जयपुर। वर्ष 2025 राजस्थान की न्यायपालिका के लिए केवल एक कैलेंडर वर्ष नहीं रहा, बल्कि यह न्यायिक सक्रियता, निर्णायक हस्तक्षेप और ऐतिहासिक फैसलों का ऐसा दौर साबित हुआ जिसने राज्य की सियासत, प्रशासन और समाज—तीनों को गहराई से प्रभावित किया।
अदालतों ने इस साल न सिर्फ कानून की व्याख्या की, बल्कि कई मौकों पर सत्ता, व्यवस्था और प्रभावशाली चेहरों को यह संदेश भी दिया कि संविधान के सामने सभी बराबर हैं।
नियुक्तियों से जुड़े बड़े आदेशों से लेकर फर्जीवाड़े, भ्रष्टाचार, चुनावी विवाद, नागरिक अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही तक—राजस्थान की अदालतें हर अहम मोर्चे पर निर्णायक भूमिका में रहीं।
कई फैसले ऐसे रहे जिन्होंने राज्य से निकलकर राष्ट्रीय बहस को दिशा दी, तो कुछ घटनाओं ने न्यायपालिका के भीतर की कार्यप्रणाली और चुनौतियों को भी सामने रखा।
यह विशेष प्रस्तुति वर्ष 2025 के 25 उन बड़े फैसलों, घटनाओं और निर्णायक पलों को समेटे हुए है, जिन्होंने राजस्थान की न्यायपालिका की दिशा तय की और न्याय के इतिहास में एक मजबूत अध्याय जोड़ा।
1 राजस्थान न्यायपालिका की रैंकिंग में भारी उछाल :—
अप्रैल 2025 में जारी कि गयी इंडिया जस्टिस रिपोर्ट में राजस्थान की न्यायपालिका की रैंकिंग में भारी उछाल सामने आया. राजस्थान ने 17 पायदान से सीधे 6 नंबर पर अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा.
इसका बड़ा कारण हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के पदों की रिक्तियों में कमी और निचली अदालतों में मुकदमा निस्तारण में तेजी है. साल 2022 में जहां हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के 48 फीसदी पद खाली चल रहे थे, वहीं साल 2025 में यह एक समय तक 14 फीसदी कम थे. वहीं, केस निपटारे की दर में भी सुधार आया है. जिला अदालतों में साल 2016-17 के बाद पहली बार निस्तारण दर 100 फीसदी को पार कर गई है.
1 अरावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला और विवाद
20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली हिल्स और अरावली रेंज की परिभाषा को लेकर दशकों से चली आ रही अनिश्चितता को समाप्त करते हुए परिभाषा तय की। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली भू-आकृति को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा।
इस मानक से अरावली की 90% से ज्यादा पहाड़ियां संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएंगी। इस फैसले के बाद अरावली को बचाने की आवाजें तेज हो गईं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले से ही नाराज लोगों को तब और ज्यादा आक्रोशित कर दिया गया, जब राजस्थान में अरावली पर्वत श्रृंखला में खनन को मंजूरी मिलने की खबरें सामने आईं।
देशभर में मीडिया और सोशल मीडिया पर इस फैसले का चौतरफा विरोध होने लगा। इसी बीच 24 दिसंबर को हरियाणा वन विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी आर.पी. बलवान ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारी के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए राजस्थान, हरियाणा, केंद्र सरकार और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी किए हैं।
2 प्रदूषण को लेकर हाई-लेवल कमेटी का गठन
पश्चिमी राजस्थान की जोजरी, बांदी और लूणी नदियों में बढ़ते प्रदूषण और इससे प्रभावित लगभग 20 लाख लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और आजीविका पर गंभीर संकट को देखते हुए Supreme Court ने 21 नवंबर 2025 को बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
Supreme Court ने राजस्थान हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी के गठन का आदेश देते हुए प्रत्येक 8 सप्ताह में रिपोर्ट देने के आदेश दिए.
यह कमेटी जोधपुर, पाली और बालोतरा क्षेत्र में नदी पुनर्जीवन, प्रदूषण नियंत्रण और निगरानी की संपूर्ण प्रक्रिया की देखरेख करेगी। कमेटी अपनी पहली रिपोर्ट 27 फरवरी 2026 को कोर्ट में पेश करेगी, साथ ही इसी दिन सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा।
3 सड़क हादसों पर हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट का संज्ञान
राजस्थान में हुए सड़क हादसों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रसंज्ञान लिया.
10 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के फलौदी और तेलंगाना में हुई सड़क दुर्घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लेते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने एनएचएआइ और सड़क परिवहन मंत्रालय से हाईवे के किनारे अनधिकृत क्षेत्र में स्थित ढाबों और सड़कों की हालत पर दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी.
इससे पूर्व 4 नवंबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने एडवोकेट राजेन्द्र शर्मा के पत्र पर प्रसंज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया.
इससे पूर्व राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर में जस्टिस पी एस भाटी और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने राजस्थान में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 100 मौतों को उजागर करने वाली मीडिया रिपोर्ट पर दुख जताते हुए प्रसंज्ञान लिया था.
