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जयपुर की POCSO अदालत का बड़ा फैसला: 9 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के प्रयास के आरोपी को 7 साल तक की सजा,

Jodhpur POCSO Court Awards Life Imprisonment Till Natural Death in Brutal Rape Case of 5-Year-Old

पीड़िता को 2 लाख मुआवजा देने के आदेश

जयपुर, 14 नवंबर 2025

जयपुर जिले की विशिष्ट POCSO अदालत ने नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के प्रयास, अपहरण तथा अश्लील सामग्री दिखाने के गंभीर मामले में नरेना निवासी आरोपी मुकेश कुमार को 7 साल की कठोर सजा सुनाई है।

विशिष्ट POCSO अदालत के जज कैलाशचंद अटवासिया ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसे अपराध पीड़िता के साथ-साथ पूरे समाज के विरुद्ध होते हैं और इन पर किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।

कोर्ट ने कहा कि आरोपी के कृत्य से पीड़िता को मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक और बौद्धिक स्तर पर गहरा आघात पहुँचा, जिसके प्रभाव उसके पूरे जीवन पर पड़ेंगे।

जज कैलाशचंद अटवासिया ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि पोक्सो एक्ट का मुख्य उद्देश्य बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण देना और उनकी गरिमा की रक्षा करना है। किसी भी अवांछित यौन व्यवहार को कानून यौन उत्पीड़न की श्रेणी में रखता है, चाहे वह प्रत्यक्ष हो, अप्रत्यक्ष हो या किसी भी रूप में—मौखिक, शारीरिक या अशाब्दिक।

फैसले में कहा कि वर्तमान समय में नाबालिगों के साथ इस तरह के अपराधों में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिसे रोकने के लिए न्यायालयों का दायित्व है कि ऐसे अभियुक्तों को कठोर दंड दिया जाए, ताकि समाज में एक सख्त संदेश जा सके।

अदालत ने कहा—“ऐसे अपराध न केवल पीड़िता की गरिमा पर हमला करते हैं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था और जनविश्वास को भी गहरा आघात पहुँचाते हैं। पीड़ित बालक के मन पर पड़े प्रभाव जीवनभर मानसिक पीड़ा का कारण बनते हैं।”

इन धाराओं में हुई सजा

अदालत ने कहा कि अपराध की प्रकृति अत्यंत गंभीर है और नाबालिग की सुरक्षा, सम्मान और उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालने वाली है। इसी आधार पर अदालत ने—

धारा 363 भा.दं.सं. के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास और ₹25,000 का जुर्माना

धारा 9(एम)/10 पोक्सो एक्ट के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास और ₹50,000 का जुर्माना

धारा 11/12 पोक्सो एक्ट के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास और ₹25,000 का जुर्माना

धारा 67B आईटी एक्ट के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास और ₹25,000 का जुर्माना

कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस मामले में सभी सजाएँ एक साथ चलेंगी, जिसके चलते आरोपी को अधिकतम 7 वर्ष की जेल होगी।

पीड़िता को 2 लाख रुपये मुआवजा

अदालत ने कहा कि नाबालिग पीड़िता को हुए मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक आघात की भरपाई के लिए उसे आर्थिक सहायता मिलनी आवश्यक है।

इसलिए राजस्थान पीड़ित प्रतिकर योजना 2011 के तहत पीड़िता को ₹2 लाख मुआवजा दिलवाने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पीड़िता को पहले कोई अंतरिम प्रतिकर मिला होगा, तो उसे अंतिम राशि में समायोजित किया जाएगा।

ये है मामला

6 नवंबर 2022 को अपने नाना के घर पर रह रही 9 वर्षीय पीड़िता दवा लेने के लिए मेडिकल स्टोर गई थी।

इसी दौरान आरोपी मुकेश उसे जबरन अपनी बाइक पर बैठाकर अस्पताल ले गया और वहाँ उसके साथ अनुचित हरकत करने का प्रयास किया।

मामले में दूसरे दिन पीड़िता के नाना की ओर से मामला दर्ज कराया गया। पुलिस ने 42 वर्षीय आरोपी मुकेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

अभियोजन पक्ष ने इस मामले में कुल 15 गवाह पेश किए और 20 दस्तावेज कोर्ट के समक्ष रखे।

9 वर्षीय बच्ची ने दिखाई थी बहादुरी, आरोपी से छुड़ाया था खुद को

इस मामले में नाबालिग बच्ची ने अपनी सूझबूझ और साहस से खुद को एक गंभीर स्थिति से बचा लिया।

दवा लेने के लिए स्थानीय मेडिकल स्टोर पर गई पीड़िता को आरोपी मुकेश ने बहला-फुसलाकर जबरन अपनी बाइक पर बैठाया और अस्पताल ले गया।

अस्पताल परिसर में आरोपी ने बच्ची को आपत्तिजनक सामग्री दिखाते हुए उसके साथ गलत हरकत करने की कोशिश की।

लेकिन बच्ची ने साहस दिखाते हुए आरोपी का हाथ काटकर खुद को छुड़ाया और तुरंत घर की ओर दौड़ पड़ी।

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