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Rajasthan Highcourt : बिना अनुमति विदेश जाने पर भी ट्रायल कोर्ट नहीं कर सकता Passport रिन्यू से इनकार

No Legal Bar on Passport Renewal Despite Pending Criminal Case

पेंडिंग केस में भी Passport रिन्यू पर रोक का कोई कानूनी आधार नहीं..

जोधपुर, 15 नवंबर

Rajasthan Highcourt ने Passport को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी आपराधिक मुकदमे के लंबित रहने या आरोपी के बिना अनुमति विदेश जाने के आधार पर Passport रिन्यू से इनकार नहीं किया जा सकता।

Rajasthan Highcourt ने कहा कि ऐसे मामलों में ट्रायल कोर्ट जमानत की शर्तों को लेकर उचित आदेश पारित कर सकता है, लेकिन Passport जारी करने या उसके दोबारा जारी करने, रिन्यू करने में बाधा नहीं डाल सकता।

जस्टिस Justice Yogendra Kumar Purohit ने यह आदेश डीडवाना निवासी रहीस खान की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रजाक खान हैदर ने आपराधिक विविध याचिका दायर कर ट्रायल कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

विदेश में रहते समाप्त हुआ पासपोर्ट

याचिका में कहा गया कि वर्ष 2019 में मारपीट के आरोप में याचिकाकर्ता रहीस खान के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हुआ, जिसका ट्रायल एसीजेएम कोर्ट डीडवाना में जारी है।

मामले में सेशन कोर्ट ने याचिकाकर्ता को वर्ष 2019 में ही जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था।

जमानत मिलने के बाद रहीस खान रोजगार के लिए विदेश चला गया। विदेश में रहने के दौरान ही उसके Passport की अवधि समाप्त हो गई।

Passport रिन्यू के लिए रहीस खान की ओर से एक प्रार्थना पत्र ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश किया गया।

बिना अनुमति कैसे गए विदेश

ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता रहीस खान के प्रार्थना पत्र को इस आधार पर खारिज कर दिया कि एसीजेएम कोर्ट में मामला लंबित था और वह कोर्ट की बिना अनुमति या सूचना दिए भारत छोड़कर विदेश चला गया।

इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट ने Passport रिन्यू करने के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया कि मामले के दर्ज होने के बावजूद उसने बिना अनुमति भारत छोड़ दिया।

देश लौटने में बाधा बना आदेश

Rajasthan Highcourt में दायर याचिका में अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता भारत लौटकर अदालत में स्वयं उपस्थित होना चाहता है, लेकिन Passport रिन्यू से इनकार किए जाने के कारण उसकी वापसी संभव नहीं हो पा रही।

अधिवक्ता ने कहा कि अदालत को आरोपी के लौटने में सहायता करनी चाहिए, इसके बजाय ट्रायल कोर्ट द्वारा देश लौटने में बाधा उत्पन्न करना न केवल अजीब और अतार्किक है, बल्कि उसके मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है।

हाईकोर्ट का आदेश

Rajasthan Highcourt ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश की गई दलीलों से सहमत होते हुए हैरानी जताई कि बिना Passport के याचिकाकर्ता कैसे कोर्ट में पेश होगा, यदि वह भारत ही नहीं आ सकेगा।

जस्टिस योगेन्द्र पुरोहित की एकलपीठ ने कहा कि यदि आरोपी बिना अनुमति विदेश गया है, तो जमानत शर्तों के संबंध में आदेश पारित किए जा सकते हैं.

लेकिन जिस Passport पर वह विदेश गया, उसके नवीनीकरण के बिना वह ट्रायल कोर्ट में उपस्थित ही नहीं हो सकता। ऐसे में लंबित कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाएगी।

कोर्ट ने कहा कि केवल “बिना अनुमति विदेश जाने” के आधार पर Passport रिन्यू करने की अनुमति से इनकार करना विधिसम्मत नहीं है।

Rajasthan Highcourt ने कहा कि Passport रिन्यू के बाद आरोपी के भारत लौटने पर ट्रायल कोर्ट नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।

अंत में, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए रहीस खान के Passport को 10 वर्ष के लिए रिन्यू करने की अनुमति दी।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि लंबित आपराधिक मुकदमे के बावजूद Passport रिन्यू पर रोक का कोई कानूनी आधार नहीं है.

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