जयपुर, 23 अक्टूबर
Rajasthan Highcourt ने वर्ष 1995 टोंक दुष्कर्म मामले में टोंक जिला अदालत द्वारा दिए गए फैसले पर मुहर लगाते हुए आरोपी को 30 साल बाद जेल भेजने के आदेश दिए हैं.
जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू ने 30 वर्ष पुरानी इस अपील पर अपना फैसला सुनाते हुए टोंक जिला अदालत के फैसले को बरकरार रखा हैं.
Rajasthan Highcourt ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि बलात्कार केवल शारीरिक हमला नहीं है, बल्कि यह पीड़िता की मानसिक और भावनात्मक स्थिरता को प्रभावित करता है।
टोकं जिले के सीतारामपुरा का आरोपी सुरेश वर्ष 1995 में अपराध के समय 23 वर्ष का युवक था.
वर्ष 1996 में मामले में टोंक जिला अदालत ने आरोपी को 7 साल की कठोर सजा सुनाई थी.
जिला अदालत के फैसले के खिलाफ आरोपी सुरेश ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर कि थी. जिसके बाद अपील के आधार राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत दी थी फिलहाल आरोपी जमानत पर बाहर हैं.
Rajasthan Highcourt ने आरोपी सुरेश को चार सप्ताह में सरेंडर करने के आदेश दिए हैं. वर्तमान में आरोपी सुरेश करीब 53 साल का हो चुका हैं.