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सिर्फ डिग्री से नहीं मिलेगी नौकरी, अनुभव जरूरी’, भर्ती नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

Supreme Court Rules Higher Degree Cannot Replace Mandatory Experience in Government Jobs
सुप्रीम कोर्ट ने HP बोर्ड भर्ती मामले में कहा कि केवल डिग्री के आधार पर उम्मीदवार को योग्य नहीं माना जा सकता। अनिवार्य अनुभव की शर्त पूरी करना जरूरी है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में भर्ती को लेकर अपने एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ उच्च शैक्षणिक योग्यता (Higher Degree) किसी उम्मीदवार को नौकरी के लिए पात्र नहीं बना सकती, यदि वह भर्ती नियमों में तय अनिवार्य अनुभव (Mandatory Experience) को पूरा नहीं करता।

कोर्ट ने कहा कि योग्यता के नियमों को दरकिनार कर केवल बेहतर डिग्री या मेरिट के आधार पर चयन करना कानूनन सही नहीं है।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन में कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर के पद पर भर्ती से जुड़ा है।

अदालत की बेंच ने भर्ती प्रक्रिया की वैधता की जांच की। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चांदुरकर की बेंच ने भर्ती प्रक्रिया की जांच करते हुए पाया कि चयन के दौरान निर्धारित नियमों का सही पालन नहीं किया गया।

अनुभव बनाम डिग्री: कोर्ट की स्पष्ट लाइन

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भर्ती नियमों में तय अनिवार्य योग्यता (Essential Qualification) को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। Preferred Qualification (वांछनीय योग्यता), जैसे कि MTech डिग्री, को आधार बनाकर अनिवार्य शर्तों में छूट नहीं दी जा सकती।

चयनित उम्मीदवार के पास आवेदन के समय केवल करीब 1 साल का अनुभव था, जबकि नियमों के अनुसार कम से कम 5 साल का अनुभव जरूरी था।

अदालत की टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि यह मामला सिर्फ प्रक्रिया की छोटी गलती नहीं, बल्कि पात्रता (Eligibility) के मूल प्रश्न से जुड़ा है। ऐसे में-

  • उच्च डिग्री को अनुभव के विकल्प के रूप में नहीं माना जा सकता।
  • इस आधार पर दी गई कोई भी छूट कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है।
  • नियुक्ति रद्द करने का सिद्धांत भी दोहराया।

चयन प्रक्रिया में गलती तो नियुक्ति रद्द होगी

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि यदि चयन प्रक्रिया में गंभीर खामी हो, तो अदालत सीधे किसी को नियुक्त करने का आदेश नहीं देती।

सही तरीका यह है कि पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द किया जाए, न कि किसी एक उम्मीदवार को फायदा दिया जाए।

क्यों अहम है यह फैसला?

यह निर्णय सभी सरकारी भर्ती एजेंसियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि:

  • भर्ती नियम सर्वोपरि हैं
  • मेरिट या उच्च डिग्री के नाम पर नियमों को बदला नहीं जा सकता
  • पारदर्शिता और समान अवसर (Equal Opportunity) सुनिश्चित करना अनिवार्य है

कोर्ट का यह फैसला सरकारी भर्तियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि नियमों में तय पात्रता शर्तों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने दोहराया कि यह मामला किसी छोटी प्रक्रिया संबंधी गलती का नहीं, बल्कि पात्रता के मूल प्रश्न का है। यदि कोई उम्मीदवार तय तारीख पर आवश्यक योग्यता पूरी नहीं करता, तो उसकी नियुक्ति कानून के तहत टिक नहीं सकती।

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