कैडर आवंटन पर Supreme Court का ऐतिहासिक फैसला, कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश पलटा
नई दिल्ली। सरकारी भर्तियों में आरक्षण को लेकर Supreme Court ने एक ओर बड़ा फैसला सुनाया है.
जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने आरक्षण से जुड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया हैं कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया के किसी भी चरण में—चाहे वह प्रारंभिक परीक्षा ही क्यों न हो—किसी प्रकार की छूट या रियायत लेता है, तो उसे सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी में चयन या कैडर आवंटन का लाभ नहीं दिया जा सकता.
केन्द्र सरकार की ओर से दायर पील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट और केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकार के फैसलो को रद्द कर दिया हैं.
ये हैं मामला
मामला भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा 2013 से जुड़ा था। जिसमें याचिकाकर्ता जी. किरण, अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से संबंधित थे।
याचिकाकर्ता ने प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित कम कट-ऑफ का लाभ लेते हुए परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
हालांकि, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया और अंतिम मेरिट सूची में एक सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी से ऊपर स्थान प्राप्त किया।
कैडर आवंटन के समय कर्नाटक राज्य में केवल एक “जनरल इनसाइडर” पद उपलब्ध था।
केंद्र सरकार ने यह पद सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी को आवंटित किया, जबकि जी. किरण को तमिलनाडु कैडर दिया गया।
इस निर्णय को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने CAT और फिर कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया, जहां याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला दिया गया.
केन्द्र सरकार ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
Supreme Court ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि—
प्रारंभिक परीक्षा भी चयन प्रक्रिया का अनिवार्य और अभिन्न चरण है। भले ही उसके अंक अंतिम मेरिट में शामिल न हों, लेकिन उसमें ली गई छूट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
Supreme Court ने कहा कि भारतीय वन सेवा परीक्षा नियम, 2013 के अनुसार यदि कोई अभ्यर्थी किसी भी स्तर पर “Relaxed Standard” का लाभ लेता है, तो वह यह दावा नहीं कर सकता कि उसका चयन “जनरल स्टैंडर्ड” पर हुआ है।
प्रारंभिक परीक्षा स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं
Supreme Court ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने “जनरल स्टैंडर्ड” शब्द की गलत व्याख्या की।
हाईकोर्ट का यह मानना कि केवल मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी को सामान्य श्रेणी में माना जा सकता है, नियमों और कैडर आवंटन नीति दोनों के विपरीत है।
Supreme Court ने यह स्पष्ट किया कि प्रारंभिक परीक्षा केवल स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं, बल्कि चयन प्रक्रिया की प्रवेश द्वार है
बिना प्रारंभिक परीक्षा पास किए कोई भी अभ्यर्थी आगे नहीं बढ़ सकता, इसलिए उसमें ली गई छूट का प्रभाव पूरे चयन पर पड़ता है