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Rajasthan High Court का आदेश : RPSC सचिव कोर्ट आदेशों की पालना करे या 12 नवंबर को कोर्ट में हाजिर रहें

JUSTICE-UMASHANKAR-VYAS

सरकार नियुक्ति देना चाहती लेकिन चयन एजेंसी होते हुए भी RPSC ने कर दी अपील

जयपुर, 1 नवंबर।

प्रदेश में सरकारी नियुक्तियों के मामले में क्या Rajasthan Public Service Commission (RPSC) का दखल और मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है ?

कई मामलों में सरकार अभ्यर्थियों को नियुक्ति देना चाहती है और इसके लिए सरकार RPSC को पत्र भी भेजती है, लेकिन RPSC ऐसे मामलों में सरकार का कहना नहीं मानती

जबकि RPSC केवल चयन एजेंसी के रूप में काम देखती है।

कनिष्ठ विधि अधिकारी भर्ती 2015 से जुड़े एक मामले में याचिका में यही दावा किया गया है.

RPSC के ऐसे रवैये को देखते हुए Rajasthan Highcourt ने RPSC सचिव को हाईकोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।

2015 की भर्ती

मामला 2015 कनिष्ठ विधि अधिकारी भर्ती से जुड़ा है, जिसमें भर्ती में चयनित अंतिम अभ्यर्थी ने जॉइन नहीं किया।

अभ्यर्थी द्वारा जॉइन नहीं करने पर वेटिंग लिस्ट में प्रथम स्थान पर रहे विवेक कुमार ने 6 माह के भीतर ही नियुक्ति के लिए आवेदन कर दिया।

नियमों के अनुसार जब कोई अभ्यर्थी किसी पद के लिए जॉइन करने से इंकार करता है, तो जिस दिन वह जॉइन करने से इंकार करता है, उस तिथि से 6 माह तक वेटिंग लिस्ट में वरीयता प्राप्त उम्मीदवार उस पद के लिए आवेदन कर सकता है।

मामले में याचिकाकर्ता विवेक कुमार द्वारा नियुक्ति के लिए आवेदन करने के बावजूद नियुक्ति नहीं देने पर Rajasthan High Court में याचिका दायर की गई।

2023 में नियुक्ति के आदेश

Rajasthan High Court ने 20 मार्च 2023 को याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता विवेक कुमार को रिक्त हुए पद पर तीन माह में नियुक्ति के आदेश दिए।

इस मामले में नियुक्ति देने वाली संस्था राज्य सरकार होने के बावजूद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ न तो खंडपीठ में और न ही सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।

लेकिन केवल चयन एजेंसी होने के बावजूद RPSC ने याचिकाकर्ता के पक्ष में दिए एकलपीठ के फैसले के खिलाफ अपील दायर कर दी।

सरकार ने नहीं, RPSC ने की अपील

कनिष्ठ विधि अधिकारी भर्ती राजस्थान सरकार के विधि विभाग की ओर से जारी की गई थी। इसके लिए RPSC को चयन एजेंसी के रूप में जिम्मेदारी दी गई थी।

कोर्ट आदेश के बावजूद नियुक्ति नहीं देने पर याचिकाकर्ता विवेक कुमार ने Rajasthan High Court में सिविल अवमानना याचिका दायर की।

Rajasthan High Courtने इस अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए RPSC को फटकार लगाई और राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह याचिकाकर्ता को नियुक्ति पत्र जारी करे।

1 दिन बाद का दिया था आश्वासन

25 सितंबर 2025 को अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा याचिकाकर्ता के पक्ष में RPSC को भेजे गए पत्र पेश किए गए।

सुनवाई के दौरान RPSC के अधिवक्ता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह 26 सितंबर को याचिकाकर्ता का नाम अनुशंसा कर सरकार को भेजेगी।

राजस्थान सरकार ने भी कोर्ट में आश्वासन दिया कि RPSC द्वारा अनुशंसा भेजने के तुरंत बाद ही वह नियुक्ति आदेश जारी कर देगी।

सुप्रीम कोर्ट में अपील

29 अक्टूबर को इस मामले पर Rajasthan High Court में फिर से सुनवाई हुई।

RPSC ने अधिवक्ता मिर्जा फैसल बेग के जरिए अदालत को जानकारी दी कि उसकी तरफ से इस मामले में Supreme Court में अपील दायर की गई है, जिस पर 4 नवंबर को सुनवाई होगी।

RPSC ने अदालत में दलील दी कि ऐसे ही दो मामलों में Supreme Court ने स्टे दिया है, इसलिए इस मामले को 4 नवंबर तक नहीं सुना जाए।

RPSC की ओर से हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों की पालना के लिए दो माह की छूट देने का अनुरोध किया गया।

याचिकाकर्ता का विरोध

RPSC की दलील का विरोध करते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत से कहा कि RPSC इस अदालत की जानबूझकर अवमानना कर रहा है।

उन्होंने कहा कि RPSC ने पिछली सुनवाई में अगले कार्यदिवस पर आदेशों की पालना करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उसका उल्लंघन करना गंभीर अपराध है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

कोर्ट का आदेश

जस्टिस उमाशंकर व्यास की एकलपीठ ने इस मामले में RPSC को किसी प्रकार की राहत देने से इंकार करते हुए कहा कि यदि अगली सुनवाई तक सुप्रीम कोर्ट RPSC को स्टे नहीं देता है, तो RPSC सचिव 12 नवंबर को कोर्ट में पेश रहें।

Rajasthan High Court ने कहा कि 12 नवंबर तक RPSC सचिव कोर्ट के आदेशों की पालना करें या फिर कोर्ट में हाजिर रहें।

इसके साथ ही कोर्ट आदेश की पालना के लिए 2 माह का समय देने का आवेदन भी खारिज कर दिया गया।

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