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“ढाई साल बाद भी हाईकोर्ट आदेशों की अनदेखी” -Rajasthan Highcourt ने प्रमुख विधि सचिव और अधिकरण अध्यक्ष को किया कोर्ट में तलब

Rajasthan High Court Strict — Law Secretary and Tribunal Chairman Summoned Over Non-Compliance

10 नवंबर को कोर्ट में पेश होकर देना होगा स्पष्टीकरण – क्यों न की जाए अवमानना कार्यवाही?

जोधपुर, 7 नवंबर

राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने कोर्ट आदेशों के बाद भी जोधपुर में गठित राजस्थान राज्य सिविल अपीलेट अधिकरण की स्थायी पीठ के वास्तविक क्रियान्वयन में लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है।

कोर्ट के आदेशों के बावजूद जोधपुर बेंच में नियमित सुनवाई की व्यवस्था नहीं होने पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और अधिकरण अध्यक्ष पर गंभीर टिप्पणी करते हुए राज्य के प्रमुख विधि सचिव और अधिकरण अध्यक्ष को कोर्ट में तलब किया है।

जस्टिस पी. एस. भाटी और जस्टिस विपिन गुप्ता की खंडपीठ ने राज्य के प्रमुख विधि सचिव और अधिकरण अध्यक्ष को सोमवार, 10 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही उनके जवाबी स्पष्टीकरण पर निर्भर करेगी।

एक वर्ष में मात्र 64 दिन कार्य

जोधपुर स्थित राजस्थान राज्य सिविल अपीलेट अधिकरण की स्थायी पीठ ने पिछले एक साल में केवल 64 दिन की न्यायिक कार्रवाई की है।
एक वर्ष में न्यूनतम कार्य दिवसों के इस आंकड़े के सामने आने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई थी।

राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इसे बेहद शर्मनाक स्थिति करार दिया था।

हाईकोर्ट ने राजस्थान प्रशासनिक अधिकरण (Rajasthan Administrative Tribunal) की स्थायी पीठ के वास्तविक क्रियान्वयन की पुष्टि करने के लिए मामला आगे के लिए तय किया था।

हाईकोर्ट के आदेश से गठन

एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद पुरोहित और अनिल भंडारी ने बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 19 जुलाई 2022 को जोधपुर में स्थायी पीठ अधिसूचित करने के लिए राज्य सरकार को निर्देश दिए थे।

कोर्ट आदेश की पालना में सरकार ने 4 मई 2023 को अधिसूचना जारी की और जोधपुर पीठ के क्षेत्राधिकार में जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, पाली और बांसवाड़ा संभाग के सभी जिलों को शामिल करते हुए लंबित मामलों और नई अपीलों की सुनवाई जोधपुर में करने का आदेश दिया।

अधिसूचना के बाद भी अमल नहीं

हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने आदेश की पालना में 4 मई 2023 को स्थायी पीठ की अधिसूचना जारी की और स्टाफ की नियुक्ति भी कर दी।

इसके बाद 12 सितंबर 2023 को अधिकरण ने जोधपुर का क्षेत्राधिकार तय करते हुए जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, पाली और बांसवाड़ा संभागों के मामलों की सुनवाई जोधपुर में करने का आदेश दिया।

यहां तक कि 7 अक्टूबर 2023 को गैर-न्यायिक सदस्य की नियुक्ति भी कर दी गई।

इसके बावजूद, स्थायी पीठ का वास्तविक संचालन जोधपुर में शुरू नहीं हुआ।

29 जनवरी 2025 को भी हाईकोर्ट ने सरकार को दोबारा निर्देश दिए थे कि आदेश का पालन किया जाए, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

8 माह में मात्र 39 दिन सुनवाई

अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि स्टाफ की नियुक्ति और संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद स्थायी पीठ वास्तविक रूप से क्रियान्वित नहीं हो पाई।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि गत वर्ष सितंबर से दिसंबर तक केवल 25 दिन और इस वर्ष जनवरी से अगस्त तक मात्र 39 दिन की न्यायिक कार्रवाई जोधपुर पीठ में हुई।

महाधिवक्ता के जवाब पर हाईकोर्ट ने हैरानी जताते हुए मामले में अधिकरण का रुख स्पष्ट करने को कहा था।

हाईकोर्ट की नाराजगी

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिकरण की ओर से पेश की गई पालना रिपोर्ट पर सख्त नाराजगी जताई गई।

कोर्ट ने कहा कि बार-बार आदेश देने के बावजूद जिस तरह अधूरी पालना रिपोर्ट पेश की गई, उससे कोर्ट हैरान है।

हाईकोर्ट ने प्रमुख विधि सचिव और अधिकरण अध्यक्ष को 10 नवंबर को कोर्ट में पेश होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।

कोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि ढाई साल पहले अधिसूचना जारी होने के बावजूद अदालत के आदेशों की अवहेलना करना गंभीर मामला है।

खंडपीठ ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार और अधिकरण अध्यक्ष द्वारा इस तरह के रवैये से प्रतीत होता है कि वे अदालती आदेशों का सम्मान नहीं कर रहे हैं।

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