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हाईकोर्ट में शनिवार कार्यदिवस के फैसले पर बार एसोसिएशन की आपत्ति, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को सौंपा प्रतिवेदन, पुनर्विचार की मांग

ajasthan High Court Bar Opposes Working Saturdays, Seeks Review from Acting Chief Justice

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में प्रत्येक माह के पहले और तीसरे शनिवार को न्यायिक कार्यदिवस घोषित किए जाने के फुल कोर्ट के हालिया फैसले को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर ने आपत्ति जताई है।

बार के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और महासचिव दीपेश शर्मा के नेतृत्व में संपूर्ण बार के पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों ने शुक्रवार को इस मामले में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा से मुलाकात की।

बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने फुल कोर्ट के फैसले को लेकर हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं में उभरे असंतोष की जानकारी कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को देते हुए एक विस्तृत प्रतिवेदन भी सौंपा

पुनर्विचार का अनुरोध

बार पदाधिकारियों ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और महासचिव दीपेश शर्मा की ओर से दिए गए प्रतिवेदन में कहा गया है कि शनिवार को नियमित न्यायिक कार्य प्रारंभ करना इस समस्या का व्यावहारिक समाधान नहीं है और इससे न्यायिक प्रशासन पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

प्रतिवेदन में बार ने कहा है कि शनिवार परंपरागत रूप से गैर-कार्यदिवस रहा है और इसका न्यायिक व्यवस्था में विशेष महत्व है। यह दिन अधिवक्ताओं, न्यायाधीशों और न्यायालय कर्मियों के लिए व्यक्तिगत, पारिवारिक और स्वास्थ्य से जुड़े दायित्वों को निभाने का अवसर प्रदान करता है।

बार ने कहा कि रविवार को अधिवक्ता आगामी सप्ताह के मामलों की तैयारी में व्यस्त रहते हैं, जबकि शेष सप्ताह वे पूरे दिन अदालत और कार्यालयीन कार्यों में लगे रहते हैं। ऐसे में शनिवार को भी नियमित कोर्ट कार्य होने से कार्यभार असंतुलित हो जाएगा।

बार एसोसिएशन ने कहा कि शनिवार को बड़ी संख्या में अधिवक्ता वैकल्पिक विवाद निस्तारण प्रक्रियाओं जैसे मध्यस्थता, सुलह और समझौते में भाग लेते हैं, जो लंबित मामलों को कम करने में सहायक होती हैं।

प्रतिवेदन में कहा गया कि इसके अलावा जिला एवं सत्र न्यायालयों में भी शनिवार को कार्य होते हैं। यदि हाईकोर्ट में भी शनिवार को नियमित सुनवाई होगी, तो ये सभी प्रक्रियाएं प्रभावित होंगी।

प्रतिवेदन में निरंतर न्यायिक कार्य से अधिवक्ताओं, न्यायाधीशों और कर्मचारियों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई गई है।

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि शनिवार को कार्यदिवस बनाने के फैसले को फिलहाल स्थगित रखा जाए।

जानकारी के अनुसार कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने फिलहाल इस फैसले को लेकर बार के अनुरोध पर कोई जवाब नहीं दिया है।

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