जयपुर, 13 अक्टूबर
राजधानी जयपुर के सांगानेर में एयरपोर्ट से प्रतापनगर के हल्दीघाटी सर्किल तक की 100 फीट चौड़ी रोड के निर्माण मामले में Rajasthan Highcourt ने अपना फैसला सुना दिया हैं.
ACJ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा व संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने अजय मार्ग निर्माण संघर्ष समिति सहित अन्य की याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा है कि एयरपोर्ट से प्रतापनगर के हल्दीघाटी सर्किल तक मास्टर प्लान के अनुसार ही सड़क बनेगी.
इस सड़क का निर्माण राज्य का सार्वजनिक निर्माण विभाग करेगा और मास्टर प्लान के अनुसार इस सड़क के बीच में आए हुए सभी अतिक्रमण सरकार और पुलिस की सहायता से हटाए जायेंगो.
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया हैं कि सड़क निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को किसी भी ट्रिब्यूनल या अदालत में चुनौति नहीं दी जा सकेगी, साथ ही पहले से जारी विवादों के मामले में इस पर लागू नही होंगे.
हाईकोर्ट का आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हल्दीघाटी मार्ग तक प्रस्तावित सड़क के निर्माण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं और पूरी जिम्मेदारी जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को सौंपी है।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) इस सड़क के निर्माण के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा और मास्टर प्लान के अनुरूप एयरपोर्ट से हल्दीघाटी मार्ग तक पूरी सड़क का निर्माण करेगा.
पैसा नही हो तो भी सड़क बनाएगा जेडीए
निर्माण पर आने वाला खर्च राजस्थान हाउसिंग बोर्ड (RHB) और जयपुर नगर निगम (JMC) अपने-अपने क्षेत्रों के अनुपात में वहन करेंगे.
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धन की अनुपलब्धता को कोई बहाना नहीं बनाया जा सकता—यदि फंड की कमी हो, तब भी जे.डी.ए. को सड़क निर्माण कार्य जारी रखना होगा.
कोर्ट के आदेशों पर रोक
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि सड़क निर्माण के मार्ग में यदि कोई अवैध निर्माण या अतिक्रमण पाया जाता है, तो उसे तत्काल हटाया जाए। इस प्रक्रिया में राज्य पुलिस विभाग आवश्यक सहायता प्रदान करेगा.
साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि इस विषय से संबंधित कोई भी नागरिक वाद या अपील किसी सिविल कोर्ट या ट्रिब्यूनल में स्वीकार नहीं की जाएगी.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा
“यदि किसी अदालत ने पहले कोई अंतरिम आदेश पारित किया है, तो वह आदेश इस निर्णय के साथ स्वतः समाप्त माना जाएगा,”
अब कोई बदलाव नहीं
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में जयपुर विकास प्राधिकरण को चेतावनी दी कि वह भविष्य में ऐसे मनमाने निर्णय या रियलाइन्मेंट (Realignment) न करे जो जनता के विश्वास को कमजोर करें या मास्टर प्लान में निर्धारित नियोजन के विरुद्ध हों.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह इस आदेश के अनुपालन की निगरानी करे और मास्टर डेवलपमेंट प्लान 2025 के प्रावधानों—जैसे सड़क चौड़ीकरण, भूमि उपयोग और सार्वजनिक परिवहन गलियारों—का पालन सुनिश्चित करे.
राज्य सरकार को तीन माह के भीतर अदालत में एक विस्तृत पालना रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें जियोटैगिंग, सेक्टर प्लान और सड़क निर्माण की प्रगति का विवरण शामिल होगा।
तीन बार अलायमेंट में बदलाव
गौरतलब है कि पिछले 13 साल से इस सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा है क्योंकि जेडीए ने इसके अलाइनमेंट में बार-बार बदलाव किए हैं।
अगस्त माह में इस मामले में Rajasthan Highcourt ने जेडीए के एक और अलाइनमेंट बदलाव के नोटिफिकेशन के गजट पब्लिकेशन पर रोक लगा दी थी।
20 अगस्त को भी Rajasthan Highcourt में जेडीए सचिव संपूर्ण रिकॉर्ड के साथ पेश हुए थे।
याचिकाकर्ता हेमराज की ओर से जेडीए पर आरोप लगाया गया है कि वह वीआईपी लोगों की जमीनों को संरक्षित करने के लिए बार-बार बदलाव कर रहा है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रहलाद शर्मा ने Rajasthan Highcourt में बताया था कि अदालत में मामला विचाराधीन होने के बावजूद भी जेडीए बार-बार रोड का अलाइनमेंट बदलता रहा है, जबकि रोड के मूल प्लान पर किसी को भी एतराज नहीं था.
उन्होंने बताया कि सोसायटी से भूखंड खरीदे गए थे और लोग कई सालों से रह रहे हैं, लेकिन अलाइनमेंट बदलने के कारण उनके मकानों पर भी टूटने की तलवार लटक गई है।
पिछली सुनवाई पर जेडीए ने कहा था कि जो रोड बननी है, उसमें कुछ हिस्सा जेडीए का है और कुछ हिस्सा हाउसिंग बोर्ड का है।
ये है मामला
इस रोड का साल 2018 में जोनल डेवलपमेंट प्लान बना दिया गया था। वहीं यह भी तय किया गया था कि जेडीए अपने हिस्से में 13 महीने व 6 दिन की अवधि में रोड बना देगा। इसके तहत ही वे रोड के लिए डिमार्केशन करने लगे थे।
बाद में इस मामले में सामने आया कि जो सड़क बनाई जा रही है, उसके आस-पास कई बड़ी जमीनें आ रही थीं, जिसके बाद जेडीए ने बदलाव कर दिए।
इस रोड को लेकर जेडीए व हाउसिंग बोर्ड के अलग-अलग मत होने पर पूर्व में Rajasthan Highcourt ने प्रमुख यूडीएच सचिव को पेश होकर यह बताने के लिए कहा था कि इस 100 फीट रोड के निर्माण के लिए उनकी क्या कार्ययोजना
अधिवक्ताओं का आभार
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अदालत की सहायता करने वाले सभी अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त किया हैं. हाईकोर्ट ने कहा कि इस महत्वपूर्ण शहरी विकास से जुड़ी सुनवाई में अधिवक्ताओं ने लंबी बहस के दौरान बेहतर सहयोग दिया।
याचिकाकर्ताओं कि ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एम.एम. रंजन, अधिवक्ता दौलत शर्मा, समर प्रताप सिंह नरूका, अधिवक्ता संदीप माथुर, अधिवक्ता कपिल शर्मा, हिमांशु जैन, ऋषि राज महेश्वरी, अपूर्वा अग्रवाल, अविनाश भारद्वाज और जतिन शर्मा ने पैरवी की.
वही प्रतिवादी पक्ष में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह, जेडीए के अधिवक्ता अमित कुरी, धर्माराम, ने पैरवी की.
स्थानिया निवासियों व अन्य पक्षकारों में वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मेहता, अधिवक्ता प्रहलाद शर्मा, अभिषेक भंडारी, जय शर्मा,संकल्प विजय, यश जोशी, प्रियं अग्रवाल, दीपक मित्तल, ऋतिका नरूका, तन्वीशा पंत, मोनीषा अग्रवाल, हमीर सिंह शेखावत, तथा तनिष्क आदित्य परमार,शांतनु गुप्ता, हर्षिता नेहरा,अशोक शर्मा, नलिन जी. नरैन के साथ मनीष भारद्वाज, श्रेयांश जैन और अनुद्यति मैत्रा भी उपस्थित रहे।