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राजस्थान हाईकोर्ट वीकली डाइजेस्ट: First Week 2026

Rajasthan High Court Weekly Digest | Key Judgments from First Week of 2026

जयपुर शीतकालीन अवकाश के बाद 5 जनवरी से राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायिक कार्यों की पुनः शुरुआत हुई।

वर्ष 2026 के प्रथम सप्ताह में राजस्थान हाईकोर्ट ने कई महत्वपूर्ण, ऐतिहासिक और रिपोर्टेबल फैसले सुनाए, जिनका प्रभाव कानून, प्रशासन और आम नागरिकों के अधिकारों पर व्यापक रूप से पड़ा है।

वर्ष 2026 के पहले वीकली डाइजेस्ट में आप पढ़िए राजस्थान हाईकोर्ट के उन चयनित, नजीर बनने वाले और जनहित से जुड़े जजमेंट्स का संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली सार, जो आपराधिक न्याय, सेवा व भर्ती विवादों, संवैधानिक प्रश्नों और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े हैं।

यह वीकली डाइजेस्ट अधिवक्ताओं, विधि छात्रों, मीडिया और आम पाठकों के लिए राजस्थान हाईकोर्ट के ताज़ा न्यायिक दृष्टिकोण को सरल भाषा में, एक ही मंच पर प्रस्तुत करता है, ताकि न्यायिक घटनाक्रमों की स्पष्ट और भरोसेमंद जानकारी मिल सके।

Rajasthan High Court Weekly Digest:

1 RTE में एडमिशन को लेकर Rajasthan High court का बड़ा फैसला:

2 संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर कार्यरत कर्मचारियों के साथ भी मनमाना और अन्यायपूर्ण व्यवहार नहीं किया जा सकता।

3 पैरोल सुधारात्मक और पुनर्वासात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है, न कि कोई कृपा या दया। यदि किसी गरीब कैदी के लिए पैरोल स्वीकृत होने के बावजूद ऐसी शर्तें लगा दी जाएं, जिन्हें वह पूरा ही नहीं कर सकता, तो यह व्यावहारिक रूप से पैरोल से इनकार करने के समान है।

4 यदि कोई पीजी या सुपरस्पेशियलिटी डॉक्टर केंद्र सरकार अथवा केंद्र सरकार के अधीन किसी अधिकृत संस्थान में चयनित होता है, तो उस पर राज्य सरकार द्वारा लिया गया सेवा बॉन्ड (Service Bond) लागू नहीं होगा।

5  राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने राजस्थान विश्वविद्यालय की VC अल्पना कटेजा की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता की बोना फाइड्स (निष्कपट मंशा) पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने कुलपति के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के लिए 5 लाख रुपये की शर्त रखी है।

6 राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यायिक हिरासत में बंद एक अंडरट्रायल कैदी की संदिग्ध मौत को अत्यंत गंभीर मामला मानते हुए जेल प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार पर सीधा प्रहार बताते हुए 15 दिनों में न्यायिक जांच पूरी करने के आदेश दिए हैं।

7  राजस्थान हाईकोर्ट ने महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एएनएम) / ऑक्सिलरी नर्स मिडवाइफ (Auxiliary Nurse Midwife – ANM) के संविदा पदों पर न्यूनतम आयु 21 वर्ष तय करने के राज्य सरकार के निर्णय को असंवैधानिक करार देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समान पद और समान योग्यता के बावजूद नियमित और संविदा भर्ती में अलग-अलग आयु सीमा तय करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।

8 राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अत्यंत संवेदनशील और समाज को झकझोर देने वाले मामले में बड़ा और सख्त फैसला सुनाते हुए कहा है कि पिता द्वारा अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ किया गया बलात्कार आम अपराध से कहीं ऊपर का जघन्य अपराध है, जो पारिवारिक विश्वास, सामाजिक नैतिकता और मानवीय मूल्यों को पूरी तरह ध्वस्त कर देता है। राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे मामलों में पीड़िता-बेटी की भरोसेमंद गवाही ही दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है, और इसके लिए अतिरिक्त corroboration की अनिवार्यता नहीं है।

9 राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2023 में आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्स पर्सन (Outstanding Sportsperson) श्रेणी से जुड़े एक बड़े और महत्वपूर्ण विवाद पर अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि खेल कोटे के अंतर्गत अभ्यर्थियों के दावों को मशीनी ढंग से खारिज नहीं किया जा सकता, बल्कि राज्य सरकार की नीति और नियमों के अनुसार प्रत्येक मामले की गहन और न्यायसंगत जांच अनिवार्य है।

10 राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम लिमिटेड (RIICO) को एक लंबे समय से लंबित भूमि आवंटन विवाद में बड़ा झटका देते हुए उसकी दोनों विशेष अपीलों को खारिज कर दिया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि RIICO अपने ही वादे से पीछे नहीं हट सकता और उसे आवंटी के पक्ष में बिना किसी और देरी के लीज डीड निष्पादित करनी होगी।

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