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Rajasthan Highcourt का बड़ा फैसला : 1 फरवरी 2026 से संपूर्ण राजस्थान में डिजिटल पोस्टमार्टम और सभी मेडिको-लीगल रिपोर्ट जारी करने के आदेश

Rajasthan High Court Mandates Digital Medical Reports via MedLEaPR from February 1, 2026 ✅ Short Headline

कोर्ट ने कहा कि हाथ से​ लिखी हुई अपठनीय और अव्यवस्थित रिपोर्टें न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करती हैं और न्याय में देरी का कारण बनती हैं

जोधपुर, 20 नवंबर

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए 1 फरवरी 2026 से संपूर्ण राजस्थान में सभी मेडिकल रिपोर्टों को अनिवार्य रूप से MedLEaPR (Medico Legal Examination and Post-Mortem Reporting Software) के जरिए ही डिजिटल रूप से तैयार करने का आदेश दिया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में अब तक चली आ रही पोस्टमार्टम रिपोर्ट (PMR), मेडिको–लीगल रिपोर्ट (MLR), आयु निर्धारण, सेक्स निर्धारण और अन्य सभी मेडिको-लीगल दस्तावेजों को हाथ से लिखने की व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए रोक लगा दी है।

जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने श्रीगंगानगर जिले के बहुचर्चित भाई द्वारा भाई की हत्या मामले में दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह व्यवस्था दी है।

हाईकोर्ट में भाई की हत्या के आरोपी की जमानत याचिका सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि मृतक प्रदीप कुमार की पोस्टमार्टम रिपोर्ट डॉक्टरों द्वारा हाथ से लिखी गई थी और इतनी खराब थी कि पढ़ना लगभग असंभव था।

मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट तीन पन्नों की थी लेकिन इतनी खराब लिखावट में कि कोर्ट कई बार प्रयास करने के बाद भी पूरी तरह पढ़ नहीं पाया।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह की अस्पष्ट, अपठनीय और अव्यवस्थित रिपोर्टें न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करती हैं और न्याय में देरी का कारण बनती हैं।

अधिकारियों को किया तलब

श्रीगंगानगर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर द्वारा हाथ से लिखी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर हाईकोर्ट ने 6, 9 और 17 अक्टूबर 2025 को मेडिकल एवं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया था।

कोर्ट में पेश हुए अधिकारियों ने जानकारी दी कि संपूर्ण प्रदेश में अब भी व्यवस्था हाथ से लिखी पोस्टमार्टम रिपोर्टों और मेडिकल रिपोर्टों पर निर्भर है, जबकि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ 10 से 12 वर्ष पहले ही पूरी तरह डिजिटल सिस्टम अपना चुके हैं।

हाईकोर्ट का सख्त आदेश, कई निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य की प्रमुख चिकित्सा सचिव गायत्री राठौड़, अतिरिक्त महाधिवक्ता, सरकारी अधिवक्ता दीपक चौधरी, वरिष्ठ अधिवक्ता विनीत जैन सहित अन्य अधिवक्ताओं के सुझाव और जवाब सुनने के बाद अहम आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि राजस्थान में 1 फरवरी 2026 से सभी PMR, MLR आदि MedLEaPR से अनिवार्य रूप से डिजिटल तरीके से तैयार होंगे।

राजस्थान हाईकोर्ट का यह आदेश राजस्थान के संपूर्ण सरकारी एवं निजी अस्पतालों के सभी डॉक्टरों के लिए बाध्यकारी होगा।
1 फरवरी 2026 के बाद हाथ से लिखी रिपोर्ट स्वीकार नहीं होगी।

IO, SHO, SP एवं पुलिस कमिश्नर जिम्मेदार

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार—

— राज्य के प्रमुख सचिव, चिकित्सा 15 दिन में एक अधिसूचना जारी करेंगे, जिसमें 1 फरवरी 2026 से राज्य में सभी मेडिकल रिपोर्टों को अनिवार्य रूप से MedLEaPR सॉफ़्टवेयर के माध्यम से तैयार करने का निर्देश होगा।

— एसीएस गृह राज्य के सभी पुलिस अधिकारियों और जांच अधिकारियों को निर्देश देंगे कि सभी मामलों में CCTNS के माध्यम से ही MLR/PMR के लिए अनुरोध भेजना अनिवार्य होगा।

— 1 फरवरी 2026 के बाद राज्य में हाथ से लिखी मेडिकल रिपोर्ट मान्य नहीं होगी।

— उल्लंघन की स्थिति में संबंधित IO, SHO, SP एवं पुलिस कमिश्नर व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।

— राज्य में जब तक डिजिटल व्यवस्था पूर्ण रूप से कार्यशील नहीं हो जाती, 8 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक सभी रिपोर्टें बड़े अक्षरों में, साफ-सुथरी हस्तलिपि में तथा टाइप्ड कॉपी सहित तैयार की जाएंगी।

