नई दिल्ली। अरावली पहाड़ियों की परिभाषा में हाल ही में किए गए बदलाव से उत्पन्न पर्यावरणीय चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए Supreme Court ने स्वतः संज्ञान लिया है।
Supreme Court ने इस मुद्दे पर स्वप्रेणा प्रसंज्ञान लेते हुए 29 दिसंबर सोमवार को सुनवाई तय की हैं.

गौरतलब हैं कि 20 नवंबर को दिए गए फैसले के बाद से ही देशभर में खासतौर से दिल्ली, हरियाण और राजस्थान में आम जनता विरोध कर रही हैं.
20 नवंबर 2025 को Supreme Court ने अरावली हिल्स और अरावली रेंज की परिभाषा को लेकर दशकों से चली आ रही अनिश्चितता को समाप्त करते हुए परिभाषा तय की।
Supreme Court के फैसले के अनुसार जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली भू-आकृति को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा।
इस मानक से अरावली की 90% से ज्यादा पहाड़ियां संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएंगी। इस फैसले के बाद अरावली को बचाने की आवाजें तेज हो गईं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले से ही नाराज लोगों को तब और ज्यादा आक्रोशित कर दिया गया जब इन क्षेत्रों में खनन के अनुमति की खबरे बाहर आयी.
फैसले के प्रति बढती आलोचना और विशेषज्ञों की चिंता के बाद से ही फैसले पर पुर्नविचार के लिए मांग कि जा रही थी.
इस मामले पर Supreme Court की वेकेशन बेंच सोमवार, 29 दिसंबर को सुनवाई करेगी। बेंच में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस ए.जी. मसीह शामिल होंगे।
सुप्रीम कोर्ट की यह पहल हाल के दिनों में सामने आए सार्वजनिक विरोध, पर्यावरणविदों की चेतावनियों और सिविल सोसाइटी संगठनों की आपत्तियों के बाद की गई है।