जयपुर, 9 अक्टूबर।
Rajasthan Highcourt ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण आदेश में एमबीबीएस अभ्यर्थी नरेंद्र महला को बड़ी राहत देते हुए उसे Neet-UG के तीसरे राउंड की काउंसलिंग में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता नरेंद्र महला की परदादी के निधन के कारण वे समय पर फीस जमा नहीं कर सके थे.
अंतिम तिथि से कुछ घंटे की देरी से फीस जमा करने पर काउंसलिंग बोर्ड ने उनकी सीट को “रिक्त” घोषित कर दिया और उनकी उम्मीदवारी को “अयोग्य” ठहराते हुए ₹5 लाख की सुरक्षा राशि भी जब्त कर ली थी।
अधिवक्त तनवीर अहमद के जरिए दायर कि गयी याचिका में दलील दी गयी कि अभ्यर्थी ने अंतिम समय में बेहद गंभीर कारण के चलते फीस जमा नहीं करा पाया हैं.
जबकि इस तरह के मामलों में भारी-भरकम फीस वसूली जाती है, और फीस जमा करने के लिए बहुत कम समय दिया जाता है, जो कई बार छुट्टियों या अवकाश के बीच पड़ता है.
हाईकोर्ट का आदेश
Rajasthan Highcourt ने इस मामले में राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग और नीट यूजी काउंसलिंग बोर्ड को आदेश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को तीसरे राउंड की काउंसलिंग में शामिल किया जाए।
Highcourt ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को तीसरे राउंड की काउंसलिंग में शामिल होने की अनुमति दी जाए।
Highcourt ने पहले से जमा ₹5 लाख की सुरक्षा राशि और ₹13 लाख की शेष राशि को उसकी आगे की फीस में समायोजित करने के आदेश दिए हैं. जब तक यह समायोजन पूरा नहीं होता, तब तक याचिकाकर्ता से कोई अतिरिक्त राशि नहीं मांगी जाए।
सख्त टिप्पणी
Justice Sameer Jain की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह चिंता का विषय है कि चिकित्सा शिक्षा में छात्रों से भारी-भरकम फीस वसूली जाती है, और फीस जमा करने के लिए बहुत कम समय दिया जाता है, जो कई बार छुट्टियों या अवकाश के बीच पड़ता है।
अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसी व्यवस्थाओं की ऑडिट और समीक्षा की जानी चाहिए ताकि “गरीब और प्रतिभाशाली छात्रों के साथ अन्याय न हो।”
‘भविष्य छीनना उचित नहीं’
Justice Sameer Jain की एकलपीठ ने कहा कि कुछ घंटे की देरी से फीस जमा करने के कारण छात्र के भविष्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता.
अदालत ने कहा कि महला जैसे छात्र, जो आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं और पारिवारिक त्रासदी से गुजर रहे थे, उनसे तकनीकी कारणों के चलते भविष्य छीनना उचित नहीं है।
अदालत ने कहा कि यह मामला “न्यायसंगतता और समानता” से जुड़ा है।
“राज्य एक कल्याणकारी राज्य है, उसे छात्रों से कठोर रवैया नहीं अपनाना चाहिए। कुछ घंटे की देरी से जमा फीस के कारण किसी छात्र का करियर बर्बाद नहीं होना चाहिए।”
अदालत ने सुरक्षा राशि की जब्ती को भी अनुचित बताया और कहा कि काउंसलिंग बोर्ड या निजी कॉलेज के पास इस राशि को रखने का कोई वैध कारण नहीं है।
नजीर नहीं
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश इस मामले की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है और इसे नजीर (precedent) नहीं माना जाएगा।
साथ ही, अदालत ने आदेश की प्रति राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), स्वास्थ्य मंत्रालय, और राज्य सरकार के मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।