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Rajasthan Highcourt का बड़ा फैसला: 100 करोड़ की Tax चोरी में लिप्त कोरफेक्स इंडस्ट्रीज पर 5 लाख का जुर्माना, याचिका खारिज

A two-judge bench of the Rajasthan High Court orders relief in a GST matter, holding that improper service of notice under Section 169 of the CGST Act invalidates forced tax recovery and directs unfreezing of bank accounts.

कोर्ट की टिप्पणी : अदालतें ईमानदार टैक्सपेयर की रक्षा के लिए हैं, कानून की मदद से टैक्स चोरी करने वालों के लिए नहीं

जयपुर, 10 नवंबर 2025

Rajasthan Highcourt जयपुर पीठ ने एक अहम आदेश में अलवर जिले के भिवाड़ी रीको इंडस्ट्रियल एरिया स्थित Korfex Industries Pvt. Ltd. की याचिका को खारिज करते हुए उस पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया है।

Acting Chief Justice संजीव प्रकाश शर्मा और Justice संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने टैक्स चोरी के इस मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए जीएसटी विभाग को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम सुधारने के निर्देश भी दिए हैं।

हाईकोर्ट ने कहा —

“ऐसे लोग जो सिस्टम की खामियों का फायदा उठाते हैं, उन्हें कोई राहत नहीं दी जा सकती। विभाग को चाहिए कि भविष्य में इस तरह के मामलों को रोकने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की कमियों को दूर करे।”

अदालत ने कहा कि कंपनी ने “फर्जी इनवॉइस” और “बोगस सप्लायर” के जरिए करोड़ों रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लिया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ।

Rajasthan Highcourt ने GST विभाग के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता कंपनी ने “क्लीन हैंड्स” (साफ मंशा) के साथ कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया।

खंडपीठ ने GST विभाग को आदेश दिया है कि वह धारा 130 के तहत जब्ती और दंडात्मक कार्रवाई आगे बढ़ाए।

अदालतें ईमानदार पक्षकारों के लिए हैं

कंपनी द्वारा टैक्स चोरी के लिए अपनाए गए तरीकों और उसके बाद पेश किए गए जवाब को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की।

अदालत ने कहा —

“जो व्यक्ति कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाते हैं, उन्हें न्यायालय से राहत नहीं दी जा सकती। अनुच्छेद 226 की शक्ति ईमानदार करदाताओं की रक्षा के लिए है, न कि कानून के दुरुपयोग करने वालों के लिए।”

Rajasthan Highcourt ने आगे कहा कि कोरफेक्स इंडस्ट्रीज ने “फर्जी इनवॉइस चेन” बनाकर टैक्स सिस्टम की खामियों का फायदा उठाया और यह कृत्य “आर्थिक तोड़फोड़” (economic sabotage) के समान है।

Highcourt ने यह भी माना कि भले ही विभागीय अधिकारियों ने प्रक्रिया में कुछ तकनीकी त्रुटियाँ की हों, परंतु मामला कर चोरी और सार्वजनिक धन की हानि से जुड़ा है, इसलिए राहत नहीं दी जा सकती।

ये है मामला

कोरफेक्स इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, जो अलवर जिले के भिवाड़ी स्थित रीको इंडस्ट्रियल एरिया में संचालित है, ने जुलाई 2025 में हरियाणा की कंपनी M/s SS Industries से री-मेल्टेड लेड (Remelted Lead) खरीदने का दावा किया था।

कंपनी का कहना था कि उसने सभी जीएसटी नियमों के तहत ई-वे बिल, टैक्स इनवॉइस और GPS लोकेशन डेटा सहित संपूर्ण दस्तावेज अपलोड किए थे।

30 जुलाई 2025 को विभागीय टीम ने कंपनी के परिसर पर छापा मारा और वाहन RJ-32-GE-9020 को जब्त कर लिया।

कंपनी का आरोप था कि यह कार्रवाई “तकनीकी रूप से गलत” थी क्योंकि वाहन पहले ही फैक्ट्री पहुंच चुका था और उसे “इन-ट्रांजिट” नहीं कहा जा सकता था।

कंपनी ने यह कहते हुए याचिका दायर की कि विभाग की कार्रवाई Goods and Services Tax Act, 2017 की धारा 68 और 129 के तहत अवैध थी।

कंपनी की दलीलें

कोरफेक्स इंडस्ट्रीज की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि विभागीय कार्रवाई न केवल तकनीकी रूप से गलत है बल्कि यह कंपनी के वैध व्यापारिक अधिकारों का उल्लंघन है।

कंपनी ने कहा कि जब सामान की डिलीवरी पूरी हो चुकी थी, तब उसे परिवहन के दौरान रोका नहीं जा सकता था।

कंपनी के वकीलों ने यह भी कहा कि विभाग ने जांच के दौरान न तो कोई स्वतंत्र गवाह लिया और न ही किसी “वास्तविक नुकसान” का सबूत पेश किया।

याचिका में कंपनी ने यह मांग की थी कि वाहन जब्ती को रद्द किया जाए और कंपनी के खिलाफ की गई सभी कर संबंधित कार्रवाई निरस्त की जाए।

विभाग के गंभीर आरोप

राज्य कर विभाग और केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि कोरफेक्स इंडस्ट्रीज ने फर्जी बिलिंग के जरिए ₹100 करोड़ से अधिक का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लिया है.

जांच में खुलासा हुआ कि कंपनी ने जिन सप्लायरों से सामान खरीदे जाने का दावा किया — जैसे M/s SS Industries (Haryana) और M/s Galaxy Enterprises (Delhi) — वे “नकली” और “गैर-मौजूद” कंपनियां थीं।

विभाग ने बताया कि कोरफेक्स इंडस्ट्रीज पहले Tsumitomo Airtech Pvt. Ltd. के नाम से रजिस्टर्ड थी और बाद में नाम बदलकर नया रूप दिया गया, लेकिन उसी जीएसटी नंबर से फर्जी लेनदेन जारी रखा गया।

रिपोर्टों से यह भी साबित हुआ कि जिन ट्रकों से कच्चा माल ले जाया गया बताया गया था, वे अन्य राज्यों में किसी और नाम पर पंजीकृत पाए गए।

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