जयपुर, 5 अक्टूबर
Rajasthan Highcourt की जयपुर पीठ ने साइबर फ्रॉड मामले में आरोपी रहिश खान की दूसरी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
जस्टिस शुभा मेहता की एकलपीठ ने प्रदेश में बढ़ते साइबर क्राइम के चलते आरोपी को संगठित साइबर अपराध में शामिल मानते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि जांच अभी जारी है और इस स्तर पर अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा।
कामा थाने में दर्ज मुकदमे के अनुसार आरोपी रहिश खान पर आईपीसी की कई धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत साइबर क्राइम के आरोप हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विक्रम सिंह चौहान ने दलील दी कि रहिश खान का नाम एफआईआर में नहीं है और उसे झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि पहले से गिरफ्तार चार आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और रहिश खान का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए एडीपीपी अमित पुनिया ने कहा कि जांच में आरोपी की संलिप्तता सामने आई है। उसके घर और बैंक खाते से साइबर ठगी की रकम और मोबाइल सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।
पॉपी हस्क तस्करी मामले में जमानत खारिज
Rajasthan Highcourt की जयपुर बेंच ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में आरोपी अभय सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस शुभा मेहता की एकलपीठ ने आरोपी से बरामद अफीम की भूसी की मात्रा को व्यावसायिक श्रेणी का मानते हुए जांच के लिए उसकी हिरासत को आवश्यक बताया। इसलिए अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
मध्यप्रदेश निवासी 20 वर्षीय अभय सिंह पर कोटा ग्रामीण के मंडक थाना क्षेत्र में 113 किलो अफीम की भूसी बरामदगी का आरोप है।
आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है, लेकिन लोक अभियोजन ने कहा कि सह-आरोपियों के बयान और मोबाइल लोकेशन से उसकी संलिप्तता साबित होती है।