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बढ़ते साइबर अपराधों पर राजस्थान हाईकोर्ट ने जताई चिंता, कहा – समय पर सही निर्णय लेने की जरूरत, जमानत शर्तो में बदलाव संभव

Justice Sameer Jain

जयपुर, 28 अक्टूबर

प्रदेश में लगातार बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने चिंता जताई है।

साइबर ठगी के मामलों से जुड़े एक दर्जन से अधिक आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा है।

हाईकोर्ट ने साइबर क्राइम से जुड़े अपराधियों और उनको दी जाने वाली जमानत के मामलों में सभी पक्षकारों को लिखित बहस पेश करने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने साइबर क्राइम के आरोपियों की जमानत की शर्तों, युवाओं को इस अपराध से बचाने और साइबर क्राइम के आदतन अपराधियों को लेकर राज्य के डीजीपी और साइबर सेल से भी सुझाव मांगे हैं।

हाईकोर्ट ने जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखते हुए सभी पक्षों को सोमवार, 3 नवंबर तक अपने-अपने लिखित तर्क प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 6 नवंबर को होगी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े DGP, अधिकारी रहे मौजूद

हाईकोर्ट के आदेश पर डीजीपी राजीव शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल हुए।

इसके साथ ही जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल, डीआईजी साइबर सेल विकास शर्मा, एसीपी मनीष अग्रवाल, एसीपी साइबर सोन चंद्र और सीआई श्रवण कुमार अदालत में मौजूद रहे।

हाईकोर्ट ने जताई चिंता

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर चिंता जताई और इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया।

कोर्ट ने संकेत दिया कि जल्द ही साइबर अपराधों को रोकने और जांच को प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

इसके लिए एक बार साइबर अपराध के आरोप में गिरफ्तार हुए आरोपी की जमानत शर्तों में भी बदलाव किए जा सकते हैं।

पुलिस का पक्ष

सुनवाई के दौरान राज्य पुलिस की ओर से बताया गया कि राज्य में फिशिंग साइट्स, ओटीपी ठगी, निवेश में मुनाफे का झांसा, सेक्सटॉर्शन, और फर्जी साइबर अरेस्ट जैसे मामलों में लोगों को ठगा जा रहा है।

पुलिस तकनीकी माध्यमों से ऐसे अपराधों की जांच कर रही है, परंतु कई मुख्य आरोपी विदेशों में बैठकर ठगी के नेटवर्क संचालित कर रहे हैं।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा कि आमजन को बार-बार एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की अपील की जा रही है।

ठगी में उपयोग होने वाले मोबाइल सिम और डिवाइस ब्लॉक करवाने के लिए अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

साथ ही साइबर ठगी पीड़ितों की सहायता के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भरत व्यास और एएजी राजेश चौधरी ने अदालत को साइबर अपराधों पर लगाम कसने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी।

डीजीपी राजीव शर्मा ने कहा कि जिन युवाओं का नाम साइबर अपराधों में सामने आया है, उन्हें दोबारा ऐसे अपराधों में शामिल होने से रोकने के उपाय किए जा रहे हैं।

उन्होंने अदालत से कहा कि जमानत शर्तों पर विस्तृत रिपोर्ट सोमवार तक लिखित रूप में पेश की जाएगी।

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