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Bar Election 2025 : छात्रसंघ से लेकर अब बार काउंसिल चुनाव तक-पहली बार किसी प्रत्याशी ने जारी किया घोषणा पत्र

RAJESH CORNAL SHARMA

Election Desk-Laws&Legals जयपुर, 26 अक्टूबर

प्रदेश के वकीलों की सबसे बड़ी नियामक संस्था बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के चुनाव इस बार कई मायनों में खास होंगे। लगभग आठ साल बाद होने जा रहे इन चुनावों में 25 सदस्यों के चयन के लिए अधिवक्ता मतदान करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, राजस्थान बार काउंसिल के चुनाव 31 जनवरी 2026 तक हर हाल में संपन्न कराए जाने हैं। इस दिशा में तैयारियां तेज हो चुकी हैं और प्रदेशभर के अधिवक्ता अब सक्रिय रूप से चुनावी मैदान में उतर रहे हैं।

इसी क्रम में जयपुर के जाने-माने अधिवक्ता और दी बार एसोसिएशन जयपुर के पूर्व अध्यक्ष राजेश कर्नल शर्मा ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए घोषणा पत्र (Manifesto) जारी किया है। खास बात यह है कि यह पहली बार है जब किसी उम्मीदवार ने बार काउंसिल चुनाव के लिए औपचारिक घोषणा पत्र जारी किया है।

राजेश कर्नल शर्मा ने अपने घोषणा पत्र में अधिवक्ताओं के हितों को केंद्र में रखते हुए कई अहम वादे किए हैं। इनमें प्रमुख हैं—

  • प्रदेशभर के सभी तहसील स्तर पर वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराना।
  • अधिवक्ताओं के लिए कई शहरों में टोल फ्री मार्ग की व्यवस्था करवाना।
  • जिला और तहसील स्तर पर लॉ लाइब्रेरी के आधुनिकीकरण की दिशा में कदम उठाना।
  • युवा अधिवक्ताओं के लिए प्रशिक्षण और वेलफेयर योजनाएं शुरू करना।
  • अधिवक्ता सुरक्षा कानून को लेकर ठोस पहल और केंद्र के समक्ष आवाज उठाना।

शर्मा ने कहा कि बार काउंसिल का चुनाव केवल पद प्राप्ति का नहीं, बल्कि “अधिवक्ता समुदाय की आवाज को नई दिशा देने का अवसर” है।

कर्नल कहते हैं कि आने वाले समय में अधिवक्ताओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने पर जोर रहेगा, ताकि हर वकील को न्यायिक जानकारी और संसाधनों तक समान पहुंच मिल सके.

राजस्थान बार काउंसिल के करीब सवा लाख अधिवक्ता इस बार मतदान करेंगे और 25 सदस्यों का चुनाव करेंगे। माना जा रहा है कि इन चुनावों में युवा अधिवक्ताओं की भागीदारी और संगठित प्रचार अभियान नया रंग लेकर आएंगे।

बार काउंसिल के आगामी चुनावों को लेकर पूरे प्रदेश में वकालत जगत में उत्साह और चर्चा का माहौल है.

इस बीच, राजेश कर्नल शर्मा का घोषणा पत्र एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में अन्य उम्मीदवारों को भी पारदर्शी और जिम्मेदार चुनावी दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

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