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AI से बदलेगा न्यायपालिका का चेहरा, पर मानवीय संवेदनाओं का विकल्प नहीं: डॉ. अभिनव शर्मा

AI Will Transform Courts and Judiciary Soon, Says Dr. Abhinav Sharma

उदयपुर बार एसोसिएशन ने किया ‘क्या अब न्याय एआई करेगा?’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

उदयपुर। उदयपुर बार एसोसिएशन की ओर से वकालत और अदालतों में एआई के उपयोंग और युवाओं की सावधानी को लेकर ‘क्या अब न्याय एआई करेगा?’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ अभिनव शर्मा रहें.

उन्होने अपने संबोधन में कहा कि एआई आने वाले समय में अदालतों और अदालतों की कार्यप्रणाली को व्यापक रूप से बदलने जा रही है।

अधिवक्ताओं, विशेषकर युवा वकीलों को एआई के उपयोग में किसी प्रकार की झिझक या शर्म नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि जिस प्रकार इंटरनेट और डिजिटल तकनीक आज विधि व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं, उसी प्रकार एआई भी बहुत जल्द कानूनी प्रक्रिया का अनिवार्य अंग बन जाएगा।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग

डॉ. शर्मा ने कहा कि तकनीक को लेकर प्रारंभ में आशंकाएं स्वाभाविक होती हैं, किंतु समय के साथ वही तकनीक व्यवस्था का आधार बन जाती है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि गुर्जर आरक्षण आंदोलन से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रकरण की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से हुई थी। उस समय राजस्थान हाईकोर्ट देश का पहला उच्च न्यायालय बना जिसने कोविड-19 महामारी से पहले ही वीसी के जरिए सुनवाई प्रारंभ कर दी थी।

बाद में कोविड काल में यही तकनीक न्याय व्यवस्था के लिए वरदान सिद्ध हुई और राजस्थान देश का पहला राज्य बना जहां व्यापक स्तर पर वीसी से अदालतों की कार्यवाही शुरू हो सकी।

डॉ. शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रारंभ में असामान्य और असुविधाजनक प्रतीत होती थी, उसी प्रकार एआई भी आज कुछ लोगों को विचित्र लग सकता है, लेकिन आने वाले समय में यह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बन जाएगा।

एआई शैशव काल में

उन्होंने बताया कि वर्तमान में कई लॉ रिपोर्टर और विधि शोध प्लेटफॉर्म अपने-अपने एआई टूल विकसित कर रहे हैं, जिनके माध्यम से निर्णयों की खोज, केस लॉ का विश्लेषण और विधिक अनुसंधान कहीं अधिक त्वरित और सटीक हो सकेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई के माध्यम से ड्राफ्टिंग, अनुवाद, टाइपिंग तथा न्यायिक निर्णयों की खोज पहले से अधिक सरल और तेज हो जाएगी। इससे अधिवक्ताओं का समय बचेगा और वे अपने मुवक्किल के मामलों पर अधिक गहराई से कार्य कर सकेंगे।

हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि एआई अभी शैशव काल में है, किंतु इसकी संभावनाएं व्यापक हैं और जल्द ही यह विधि क्षेत्र का परिदृश्य बदल देगा।

डिस्पोजल और न्याय में अंतर

डॉ. शर्मा ने भविष्य की परिकल्पना करते हुए कहा कि वह दिन दूर नहीं जब कुछ मामलों में ‘एआई कोर्ट’ की अवधारणा विकसित हो सकती है, जहां केवल दस्तावेजी आधार पर निर्णय दिए जाएंगे। विशेषकर वे प्रकरण जिनमें तथ्य स्पष्ट और विवाद सीमित हो, वहां एआई आधारित प्रणाली त्वरित निस्तारण में सहायक हो सकती है।

हालांकि उन्होंने एक महत्वपूर्ण अंतर भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “डिस्पोजल और न्याय में अंतर है। एआई से मामलों का निस्तारण (डिस्पोजल) संभव है, लेकिन वास्तविक न्याय की सीमा तक पहुंचने में अभी समय लगेगा।”

उनके अनुसार न्याय केवल कानून की धाराओं का यांत्रिक प्रयोग नहीं है, बल्कि यह टूटी-बिखरी और घायल संवेदनाओं पर मानवीय लेप लगाने की प्रक्रिया है। इसलिए मानवीय संवेदनाएं और न्यायपालिका की आत्मा को एआई कभी विस्थापित नहीं कर पाएगा।

संगोष्ठी में उपस्थित अधिवक्ताओं ने भी खुलकर अपने सवाल रखे। कई वकीलों ने चिंता जताई कि क्या एआई के उपयोग से डेटा चोरी की संभावना बढ़ सकती है और क्या भविष्य में अधिवक्ता केवल एआई पर ही निर्भर हो जाएंगे।

इस पर डॉ. शर्मा ने उत्तर देते हुए कहा कि एआई अभी विधि क्षेत्र के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। ओपन एआई जैसे प्लेटफॉर्म पर डेटा सुरक्षा को लेकर कुछ आशंकाएं हो सकती हैं, किंतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित हो रहे ‘हार्वे’ जैसे विधि-विशेष एआई टूल जल्द भारत में भी उपलब्ध होंगे। ये कैप्टिव और डेडिकेटेड एआई सिस्टम होंगे, जो केवल लाइसेंसधारी अधिवक्ताओं के लिए कार्य करेंगे और डेटा की गोपनीयता सुनिश्चित करेंगे।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र जैन ने कहा कि यह समय परिवर्तन का है और अधिवक्ताओं को बदलती तकनीक से स्वयं को जोड़ना होगा। उन्होंने बताया कि बार एसोसिएशन का उद्देश्य ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से अधिवक्ताओं को नवीन तकनीकों से परिचित कराना है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रह सकें।

खचाखच भरे बार सभागार में आयोजित इस संगोष्ठी में बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। अध्यक्ष जैन ने बताया कि यह व्याख्यान माला बार की श्रृंखला का तीसरा आयोजन है। इससे पूर्व जस्टिस फरजंद अली भी बार एसोसिएशन के मंच से अधिवक्ताओं को संबोधित कर चुके हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि शीघ्र ही साइबर फ्रॉड में निर्दोष खाताधारकों के अधिकारों पर एक विशेष व्याख्यान माला आयोजित की जाएगी।।

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