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वकीलों का महासंग्राम कल: राजस्थान बार काउंसिल चुनाव में 84 हजार से अधिक अधिवक्ता करेंगे मतदान, 234 में से 57 महिला प्रत्याशी मैदान में

Lawyers’ Mega Battle Tomorrow: Rajasthan Bar Council Polls to See 84,247 Voters

जयपुर/जोधपुर। राजस्थान के विधिक जगत की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

करीब आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद होने जा रहे राजस्थान बार काउंसिल चुनाव के लिए मतदान कल 22 अप्रैल 2026 को होगा।

इस चुनाव को लेकर पूरे प्रदेश के अधिवक्ता समुदाय में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

प्रदेशभर के 84,247 अधिवक्ता मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे और बार काउंसिल के 23 निर्वाचित सदस्यों का चयन करेंगे।

राजस्थान बार काउंसिल चुनाव को इस बार कई कारणों से ऐतिहासिक और विशेष माना जा रहा है।

पहली बार महिला आरक्षण लागू हुआ है, रिकॉर्ड संख्या में प्रत्याशी मैदान में हैं, वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं के बीच दिलचस्प मुकाबला है और पूर्व न्यायिक अधिकारियों की एंट्री ने चुनावी समीकरणों को और रोचक बना दिया है।

चुनाव के लिए जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, भरतपुर, अलवर, सीकर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ समेत प्रदेशभर में मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

जयपुर क्षेत्र में ही 22,000 से अधिक मतदाता हैं, जिससे राजधानी इस चुनाव का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है।

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कल सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान

निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान कराया जाएगा।

मतदान समाप्त होने के बाद मतपेटियों का संकलन किया जाएगा, जो 22 अप्रैल से 28 अप्रैल तक चलेगा।

इसके बाद 29 अप्रैल 2026 को मतगणना होगी और गिनती पूरी होते ही परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं और प्रत्याशियों को देखते हुए निर्वाचन प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

निर्वाचन अधिकारी एवं प्रशासनिक टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

सीटों का गणित: 25 सदस्यीय परिषद, 23 पर चुनाव

राजस्थान बार काउंसिल में कुल 25 सदस्यीय परिषद का गठन होता है। इनमें से 23 सदस्यों का सीधा चुनाव अधिवक्ताओं द्वारा किया जाएगा, जबकि 2 सदस्य बाद में सह-नामित (को-ऑप्टेड) किए जाएंगे।

इस बार सीटों का गणित बेहद अहम है, क्योंकि नियमों के अनुसार—

कम से कम 12 सीटें ऐसे अधिवक्ताओं से भरी जानी जरूरी हैं, जो राज्य रोल पर कम से कम 10 वर्षों से पंजीकृत हों।

इसका उद्देश्य अनुभवी और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

साथ ही 5 सीटें महिला अधिवक्ताओं के लिए सुनिश्चित की गई हैं।

महिला प्रतिनिधित्व के इस प्रावधान ने इस बार चुनाव को पूरी तरह नया आयाम दे दिया है।

हालांकि महिला प्रत्याशियों के लिए अलग मतपत्र जारी नहीं किया जाएगा। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के अनुरूप लागू की गई है।

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क्यों अहम है राजस्थान बार काउंसिल चुनाव?

राजस्थान बार काउंसिल केवल एक चुनावी संस्था नहीं, बल्कि राज्य के अधिवक्ताओं की सर्वोच्च वैधानिक और नियामक संस्था है। यह संस्था कई महत्वपूर्ण कार्य करती है, जिनमें शामिल हैं—

अधिवक्ताओं का पंजीकरण
वकालत का लाइसेंस जारी करना
अनुशासनात्मक कार्रवाई
अधिवक्ता हितों की रक्षा
प्रशिक्षण और विधिक शिक्षा
पेशेवर आचरण की निगरानी
युवा वकीलों के कल्याण कार्यक्रम

ऐसे में यह चुनाव सिर्फ प्रतिनिधियों का चयन नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में अधिवक्ताओं की नीतियों, सुविधाओं, अधिकारों और पेशेवर दिशा तय करने वाला चुनाव माना जा रहा है।

