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भरतपुर में आयोजित हुआ न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं के लिए एक दिवसीय रोल प्ले ट्रेनिंग सेशन

One-Day Role-Play Based Mediation Training Held for Judges and Lawyers in Bharatpur

भरतपुर। प्रदेश में वैकल्पिक विवाद निवारण (ADR) व्यवस्था को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने की दिशा में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RLSA) की ओर से शनिवार को भरतपुर जिले के मध्यस्थों के लिए एक दिवसीय रोल-प्ले आधारित प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया।

मध्यस्थता एवं कंसिलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी (MCPC), सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली के निर्देश पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण RLSA की ओर से भरतपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में यह न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 40 घंटे के (हाइब्रिड मोड) मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसमें मध्यस्थों को सभी महत्वपूर्ण मध्यस्थता के बिंदुओं पर चर्चा की जाती है।

कार्यक्रम की शुरुआत राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निदेशक नीरज कुमार भारद्वाज ने दीप प्रज्ज्वलित कर की।

समारोह को संबोधित करते हुए रालसा निदेशक नीरज भारद्वाज ने कहा कि अदालतों पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए मध्यस्थता और सुलह (Mediation & Conciliation) एक प्रभावी माध्यम है। इससे न केवल त्वरित न्याय संभव होता है, बल्कि पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण समाधान भी निकलता है।

उन्होंने नवनियुक्त मध्यस्थों से अपेक्षा जताई कि वे संवेदनशीलता, निष्पक्षता और संवाद कौशल के साथ विवाद समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि मध्यस्थता प्रक्रिया में न्यायिक संवेदनशीलता, संवाद कौशल और निष्पक्षता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। रोल-प्ले सत्र के माध्यम से इन सभी पहलुओं को व्यावहारिक रूप से समझाया गया।

प्रशिक्षण सत्र में वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी बालकृष्ण गोयल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मध्यस्थता में सफलता का आधार पक्षकारों का विश्वास जीतना और उन्हें समाधान की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाना है।

अधिवक्ता और न्यायिक अधिकारियों में उत्साह

कार्यक्रम में भरतपुर से कुल 47 अधिवक्ता और न्यायिक अधिकारी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए।

अधिवक्ताओं ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे मध्यस्थता की तकनीकी एवं व्यावहारिक समझ मजबूत हुई है।

रोल-प्ले के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण

प्रशिक्षण का मुख्य आकर्षण रोल-प्ले आधारित अभ्यास रहे, जिनके माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों के निकट अनुभव प्रदान किया गया।

प्रत्येक रोल-प्ले के बाद वरिष्ठ प्रशिक्षकों द्वारा विस्तृत अवलोकन, आलोचनात्मक विश्लेषण तथा प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए गए।

प्रशिक्षकों ने यह बताया कि किस प्रकार संवाद की शैली, प्रश्न पूछने की तकनीक और समाधान की दिशा तय करने की रणनीति विवाद के परिणाम को प्रभावित करती है।

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