सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को बड़ी राहत देते हुए हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें 2003 के राम अवतार जग्गी हत्या मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
जस्टिस विक्रम नाथ (Justice Vikram Nath), जस्टिस संदीप मेहता (Justice Sandeep Mehta) और जस्टिस विजय बिश्नोई (Justice Vijay Bishnoi) की तीन सदस्यीय बेंच ने इस आदेश के साथ ही अपील पर नोटिस जारी किया।
शीर्ष अदालत ने इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले की कार्यवाही और प्रभाव दोनों पर फिलहाल रोक लगा दी है।
”सुनवाई से पहले सजा कैसे?” सुप्रीम कोर्ट का सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा,
“यह कैसा फैसला है… बिना सुनवाई के ही दोषसिद्धि और सजा सुना दी गई?”
कोर्ट की यह टिप्पणी इस बात को लेकर थी कि क्या अमित जोगी को पर्याप्त अवसर दिए बिना ही दोषी ठहराया गया।
हाईकोर्ट के आदेश पर भी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसमें हाईकोर्ट ने सीबीआई को अपील की अनुमति दी थी और अमित जोगी को 31 मार्च तक जमानत बॉन्ड भरने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश के पालन में असफल रहने पर होने वाले परिणाम भी अब लागू नहीं होंगे।
क्या है पूरा मामला?
प्रॉसिक्यूशन के मुताबिक, 4 जून 2003 को एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की कार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
ट्रायल कोर्ट ने 2007 में अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया, लेकिन अमित जोगी को बरी कर दिया था।
इसके खिलाफ सीबीआई और शिकायतकर्ता सतीश जग्गी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। 2011 में हाईकोर्ट ने सीबीआई की अपील को खारिज कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस फैसले को पलटते हुए हाईकोर्ट को मामले की मेरिट पर सुनवाई करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
दूसरी बार सुनवाई में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को साजिश का “मास्टरमाइंड” बताया।
कोर्ट ने कहा था कि वह मूकदर्शक नहीं रह सकता जब कोई पक्ष जानबूझकर देरी की रणनीति अपनाए।
हाईकोर्ट ने यह भी माना था कि जोगी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर साजिश को अंजाम देने में सक्षम थे और पूरे घटनाक्रम में उनकी केंद्रीय भूमिका थी।
सुप्रीम कोर्ट में पक्षकार
अमित जोगी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने पैरवी की, जबकि सीबीआई और अन्य पक्षों की ओर से सिद्धार्थ लूथरा और गोपाल शंकरनारायणन पेश हुए।
फिलहाल क्या स्थिति?
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अमित जोगी की सजा और दोषसिद्धि पर फिलहाल रोक लग गई है। अब इस मामले में आगे की सुनवाई के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
क्यों अहम है मामला?
यह मामला केवल एक हाई-प्रोफाइल मर्डर केस नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में “सुनवाई के अधिकार” की अहमियत को भी रेखांकित करता है। सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप बताता है कि निष्पक्ष प्रक्रिया के बिना दी गई सजा को चुनौती दी जा सकती है।