रिकॉर्ड 234 प्रत्याशी मैदान में, मुकाबला बेहद रोचक

इस बार चुनाव में 234 प्रत्याशी मैदान में हैं, जो अपने आप में रिकॉर्ड माने जा रहे हैं। अधिवक्ता समुदाय के भीतर चुनाव को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है।

राजस्थान के हर बड़े जिले से उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, अलवर, अजमेर और अन्य जिलों के दावेदार सक्रिय रूप से प्रचार में जुटे रहे थे।

इतने अधिक उम्मीदवार होने से इस बार वोटों का बिखराव भी बड़ा फैक्टर माना जा रहा है।

चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि इस बार कम अंतर से जीत और हार तय हो सकती है।

234 में से 57 महिला उम्मीदवार

राजस्थान बार काउंसिल चुनाव 2026 में इस बार महिला भागीदारी ने नया इतिहास रचा है।

कुल 234 प्रत्याशियों में से 57 महिला उम्मीदवार मैदान में हैं, जो चुनावी तस्वीर को बदलने वाला बड़ा संकेत माना जा रहा है।

पहली बार 5 सीटों पर महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होने से महिला अधिवक्ताओं का उत्साह बढ़ा है।

बड़ी संख्या में महिला प्रत्याशियों की मौजूदगी न केवल प्रतिस्पर्धा को रोचक बना रही है, बल्कि बार काउंसिल में महिलाओं की मजबूत भागीदारी और नेतृत्व की नई दिशा भी तय कर रही है।

वरिष्ठ बनाम युवा: चुनाव में दिख रहा जनरेशन गैप

इस बार चुनाव का सबसे बड़ा आकर्षण वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं के बीच मुकाबला है।

चुनाव के सबसे चर्चित प्रत्याशियों में वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार जैन शामिल हैं। उनका पंजीयन 11 सितंबर 1972 का है, यानी वे करीब 54 वर्षों के अनुभव के साथ मैदान में हैं। वे इस चुनाव में अनुभव, परंपरा और वरिष्ठता का चेहरा माने जा रहे हैं।

वरिष्ठता की सूची में प्रमुख नाम रणजीत जोशी का भी है।

उनका पंजीयन 27 अक्टूबर 1979 का है। वे करीब 47 वर्षों से विधि पेशे में सक्रिय हैं। वे राजस्थान एडवोकेट एसोसिएशन, जोधपुर के 19 बार अध्यक्ष रह चुके हैं, जिससे उनका संगठनात्मक अनुभव उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है।

युवा चेहरों की एंट्री ने बढ़ाया रोमांच

जहां एक ओर वरिष्ठ अधिवक्ता मैदान में हैं, वहीं दूसरी ओर हाल ही में वकालत शुरू करने वाले युवा चेहरों ने भी चुनावी समीकरण बदल दिए हैं।

माया मेघवाल सबसे युवा प्रत्याशी

बीकानेर की माया मेघवाल इस चुनाव की सबसे युवा प्रत्याशी हैं। उनका पंजीयन 21 दिसंबर 2025 का है, यानी चुनाव की घोषणा से कुछ समय पहले ही उन्होंने वकालत शुरू की थी।

खास बात यह है कि माया मेघवाल ने दो पृष्ठों का विजन डॉक्युमेंट जारी किया है, जिसने उन्हें चर्चा में ला दिया।

पूनम यादव भी चर्चा में -अलवर की पूनम यादव का पंजीयन 4 अक्टूबर 2025 का है। वे भी युवा महिला प्रत्याशियों में प्रमुख चेहरा हैं।

पूर्व जज की एंट्री ने मुकाबला बनाया खास -इस बार चुनाव को और रोचक बनाने वाला पहलू यह भी है कि एक पूर्व न्यायिक अधिकारी भी मैदान में हैं।

लक्ष्मण दत्त किराडू, जो राजस्थान न्यायिक सेवा में जिला जज (डीजे कैडर) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, अब चुनाव मैदान में हैं। पॉक्सो कोर्ट से रिटायरमेंट के बाद वे वकालत कर रहे हैं।

उनकी उम्मीदवारी को लेकर अधिवक्ता समुदाय में विशेष चर्चा है, क्योंकि न्यायिक अनुभव और प्रशासनिक समझ उन्हें अन्य प्रत्याशियों से अलग बनाती है।

