जयपुर, 4 नवंबर
अदालती आदेश के बावजूद एक मामले में याचिकाकर्ता का पासपोर्ट रिलीज़ नहीं करने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त नाराज़गी जताते हुए मंगलवार शाम 5 बजे तक पासपोर्ट रिलीज़ करने का आदेश दिया है।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने मामले में डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) के जांच अधिकारी को शाम 5 बजे तक कोर्ट के आदेश की पालना करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने सख्त चेतावनी देते हुए अपने आदेश में कहा कि यदि 21 अप्रैल 2025 के आदेश का पालन आज शाम 5 बजे तक नहीं किया जाता है, तो संबंधित राज्य प्रभारी अधिकारी (In-charge of State) को 6 नवंबर 2025 को प्रातः 10:30 बजे निजी रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अदालत के आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नहीं हुआ पासपोर्ट रिलीज़
याचिकाकर्ता मोहम्मद निज़ाम की ओर से दायर याचिका में अनुरोध किया गया कि उन्होंने आवेदन संख्या 1/2025 के माध्यम से DRI जांच अधिकारी के समक्ष अपना पासपोर्ट रिलीज़ करने का आग्रह किया था, जो जांच के दौरान जब्त किया गया था।
याचिका में कहा गया कि प्रत्यर्थियों (respondents) ने पासपोर्ट लौटाने से यह कहकर इंकार कर दिया कि वह डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की हिरासत में है।
जांच अधिकारी होंगे जिम्मेदार
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को किसी एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया जाता है और उसकी संपत्ति जब्त की जाती है, तो संबंधित जांच अधिकारी उस संपत्ति की सुरक्षित अभिरक्षा (safe custody) के लिए उत्तरदायी होता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि जांच अधिकारी, थाना प्रभारी (SHO) या किसी पुलिस स्टेशन के प्रभारी की निगरानी में रखी गई संपत्ति गायब या नष्ट होती है, तो यह आपराधिक न्यासभंग (criminal breach of trust) और दुरुपयोग (misappropriation) की श्रेणी में आएगा, तथा संबंधित अधिकारी आपराधिक अभियोजन (criminal prosecution) की कार्यवाही के लिए उत्तरदायी होंगे।