जयपुर, 6 नवंबर 2025
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में श्रीकरण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. बलराज सिंह के निलंबन मामले में उन्हें बड़ी राहत दी है।
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के उस आदेश के हिस्से को रद्द कर दिया, जिसमें डॉ. सिंह की किसी भी नियुक्ति पर विचार करने पर रोक लगाई गई थी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने यह आदेश डॉ बलराजसिंह और कृषि विश्वविद्यालय की ओर से दायर दो अलग अलग अपील पर सुनवाई करते हुए दिए हैं.
निलंबन और आदेश रद्द
यह मामला तब शुरू हुआ जब 7 अक्टूबर 2025 को डॉ. बलराज सिंह को उनके कार्यकाल समाप्त होने से केवल 7 दिन पहले, यानी 14 अक्टूबर 2025 से पूर्व, निलंबित कर दिया गया था।
डॉ. बलराज सिंह ने इस निलंबन आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 14 अक्टूबर 2025 को अपने आदेश में निलंबन को अवैध और मनमाना बताते हुए राज्यपाल के आदेश को रद्द कर दिया था।
इसके साथ ही एकलपीठ ने डॉ. बलराज सिंह को उसी दिन अपने पद पर पुनः कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दी थी।
लेकिन एकलपीठ ने उसी आदेश में यह भी निर्देश दिया था कि जब तक जांच रिपोर्ट कुलाधिपति (Chancellor) के समक्ष प्रस्तुत नहीं होती और उस पर निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक डॉ. बलराज सिंह की किसी भी नियुक्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।
इस आदेश के इसी भाग को डॉ. बलराज सिंह ने चुनौती देते हुए खंडपीठ में विशेष अपील दायर की।
याचिकाकर्ता की दलील
डॉ. सिंह की ओर से अधिवक्ता सुनील समदारिया, अरिहंत समदारिया, और महेंद्र सिंह गोदारा ने पैरवी की।
अधिवक्ताओं ने अपील में दलील देते हुए तर्क दिया कि एकलपीठ ने याचिका के दायरे से बाहर जाकर ऐसा निर्देश दिया है, जबकि इस विषय पर उन्हें सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया गया था।
जब अदालत ने यह स्वीकार कर लिया कि निलंबन आदेश कानूनी रूप से अस्थिर है और उसे रद्द कर दिया गया, तो भविष्य की किसी भी नियुक्ति पर रोक लगाना न्यायिक सीमा से परे है।
अदालत ने यह आदेश बिना किसी सुनवाई या नोटिस के पारित किया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) का उल्लंघन है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि एकलपीठ का यह आदेश “अतिरिक्त दंडात्मक प्रभाव” डालता है, जबकि याचिकाकर्ता पर कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं चल रही थी।
विश्वविद्यालय की दलील
मामले में श्रीकरण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय ने भी विशेष अपील दायर कर कुलपति डॉ. बलराज सिंह के निलंबन को रद्द करने के एकलपीठ आदेश को चुनौती दी।
विश्वविद्यालय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि डॉ. सिंह का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका था, इसलिए उन्हें पुनः कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति देना निरर्थक था।
एकलपीठ ने विश्वविद्यालय अधिनियम की जिन धाराओं की व्याख्या की, वे अतिरेकपूर्ण और गलत हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले को अब सैद्धांतिक (academic) मानकर भविष्य के मामलों के लिए कानूनी नजीर के रूप में देखा जा सकता है।
हाईकोर्ट का आदेश
खंडपीठ ने डॉ. बलराज सिंह की अपील को स्वीकार करते हुए एकलपीठ के आदेश के उस हिस्से को हटा दिया, जिसमें उनकी नियुक्ति पर रोक लगाई गई थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिए बिना उसकी नियुक्ति या भविष्य के अवसरों पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
खंडपीठ ने यह भी कहा —
“एकलपीठ द्वारा दिया गया आदेश कि डॉ. बलराज सिंह की किसी भी नियुक्ति पर तब तक विचार न किया जाए जब तक जांच पूरी नहीं होती, परिस्थितियों के अनुरूप नहीं था, क्योंकि उनका कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका था।”
खंडपीठ ने यह माना कि इस प्रकार की रोक लगाना ‘too far’ (अत्यधिक) है और इसे न्यायिक आदेश में स्थान नहीं मिलना चाहिए।
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने विश्वविद्यालय की ओर से दायर अपील को निस्तारित करते हुए कहा कि कानून के मुद्दे पर आगे सुनवाई जारी रहेगी।