राष्ट्रीय युवा दिवस पर राजस्थान हाईकोर्ट में अधिवक्ता परिषद की ओर से कार्यक्रम का आयोजन
जयपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट के युवा जज जस्टिस बिपिन गुप्ता ने देश के युवाओं और विशेष रूप से युवा अधिवक्ताओं को कड़ी चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि AI ऐसे-ऐसे फैसले तैयार कर रहा है जो किसी भी अदालत ने कभी दिए ही नहीं, जिससे सच और झूठे निर्णयों में अंतर करना युवा अधिवक्ताओं के लिए बेहद कठिन होता जा रहा है।
राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर अधिवक्ता परिषद राजस्थान, जयपुर प्रांत द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट के सतीशचंद्र सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जस्टिस बिपिन गुप्ता ने कहा कि AI न तो नैतिकता को समझता है और न ही यह तय कर सकता है कि कौन-सा निर्णय सही है और कौन-सा गलत।
उन्होंने आगाह किया कि आज की स्थिति यह है कि AI हमारी बातों को सुनकर और उपलब्ध डाटा के आधार पर ऐसे फैसले गढ़ रहा है, जिनका किसी भी न्यायालय से कोई संबंध नहीं है।
AI फैसलों से न्याय प्रणाली को खतरा
जस्टिस गुप्ता ने कहा कि इस तरह के तथाकथित फैसलों की विश्वसनीयता तय करना बेहद मुश्किल हो जाता है। यह स्थिति केवल युवा अधिवक्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि न्यायाधीशों के लिए भी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
उन्होंने कहा, “न्यायपालिका में अधिवक्ताओं पर विश्वास एक अहम आधार है।
यदि अदालत के समक्ष ऐसे फैसले रखे जाएं जो वास्तव में कभी दिए ही नहीं गए, तो यह पूरे न्यायिक तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर देता है।”
ड्राफ्टिंग में भी बरतें अत्यधिक सावधानी
जस्टिस बिपिन गुप्ता ने स्पष्ट किया कि एआई का उपयोग डाटा संग्रह, प्रारंभिक रिसर्च और कार्यों की गति बढ़ाने में सहायक हो सकता है, लेकिन ड्राफ्टिंग और याचिकाएं तैयार करते समय उस पर पूरी तरह निर्भर रहना खतरनाक है।
उन्होंने कहा कि यदि युवा अधिवक्ता एआई की मदद से ड्राफ्टिंग या याचिकाएं तैयार कर रहे हैं, तो उन्हें हर तथ्य, हर संदर्भ और हर निर्णय को स्वयं सत्यापित करना चाहिए।
नैतिक साहस और विवेक सबसे जरूरी
“न्यायिक सुधारों में युवाओं की भागीदारी” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए जस्टिस गुप्ता ने युवा अधिवक्ताओं से नैतिक साहस, विवेक और आंतरिक दृढ़ता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक चाहे जितनी उन्नत हो जाए, न्याय की आत्मा मानवीय विवेक और नैतिकता में ही निहित है।

स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरणा
जस्टिस गुप्ता ने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए युवाओं से व्यक्तिगत, सामूहिक और राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय और जिम्मेदार भूमिका निभाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि युवा ही न्याय व्यवस्था का भविष्य हैं और उनके आचरण से ही समाज का विश्वास कायम रहेगा।
ये भी रहे मौजूद
इस अवसर पर अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के क्षेत्रीय मंत्री कमल परसवाल, इकाई अध्यक्ष धर्मेंद्र जैन, उपाध्यक्ष सोनिया शांडिल्य, राजस्थान हाईकोर्ट के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और महामंत्री दीपेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता और युवा कानून विद्यार्थी मौजूद रहे।