जोधपुर, 29 अक्टूबर
राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने यौन उत्पीडन के आरोपी आसाराम को बडी राहत देते हुए 6 माह की अंतरिम जमानत दी है.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की खंडपीठ ने आसाराम के स्वास्थ्य कारणो के आधार पर 6 माह की अंतरिम जमानत मंजूर की हैं.
अदालत ने आदेश में कहा कि चिकित्सीय रिपोर्ट के अनुसार आरोपी को लंबी अवधि के उपचार की आवश्यकता है, इसलिए 6 माह की अंतरिम जमानत मंजूर की जाती है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने मंगलवार को आसाराम की मेडिकल ग्राउंड पर दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।
दो महीने बाद फिर जेल से बाहर
आसाराम अप्रैल 2018 से जोधपुर सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है.
करीब 12 साल की सजा अवधि के बाद उसे पहली बार 7 जनवरी 2025 को चिकित्सा कारणों से अंतरिम जमानत दी गई थी.
अब एक बार फिर, लगभग दो महीने बाद उसे 6 महीने की राहत मिल गई है.
कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें
आसाराम की ओर से दिल्ली के सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने पैरवी की, जबकि राजस्थान सरकार की ओर से एएजी दीपक चौधरी और पीड़िता की ओर से एडवोकेट पी.सी. सोलंकी ने पक्ष रखा.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार आसाराम को लम्बे उपचार की आवश्यकता है, इसलिए 6 महीने की जमानत उचित है।
पहले खारिज हुई थी याचिका
इससे पहले 27 अगस्त को जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने आसाराम की अंतरिम जमानत बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी थी.
अहमदाबाद के सरकारी अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा था कि आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है और उसे निरंतर अस्पताल देखभाल की आवश्यकता नहीं है.
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि आसाराम ने पिछले महीनों में कई शहरों में इलाज कराया, लेकिन किसी भी अस्पताल में नियमित फॉलो-अप नहीं करवाया।
किया था आत्मसमर्पण
27 अगस्त के आदेश के बाद 30 अगस्त को आसाराम ने जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण किया था। उस समय बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि एम्स जोधपुर की रिपोर्ट में स्वास्थ्य गिरावट बताई गई थी, परंतु अदालत ने यह दलील अस्वीकार कर दी थी।