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आरोपी के निवास स्थान पर जाकर मुकदमा लड़ने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, शिकायत में निवास स्थान का उल्लेख हो तो वहां की अदालत भी सक्षम-राजस्थान हाईकोर्ट

Rajasthan High Court Rejects Husband Plea to Transfer Dowry Harassment Case from Udaipur to Jaipur

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि यदि कथित अपराध अलग-अलग स्थानों पर हुआ हो या लगातार जारी रहने वाला अपराध हो, तो किसी भी संबंधित क्षेत्राधिकार वाली अदालत में उसकी सुनवाई हो सकती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि

जब आरोप कई स्थानों से जुड़े हों और सक्षम न्यायालय में अन्य संबंधित मुकदमे पहले से लंबित हों, तब केवल एक पक्ष की सुविधा के आधार पर आपराधिक मामला स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। उदयपुर न्यायालय को क्षेत्राधिकार प्राप्त है, इसलिए ट्रांसफर याचिका अस्वीकार की जाती है।

इसी सिद्धांत के आधार पर राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की ओर से दायर ट्रांसफर याचिका को खारिज कर दिया है।

पति ने पत्नी की ओर से दर्ज दहेज प्रताड़ना और विश्वासघात के मामले को उदयपुर से जयपुर ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था।

यह आदेश जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता अमित जुल्का की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

क्या था मामला

पति अमित जुल्का ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि उदयपुर महिला थाना में दर्ज मुकदमा, जो वर्तमान में उदयपुर की अदालत में लंबित है, उसे जयपुर महानगर-प्रथम क्षेत्र की सांगानेर अदालत में ट्रांसफर किया जाए।

यह मुकदमा याचिकाकर्ता की पत्नी द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 498A (क्रूरता) और 406 (अमानत में खयानत) के लिए दायर किया गया था।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि वैवाहिक जीवन से जुड़े अधिकांश घटनाक्रम जयपुर में हुए, वह स्वयं जयपुर निवासी है और पत्नी के साथ कथित विवाद भी जयपुर स्थित निवास पर हुआ। इसलिए मामले की सुनवाई जयपुर क्षेत्राधिकार में होनी चाहिए।

पत्नी ने किया विरोध

पत्नी की ओर से याचिका का विरोध करते हुए अधिवक्ता प्रकाश ठकुरिया ने दलील दी कि एफआईआर में उदयपुर में भी प्रताड़ना, दहेज मांग और अन्य घटनाओं का उल्लेख है।

इतना ही नहीं, उदयपुर में ही घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कार्यवाही, पारिवारिक न्यायालय में तलाक याचिका तथा भरण-पोषण से संबंधित आवेदन भी लंबित हैं। ऐसे में मुकदमे को उदयपुर से जयपुर ट्रांसफर करना उचित नहीं होगा।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 197 का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि सामान्यतः अपराध की सुनवाई उसी अदालत में होगी, जिसके स्थानीय क्षेत्राधिकार में अपराध किया गया हो।

लेकिन अदालत ने साथ ही पुराने दंड प्रक्रिया संहिता के सिद्धांत (धारा 178 के समान) का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि यदि यह स्पष्ट न हो कि अपराध किस क्षेत्र में हुआ, या अपराध आंशिक रूप से अलग-अलग क्षेत्रों में हुआ हो, या अपराध निरंतर जारी रहा हो, तो ऐसे किसी भी क्षेत्र की अदालत मामले की सुनवाई कर सकती है।

FIR में उदयपुर की घटनाओं का जिक्र

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पत्नी द्वारा दर्ज एफआईआर में विवाह से पहले उदयपुर में हुए कार्यक्रमों, मांगों तथा बाद में उदयपुर आने पर कथित शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के आरोप भी लगाए गए हैं।

साथ ही यह भी आरोप है कि ट्रेन से उदयपुर आते समय भी धमकी और दुर्व्यवहार किया गया।

हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता कि पूरा अपराध केवल जयपुर में ही हुआ और उदयपुर से उसका कोई संबंध नहीं है। इसलिए उदयपुर अदालत का क्षेत्राधिकार प्रथम दृष्टया बनता है।

ट्रांसफर का कोई ठोस आधार नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि जब उदयपुर में पहले से कई संबंधित वैवाहिक मुकदमे लंबित हैं और एफआईआर में भी उदयपुर से जुड़े आरोप मौजूद हैं, तब केवल पति के आग्रह पर आपराधिक मामला जयपुर भेजना न्यायसंगत नहीं होगा।

हाईकोर्ट ने माना कि ट्रांसफर के लिए कोई ठोस, न्यायोचित और वैधानिक आधार प्रस्तुत नहीं किया गया।

याचिका खारिज

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पति की ट्रांसफर याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही लंबित सभी आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।

क्यों अहम है यह फैसला

यह निर्णय वैवाहिक विवादों और दहेज प्रताड़ना जैसे मामलों में क्षेत्राधिकार के प्रश्न पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अक्सर पति-पत्नी अलग-अलग शहरों में रहते हैं और घटनाएं कई स्थानों पर होने का आरोप लगाया जाता है। ऐसे मामलों में आरोपी पक्ष अक्सर मुकदमा अपने शहर में ट्रांसफर कराने का प्रयास करता है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि शिकायत में कई स्थानों पर हुई घटनाओं का उल्लेख है या कथित अपराध लगातार जारी रहने वाला है, तो पीड़िता द्वारा चुने गए वैध क्षेत्राधिकार वाली अदालत में सुनवाई जारी रह सकती है।

महिला पक्ष को राहत

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से महिलाओं को राहत मिलेगी, क्योंकि उन्हें केवल आरोपी के निवास स्थान पर जाकर मुकदमा लड़ने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा।

यदि शिकायत में उनके वर्तमान निवास या घटनास्थल का उल्लेख है, तो वहीं की अदालत भी सक्षम मानी जा सकती है।

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