा और आवश्यक चिकित्सा खर्चों का भी मुआवजा देना होगा।