महिला आरक्षण से बदलेगा पूरा समीकरण

इस बार 5 सीटों पर महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होने से चुनाव की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।

महिला अधिवक्ताओं की बड़ी संख्या में उम्मीदवारी ने चुनावी मुकाबले को नया आयाम दिया है। लंबे समय से बार काउंसिल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की मांग उठती रही थी।

अब पहली बार महिला अधिवक्ताओं को संस्थागत प्रतिनिधित्व मिलने जा रहा है, जिससे—

महिला वकीलों के मुद्दे प्रमुख होंगे
कार्यस्थल सुरक्षा और सुविधाओं पर चर्चा बढ़ेगी
महिला नेतृत्व को मंच मिलेगा
युवा महिला अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ेगा

मतदान केंद्र से 200 गज तक प्रचार पर रोक

निर्वाचन आचार संहिता के तहत मतदान दिवस पर मतदान केंद्र के 200 गज के दायरे में किसी भी प्रकार का प्रचार प्रतिबंधित रहेगा।

कोई भी प्रत्याशी या समर्थक वोट मांगने, पर्चे बांटने, नारे लगाने, बैनर लगाने, मतदाताओं को प्रभावित करने जैसी गतिविधि नहीं कर सकेगा।

हालांकि सामान्य रूप से उम्मीदवारी की सूचना देना और प्रथम वरीयता वोट का अनुरोध करना अनुचित प्रभाव नहीं माना जाएगा, बशर्ते उसमें प्रचारात्मक सामग्री न हो।

वाहनों से मतदाता लाने-ले जाने पर प्रतिबंध

चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए किसी भी उम्मीदवार या समर्थक द्वारा वाहन किराए पर लेकर मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने-ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

इस नियम का उल्लंघन पाए जाने पर उम्मीदवार के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।

मतदान दिवस पर सख्त नियम

निर्वाचन अधिकारियों ने मतदान दिवस पर विशेष प्रावधान लागू किए हैं। इनमें शामिल हैं—

मतदान शुरू होने से 36 घंटे पहले प्रचार बंद
मतदान केंद्र में केवल अधिकृत मतदाता ही प्रवेश करेंगे
मोबाइल फोन, कैमरा, स्कैनर प्रतिबंधित
लाउडस्पीकर, मेगाफोन, ध्वनि-वर्धक यंत्रों पर रोक
हथियार रखने पर पूर्ण प्रतिबंध
खाद्य पदार्थों की अनुमति नहीं, केवल पेयजल उपलब्ध रहेगा

उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई

आचार संहिता में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई उम्मीदवार—

मसल पावर का उपयोग करता है
वित्तीय अनियमितता करता है
मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करता है
मतदान प्रक्रिया बाधित करता है

तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। गंभीर मामलों में उसका नामांकन रद्द किया जा सकता है या मतदाता सूची से नाम तक हटाया जा सकता है।

क्यों खास है यह चुनाव?

करीब आठ साल बाद हो रहे इस चुनाव को खास बनाने वाले कारण—

लंबे अंतराल के बाद चुनाव
रिकॉर्ड 234 उम्मीदवार
पहली बार महिला आरक्षण
84 हजार से अधिक मतदाता
वरिष्ठ बनाम युवा मुकाबला
पूर्व जज की एंट्री
प्रदेशभर में जबरदस्त चुनावी उत्साह

किसके सिर सजेगा ताज?

अब सभी की निगाहें कल होने वाले मतदान पर टिकी हैं। वरिष्ठों का अनुभव, युवाओं का उत्साह, महिला प्रतिनिधित्व का नया समीकरण और वोटों का बिखराव—इन सबके बीच यह तय करना मुश्किल है कि कौन जीत की सूची में शामिल होगा।

एक बात तय है कि राजस्थान बार काउंसिल चुनाव 2026 केवल चुनाव नहीं, बल्कि वकालत जगत की दिशा तय करने वाला लोकतांत्रिक महासंग्राम है।

कल जब प्रदेशभर के 84 हजार से अधिक अधिवक्ता मतदान केंद्रों पर पहुंचेंगे, तब यह सिर्फ वोट नहीं होगा—यह राजस्थान के विधिक भविष्य के लिए फैसला होगा।

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