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में सड़क हादसों में हो रही लगातार मौतों पर गंभीर चिंता जताई है और स्वतः संज्ञान स्वप्रेरणा लेकर जनहित याचिका दर्ज की है। जस्टिस डॉ पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस अनुरूप सिंघी ने कहा कि राजस्थान की सड़कों पर हुई दुर्घटनाओं में लगभग 100 लोगों की जान चली गई है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
4 जस्टिस अनुप कुमार ढंड सड़क हादसे में घायल
19 दिसंबर 2025 को अंतिम कार्यदिवस के बाद जोधपुर से जयुपर आ रहे राजस्थान हाईकोर्ट के वरि/ठ जज जस्टिस अनुप कुमार ढंड एक सड़क हादसे में घायल हो गए.
अजमेर जिले के सराधना गांव की पुलिया के पास जस्टिस अनुप कुमार ढंड की गाड़ी अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई.हादसे के ठीक बाद जज के ड्राइवर और पीएसओ ने फौरन अधिकारियों को सूचना दी जिससे मौके पर तेजी से मदद पहुंच सकी.
अजमेर के जिला कलेक्टर, एसपी, डीजे सहित कई अन्य अधिकारी घटनास्थल पर दौड़े चले आए. बाद में जस्टिस अनुप कुमार ढंड ने अपने स्वस्थ होने की जानकारी साझा की.
5 44 आरजेएस का चयन, 28 महिला अभ्यर्थी
19 दिसंबर को ही राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा 2025 (RJS-2025) का अंतिम परिणाम घोषित किया गया. इस वर्ष का परिणाम कई मायनों में ऐतिहासिक रहा, क्योंकि चयन सूची में महिलाओं का अभूतपूर्व वर्चस्व देखने को मिला है।
कुल 44 पदों पर घोषित अंतिम परिणाम में 28 महिलाएं न्यायिक अधिकारी के रूप में चयनित हुई हैं। खास बात यह है कि मेरिट सूची के टॉप-5 स्थानों पर केवल महिलाएं हैं, जबकि टॉप-10 में 9 महिलाएं और मात्र 1 पुरुष अभ्यर्थी शामिल है।
6 सुप्रीम कोर्ट के 20 जज रणथंभोर में
देश के न्यायिक इतिहास में सुप्रीम कोर्ट के 20 जजों की पारिवारिक यात्रा का राजस्थान गवाह बना. 12 सितंबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई सहित सुप्रीम कोर्ट के 20 जजों ने अपने परिवारों के साथ रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान का दो दिवसीय निजी दौरा किया.
यह यात्रा एक यादगार न्यायिक पर्यटन यात्रा थी जिसमें जजों ने आराम किया, बाघों की सफारी का आनंद लिया और वन्यजीव संरक्षण पर चर्चा की, जिसमें पुलिस सुरक्षा और व्यक्तिगत खर्चों के साथ एक यादगार रोड ट्रिप शामिल थी।
7 जैसलमेर की ऐतिहासिफ कॉन्फ्रेस, 120 से अधिक जज आए
राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, राजस्थान हाई कोर्ट और राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में 13 और 14 दिसंबर को दो दिवसीय रा/ट्रीय न्यायिक कॉन्फ़्रेंस का आयोजन जैसलमेर में किया गया.
इस कॉन्फ़्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ 20 जजों ने भी शिरकत की.
इस कॉन्फ़्रेंस में राजस्थान हाईकोर्ट के साथ ही गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र न्यायपालिका के 100 से अधिक हाईकोर्ट जजों के साथ सुप्रीम कोर्ट जज शामिल रहें.
कॉन्फ़्रेंस का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण, डिजिटल खतरों और उभरती तकनीकों को न्याय व्यवस्था में उपयोग करने के नए आयामों पर चर्चा करना था। कॉन्फ़्रेंस में मुख्य रूप से सेंसरशिप, साइबर क्राइम, डिजिटल मीडिया और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई.
8 राजस्थान से जुड़े महत्वपूर्ण 100 फैसले
9 राष्ट्रीय लोक अदालत में 2.07 करोंड़ मुकदमों का निस्तारण
10 जजों की नियुक्तियां,ट्रांसफर और रिटायरमेंट
11 राजस्थान हाईकोर्ट के 46 वें रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा
2025 के आरएएस परीक्षा में लिखित परीक्षा के एक सवाल ने सैकड़ों अभ्यर्थियों के माथे पर पसीने ला दिए. जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल कौन है और उनकी नियुक्ति कब हुई. इस सवाल का जवाब अधिकांश अभ्यर्थी नहीं दे पाए.
राजस्थान हाईकोर्ट के वर्तमान रजिस्ट्रार जनरल जिला एवं सत्र न्यायाधीश कैडर के न्यायिक अधिकारी चंचल मिश्रा है और ये कोई महिला नहीं बल्कि एक पुरुष अधिकारी हैं. ये स्पष्टीकरण इसलिए कर रहे हैं क्योंकि कई कोचिंग संस्थान और कोचिंग शिक्षकों द्वारा रजिस्ट्रार जनरल के नाम को लेकर गलतफहमी पैदा करते हुए उन्हे महिला अधिकारी के रूप में प्रचारित किया गया है. चंचल मिश्रा राजस्थान हाईकोर्ट के 45 वें नहीं बल्कि 46 वें रजिस्ट्रार जनरल हैं.