टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

शनिवार कार्यदिवस के विरोध में अधिवक्ताओं का स्वैच्छिक न्यायिक कार्य बहिष्कार

Bar vs Bench: Jodhpur Bar Associations Call for Boycott as Rajasthan High Court Lists Important Cases on Last Working Day

हाईकोर्ट परिसर में नारेबाजी, जोधपुर और जयपुर पीठ में नहीं हुई प्रभावी सुनवाई

जयपुर/जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में प्रत्येक माह के दो शनिवार को कार्यदिवस घोषित किए जाने के फैसले के विरोध में शनिवार को अधिवक्ताओं ने स्वैच्छिक रूप से न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया।

इस दौरान जोधपुर और जयपुर दोनों पीठों में अधिवक्ता न्यायिक कार्य में उपस्थित नहीं हुए। हाईकोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं ने एकत्र होकर नारेबाजी की और अपने विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज कराया।

बहिष्कार के चलते शनिवार को कई मामलों में प्रभावी सुनवाई नहीं हो सकी, जबकि हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से नियमित रूप से कॉज लिस्ट जारी की गई थी।

दूसरी ओर जयपुर पीठ में कई अदालतों में पक्षकारों को अपने मामलों की पैरवी करते हुए देखा गया.

तीनों बार ने किया हैं ऐलान

यह स्वैच्छिक न्यायिक कार्य बहिष्कार प्रदेश की तीनों प्रमुख बार एसोसिएशनों-राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर; राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन, जोधपुर; तथा राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर-के संयुक्त आह्वान पर किया गया।

बार पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह बहिष्कार किसी दबाव या बाध्यता के तहत नहीं किया गया, बल्कि अधिवक्ताओं ने अपनी सामूहिक सहमति से न्यायिक कार्य से दूरी बनाए रखी।

DEEPESH SHARMA. RHC JAIPUR

बार प्रतिनिधियों का कहना है कि शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने का निर्णय अधिवक्ताओं की कार्यसंस्कृति, पारिवारिक जीवन और व्यावसायिक संतुलन को प्रभावित करता है।

साथ ही, लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान के नाम पर बिना अधिवक्ताओं से समुचित परामर्श के लिया गया यह निर्णय व्यवहारिक कठिनाइयों को जन्म दे सकता है।

फुल कोर्ट का फैसला

गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 20 दिसंबर 2025 को एक अधिसूचना जारी कर प्रत्येक माह के दो शनिवार को कार्यदिवस घोषित किया था।

यह आदेश फुल कोर्ट की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार जारी किया गया था जो कि 12 दिसंबर को जैसलमेर में आयोजित हुई थी इस निर्णय के बाद से ही अधिवक्ता समुदाय में असंतोष व्याप्त है।

इसी क्रम में 6 जनवरी 2026 को बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधिमंडल ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कर अपना विरोध दर्ज कराया था और एक ज्ञापन सौंपा था। इसके पश्चात न्यायाधीशों की एक समिति का गठन किया गया, ताकि अधिवक्ताओं की आपत्तियों पर विचार किया जा सके।

हालांकि, अधिवक्ताओं का कहना है कि अब तक न तो समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है और न ही इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय सामने आया है। इससे अधिवक्ता समुदाय में असमंजस और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने “शनिवार कार्यदिवस वापस लो” जैसे नारों के माध्यम से अपना विरोध जताया।

27 जनवरी को बैठक

अधिवक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की रणनीति को लेकर 27 जनवरी 2026 को तीनों बार एसोसिएशनों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी।

इस बैठक में यह तय किया जाएगा कि स्वैच्छिक न्यायिक कार्य बहिष्कार को आगे भी जारी रखा जाए या किसी अन्य माध्यम से अपनी बात रखी जाए।

सबसे अधिक लोकप्रिय