जयपुर, 18 सितंबर।
बहुचर्चित 2018 लिपिक ग्रेड भर्ती में पेपर लीक के मामले के आरोपी बीकानेर निवासी दिनेश सिंह चौहान की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है।
अपर सत्र न्यायाधीश क्रम-9, जयपुर महानगर-द्वितीय की जज सोनल शुक्ला ने आरोपी की ओर से दायर जमानत को खारिज करने के आदेश दिए।
युवाओं में भय और आक्रोश
याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि इस स्तर पर आरोपी की संलिप्तता को संदिग्ध मानना संभव नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की कि वर्तमान समय में इस तरह के अपराधों की बढ़ती संख्या से बेरोजगार युवाओं में रोष और भय व्याप्त है।
अदालत ने कहा कि ऐसे कृत्यों से मेहनती अभ्यर्थियों की मेहनत बेकार चली जाती है और समाज में परिश्रम का महत्व घटता है। अदालत ने यह भी माना कि इस प्रकार की गतिविधियां अनुचित साधनों को बढ़ावा देती हैं और यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।
आरोप और जांच
आरोपी दिनेश सिंह चौहान पर आरोप है कि उसने अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर वर्ष 2018 की लिपिक ग्रेड संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पूर्व लीक कर अभ्यर्थियों को ब्लूटूथ के जरिए नकल करवाई।
पेपर लीक कर नकल कराने के इस अवैध कार्य से उसने कई लोगों से लाखों रुपये वसूले। इस मामले की शुरुआत आरपीएससी द्वारा एसओजी को भेजी गई शिकायत से हुई, जिसमें आशंका जताई गई कि आयोग कार्यालय में नियुक्त कार्मिक सरोज विश्नोई का चयन प्रश्नपत्र लीक होने के कारण हुआ।
इस संबंध में आयोग ने सरोज विश्नोई का विस्तृत आवेदन पत्र व समस्त दस्तावेजों की प्रतियां जांच एजेंसी एसओजी को उपलब्ध कराई थीं। एसओजी जयपुर द्वारा की जा रही जांच में सामने आया कि चौहान सहित अन्य आरोपियों ने संगठित गिरोह बनाकर कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक कर अभ्यर्थियों को अनुचित साधनों से लाभ पहुँचाया।
आरोपी का पक्ष
जमानत याचिका दायर कर आरोपी की ओर से कहा गया कि घटना वर्ष 2018 की बताई गई है, लेकिन एफआईआर जुलाई 2025 में दर्ज कराई गई, यानी करीब सात साल बाद मामला दर्ज हुआ।
जमानत प्रार्थना पत्र में यह भी तर्क दिया गया कि एफआईआर में आरोपी का नाम दर्ज नहीं है और न ही उसके पास से कोई जब्ती या अनुसंधान शेष है। इसमें कहा गया कि उस पर लगाया गया अपराध न तो मृत्युदंड योग्य है और न ही आजीवन कारावास से दंडनीय है। इसलिए उसे जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक सुरेश कुमावत ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के विरुद्ध गंभीर आरोप प्रमाणित प्रतीत होते हैं।
अदालत ने कहा कि ऐसे अपराधों से लाखों मेहनती युवाओं की मेहनत बेकार चली जाती है और देश में परिश्रम का महत्व घटता है। ऐसे अपराध बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करते हैं और समाज में गलत संदेश देते हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में सह-अभियुक्त तुलछाराम कालेर की जमानत अर्जी 04 अगस्त 2025 को और सरोज विश्नोई की अर्जी 29 अगस्त 2025 को पहले ही खारिज की जा चुकी है।