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ACB को Rajasthan Highcourt से बड़ा झटका, 1200 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए तत्कालीन रिंगस GRP एसएचओ को मिली राहत

Rajasthan Highcourt

जयपुर, 27 अक्टूबर

भ्रष्टाचार के मामले में सजा पाए तत्कालीन रिंगस जीआरपी थानाधिकारी सावंतसिंह को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

Rajasthan Highcourt की जयपुर पीठ ने भ्रष्टाचार के एक चर्चित मामले में दोषसिद्ध, निलंबित रिंगस जीआरपी थानाधिकारी सावंतसिंह पुत्र आदिसालसिंह को राहत देते हुए सजा स्थगन (Suspension of Sentence) की अपील मंजूर कर ली है।

जस्टिस भुवन गोयल की एकल पीठ ने निलंबित और सेवानिवृत्त हो चुके सावंतसिंह को जिला अदालत द्वारा सुनाई गई तीन साल की सजा पर रोक लगा दी है।

Rajasthan Highcourt ने इस मामले में अपील के अंतिम निपटारे तक सजा स्थगित रखने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही Rajasthan Highcourt ने सावंतसिंह को ₹50,000 के निजी मुचलके और ₹25,000 के दो जमानतदारों के साथ व्यक्तिगत हाजिरी की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है।

यह आदेश आरोपी एसएचओ सावंतसिंह की ओर से दायर सजा स्थगन की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया गया है।

सरकार ने किया विरोध

अभियोजन पक्ष की ओर से राजकीय अधिवक्ता जितेंद्र सिंह राठौड़, एडीशनल जी.ए. ने अपील का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को एसीबी ने रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।

ऐसे मामलों में अदालतों को एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपील को खारिज करना चाहिए।

बचाव पक्ष की दलील

आरोपी एसएचओ की ओर से अधिवक्ता कपिल गुप्ता ने दलील दी कि आरोपी को झूठे आरोपों में फंसाया गया है और ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन किए बिना सजा सुनाई है।

अधिवक्ता ने कहा कि आरोपी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है तथा ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को एक माह के लिए अस्थायी रूप से निलंबित (स्थगित) किया गया है।

उन्होंने कहा कि अपील के फैसले में समय लगेगा, ऐसे में आरोपी की सजा को निलंबित किया जाए।

एसीबी कोर्ट ने सुनाई थी सजा

सीकर की ACB कोर्ट ने ट्रायल के बाद 7 अक्टूबर 2025 को सावंतसिंह को दोषी ठहराते हुए फैसला सुनाया था।

कोर्ट ने आरोपी एसएचओ को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 13(1)(D)(2) और भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी के तहत तीन-तीन साल के कारावास और ₹10,000 से ₹15,000 तक के जुर्माने की सजा सुनाई थी।

शराबी को छोड़ने के लिए रिश्वत

मामला 18 मार्च 2010 का है। परिवादी गजेंद्रसिंह पुत्र पीरदान ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, सीकर के समक्ष रिपोर्ट दी थी कि सुबह करीब 7:35 बजे उसके मोबाइल पर कॉल आया।

कॉल करने वाले ने खुद को जीआरपी नीमकाथाना थाना प्रभारी सावंतसिंह बताया और कहा कि उसके मित्र शेरसिंह को शराब पीने के आरोप में पकड़ा गया है। उसे छुड़ाने के लिए “खर्चा-पानी” लेकर थाने आने को कहा गया।

गजेंद्रसिंह ने रिश्वत देने से इनकार करते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को सूचना दी। जांच के बाद गोपनीय सत्यापन (Verification) कराया गया, जिसमें सावंतसिंह द्वारा रिश्वत की मांग सत्य पाई गई।

इसके बाद ACB ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। आरोपी मनोहरसिंह ने सावंतसिंह के निर्देश पर ₹1200 रिश्वत के रूप में मांगे और स्वीकार किए।

ACB टीम ने मनोहरसिंह को रंगे हाथ गिरफ्तार किया और जांच में सावंतसिंह की भूमिका की पुष्टि होने पर मामला दर्ज किया गया।

ACB कोर्ट, सीकर ने 7 अक्टूबर 2025 को फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई।

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