— PMR/MLR के नए प्रारूप 10 दिनों के भीतर जारी किए जाएं जिनमें पर्याप्त स्थान व कॉलम उपलब्ध हों।

— कोर्ट के आदेश और सरकार के निर्देशों की जानकारी राज्य के सभी डॉक्टरों, पुलिस अधिकारियों, सरकारी एवं निजी संस्थानों तक अंग्रेज़ी व हिंदी समाचार-पत्रों में प्रकाशन द्वारा पहुंचाई जाएगी।

— राज्य के चिकित्सा संस्थानों से जारी सभी रिपोर्टों में QR कोड अनिवार्य होगा।

— सभी मेडिकल लैब रिपोर्टों में पैथोलॉजिस्ट की स्पष्ट राय और शारीरिक हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे।

5 दिन में जमा कराने होंगे नमूने

— पुलिस/एजेंसियों द्वारा लिए गए नमूने अधिकतम पाँच दिन के भीतर FSL में जमा किए जाएंगे।

— नमूनों के भेजने/प्राप्त करने की सूचना स्वतः-जनित ईमेल/SMS से दी जाएगी।

— केस के IO/अधिकृत व्यक्ति को सॉफ़्टवेयर में रिपोर्टों व नमूनों की स्थिति देखने की सुविधा उपलब्ध होगी।

— MedLEaPR सॉफ़्टवेयर में संग्रहीत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित होगी; किसी भी प्रकार का अनधिकृत उपयोग/प्रकटीकरण दंडनीय अपराध होगा।

— MedLEaPR के लिए आवश्यक उपकरण—कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, UPS, 24/7 इंटरनेट—सभी चिकित्सा संस्थानों में 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराए जाएंगे।

— राज्य के सभी डॉक्टर/मेडिकल ज्यूरिस्ट को 20 दिनों में MedLEaPR पर पंजीकरण कराना होगा।

आदेश नहीं माने तो अवमानना कार्यवाही

इस मामले में हाईकोर्ट के आदेशों की 45 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसमें जारी परिपत्र, पंजीकृत डॉक्टरों की संख्या, प्रदान अवसंरचना, नए प्रारूप आदि का संपूर्ण विवरण देना होगा।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट आदेशों की पालना नहीं करना कोर्ट की अवमानना होगा और निर्देशों का उल्लंघन अवमानना माना जाएगा।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालती अवमानना की कार्यवाही स्वतः (Suo Motu) शुरू होगी।

हरियाणा 2011 से कर रहा डिजिटल सिस्टम

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 2011 में NIC हरियाणा ने यह सॉफ्टवेयर सभी राज्यों को उपलब्ध कराया था, फिर भी राजस्थान ने 13 वर्षों में भी इसे पूर्णतया लागू नहीं किया.

केवल कुछ मामलों में ही सॉफ्टवेयर का उपयोग होता है। बाकी सभी रिपोर्टें अभी भी हाथ से लिखी जाती हैं।

कोर्ट ने लिया था संज्ञान

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने मामले में संज्ञान लेते हुए 6 अक्टूबर को पहली बार इस मामले में जवाब मांगा था.

जिसके बाद राज्य सरकार ने बताया कि जनवरी 2025 से सॉफ्टवेयर का उपयोग शुरू किया गया है, परंतु डॉक्टर और IOs अभी पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित नहीं हैं.

एकलपीठ ने पाया कि सॉफ्टवेयर का उपयोग करना या न करना पुलिस/IO की इच्छा पर निर्भर है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।

आरोपी भाई को मिली जमानत

राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में अपने चचेरे भाई की हत्या के आरोपी, श्रीगंगानगर के दौलतपुरा निवासी मुकेश कुमार को जमानत दी।

हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि मामले में अहम गवाह—मृतक की मां और चचेरे भाई—भी अभियोजन पक्ष की कहानी से सहमत नहीं हैं।

इसके साथ ही हथियार की बरामदगी के बाद भी पुलिस ने उसे एक महीने तक FSL नहीं भेजा, जिससे जांच पर संदेह पैदा हुआ.

2011 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा यह मुद्दा पहली बार उठाया गया था और NIC हरियाणा ने “Medico Legal Examination and Post-mortem Reports System (MedLEaPR)” तैयार किया.

यह सॉफ्टवेयर भारत में पहली बार तैयार किया गया और 2012 से पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में इसे अनिवार्य कर दिया गया।

सॉफ्टवेयर की मुख्य विशेषताएँ, प्रक्रिया, गोपनीयता सुरक्षा, एक्सेस कंट्रोल, डॉक्टरों के लिए चरणबद्ध डेटा एंट्री आदि पर विस्तृत विवरण भी न्यायालय को प्रस्तुत किया गया

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