टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

Principals Transfer प्रक्रिया पर रोक से हाईकोर्ट का इंकार, कहा प्रशासनिक आधार पर तबादले का अधिकार सरकार के पास

Rajasthan High Court Quashes 13-Year-Delayed Disciplinary Action Against Retired Prosecutor, Slaps ₹50,000 Fine on State

Principals Transfer जोधपुर, 17 अक्टूबर

Rajasthan Highcourt ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया हैं कि राज्य सरकार को अपने अधिन सरकारी कर्मचारियों के प्रशासनिक आधार पर तबादले का अधिकार हैं.

Rajasthan Highcourt ने कहा कि सरकार द्वारा किए गए ट्रांफसर केवल उन मामलों में चुनौती के योग्य हैं जहां दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य या नियमों का उल्लंघन हुआ हो.

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया हैं कि विकलांग और विशेष श्रेणी के कर्मचारियों की representations को प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार देखा जाएगा.

Justice Munnuri Laxman ने इसके साथ ही प्रदेशभर के सैकड़ो प्रिसिपल की ओर से ओर से दायर याचिकाओं में हस्तक्षेप से इंकार करते हुए disposed of कर दी हैं.

Justice Munnuri Laxman ने कहा कि वह ट्रांसफर प्रक्रिया को रोकने के लिए सहमत नहीं है.

ट्रांसफर के विरोध में दलील

याचिकाकर्ता प्रधानाध्यापकों की ओर से एक दर्जन से अधिक अधिवक्ताओं ने पैरवी करते हुए दलील दी कि उनके तबादले राज्य सरकार की ट्रांसफर पॉलिसी का उल्लंघन करते हैं, जो विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों को प्राथमिकता देती है, जैसे कि वरिष्ठता, सेवानिवृत्ति के निकट होना, शारीरिक अक्षमता, गंभीर रोग, और दूरदराज के क्षेत्रों में सेवा करना.

याचिकाओं में यह भी तर्क दिया गया कि बार-बार किए गए तबादले कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए असुविधाजनक हैं, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, और शैक्षणिक वर्ष के बीच तबादला अनुचित है.

कुछ प्रधानाध्यापकों ने यह भी दावा किया कि उन्हें अंग्रेजी माध्यम स्कूलों से हिंदी माध्यम स्कूलों में स्थानांतरित करना नियमों का उल्लंघन है.

सरकार का पक्ष

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त अधिवक्ता जनरल S.S. Rathore और अधिवक्त R.S. Bhati और Yuvraj Singh Rathore ने याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि ये तबादले प्रशासनिक आवश्यकताओं के कारण विशेष हैं और सामान्य ट्रांसफर नियम लागू नहीं होते.

सरकार की ओर से कहा गया कि ट्रांसफर पॉलिसी के तहत दी गई प्राथमिकताएं केवल मार्गदर्शन हैं और कर्मचारियों को कानूनी अधिकार प्रदान नहीं करतीं.

हाईकोर्ट ने किया इंकार

दोनो पक्षों की बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि वह कर्मचारियों के तबादले पर अदालतें केवल उन मामलों में हस्तक्षेप करेगा जहां मालिशिएस (दुर्भावनापूर्ण) उद्देश्यों या कानूनी नियमों के उल्लंघन के स्पष्ट प्रमाण हों.

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विशेष श्रेणी के कर्मचारियों, जैसे विकलांग या गंभीर रोगों से पीड़ित, की representations को प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार देखा जाएगा.

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विशेष प्राथमिकताओं के दावेदार कर्मचारी अपनी representations केवल तबादले के बाद प्रस्तुत कर सकते हैं.

और सरकार प्रशासनिक आवश्यकताओं और पॉलिसी के अनुरूप उन्हें एक माह के भीतर विचार करेगी.

हाईकोर्ट ने कहा कि अन्य कर्मचारी, जो विभिन्न प्राथमिकताओं के लिए representation करना चाहते हैं, उन्हें आगामी सामान्य तबादलों में ऐसा करने की स्वतंत्रता दी गई .

सरकार के अधिवक्ता : अतिरिक्त महाधिवक्ता S.S. Rathore, R.S. Bhati और Yuvraj Singh Rathore

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता : Ram Pratap Saini, Bhola Ram Chahar, Ratan Ankiya, Ashok Choudhary, Mahender Kumar Dudy, Ripudaman Singh, Gopal Sandu, Kamini Joshi, Kunal Singh Rathore, Mahaveer Singh Rathore, Manvendra Singh Rathore, Lukesh Kumar Ramdhari, Pradeep Jat, Moti Singh, Hanuman Singh, Vipul Dharnia, Kunwar Prikshit Raj Deora, Hanuman Singh, Ankur Mathur, Ravindra Paliwal, Parikshit Nayak, Mahendra Singh Godara, Parvez Khan Moyal, Vikram Singh Bhati, Sunil Kumar Singodiya, Zafar Khan, Harshit Yadav, Sarwar Khan, Jitender Singh Bhaleria, Dheerendra Singh Sodha, Surendra Singh Choudhary, Bhim Raj Mudia, Ashwin Kumar Nogiya, Lakshya Singh Udawat, Vishal Jangid

सबसे अधिक लोकप्रिय