जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने जू-जित्सु (जापानी मार्शल आर्ट) खिलाड़ी और पहलवान श्वेता यादव को बड़ी राहत दी है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को आदेश दिया है कि वह श्वेता यादव का ऑफलाइन परीक्षा फॉर्म स्वीकार करते हुए उसे शैक्षणिक सत्र 2025-26 के बी.ए. पंचम सेमेस्टर की परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति दे।
यह परीक्षा 29 जनवरी 2026 यानी गुरुवार से शुरू हो रही है।
जस्टिस अनुरूप सिंघी ने यह आदेश श्वेता यादव की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं।
खेल प्रतियोगिता बनी देरी का कारण
जू-जित्सु खिलाड़ी की ओर से दायर की गई याचिका में कहा गया कि वह श्रीमती नारायणी देवी गर्ल्स कॉलेज, बहरोड़ (अलवर) में कला स्नातक (बी.ए.) की नियमित छात्रा हैं, जो राज ऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय, अलवर से संबद्ध है।
याचिका में बताया गया कि याचिकाकर्ता खिलाड़ी ने बी.ए. द्वितीय वर्ष उत्तीर्ण कर लिया है और वर्तमान में तृतीय वर्ष के पंचम सेमेस्टर की छात्रा हैं।
याचिका में बताया गया कि याचिकाकर्ता एक सक्रिय खेल खिलाड़ी हैं, जो कुश्ती और जू-जित्सु दोनों खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर भाग ले चुकी हैं और उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में कई पदक भी अर्जित किए हैं।
याचिका में कहा गया कि जनवरी 2026 में वे 5 जनवरी से 12 जनवरी 2026 तक जम्मू (जम्मू-कश्मीर) में आयोजित एक राष्ट्रीय स्तर की जू-जित्सु फाइटिंग चैंपियनशिप में भाग ले रही थीं।
इसी दौरान बी.ए. पंचम सेमेस्टर परीक्षा का ऑनलाइन आवेदन भरने की अंतिम तिथि 12 जनवरी 2026 थी।
प्रतियोगिता में व्यस्तता और बाहर होने के कारण याचिकाकर्ता छात्रा समय पर परीक्षा फॉर्म नहीं भर सकीं।
परीक्षा से वंचित होने का खतरा
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पुनीत सिंघवी, उनके साथ आयुष सिंह एवं ईशान वर्मा ने अदालत को बताया कि यदि याचिकाकर्ता खिलाड़ी को अब परीक्षा फॉर्म भरने की अनुमति नहीं दी जाती, तो वे पूरे एक शैक्षणिक सत्र की परीक्षा से वंचित हो जाएंगी।
याचिका में कहा गया कि इससे न केवल उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित होगा, बल्कि यह एक राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी के साथ अन्याय भी होगा।
अधिवक्ताओं ने दलील दी कि खेल गतिविधियों में भाग लेना विश्वविद्यालय और राज्य, दोनों के लिए गौरव की बात है और ऐसे मामलों में तकनीकी देरी के आधार पर छात्रा को दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट का रुख
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सभी दलीलें सुनने के बाद कहा कि चूंकि परीक्षा 29 जनवरी 2026 से यानी गुरुवार से ही शुरू हो रही है और समय अत्यंत सीमित है, इसलिए याचिकाकर्ता का ऑफलाइन आवेदन फॉर्म स्वीकार किया जाए।
हाईकोर्ट ने राज ऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय प्रशासन को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता खिलाड़ी को बी.ए. पंचम सेमेस्टर परीक्षा में प्रावधिक रूप से नामांकित किया जाए, जिससे वह परीक्षा में सम्मिलित हो सकें।
अधिकार नहीं, केवल अंतरिम राहत
राजस्थान हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता श्वेता यादव को परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति केवल अंतरिम और प्रावधिक है। इससे उनके पक्ष में कोई स्थायी अधिकार उत्पन्न नहीं होगा और अंतिम निर्णय याचिका के निस्तारण के बाद ही माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने मामले को दो सप्ताह बाद पुनः सूचीबद्ध करने के आदेश भी दिए हैं।
इसके साथ ही विश्वविद्यालय की ओर से पेश हुए अधिवक्ता की ओर से नोटिस स्वीकार करने के निर्देश दिए गए।