जयपुर, 24 सितंबर।
राजस्थान हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया हैं कि किसी भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया के दौरान, आवेदन पूर्ण होने के बाद सुधार के लिए दिए गए समय का उपयोग पात्रता शर्तों को बदलने के लिए नहीं किया जा सकता.
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने जूनियर इंस्ट्रक्टर (इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक) पद के लिए आवेदन असंगत होने के कारण दाखिल इंट्रा कोर्ट अपील को खारिज कर दिया।
जस्टिस अवनीश झींगन और जस्टिस बी. एस. संधू की खंडपीठ ने सुनील जांगिड़ की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए यह आदेश दिया।
अपीलकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि आवेदक ने जूनियर इंस्ट्रक्टर (इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक) पद के लिए 6 अप्रैल 2024 को आवेदन किया था.
विज्ञापन के अनुसार, 11 अप्रैल 2024 तक वैध स्थायी हैवी वाहन ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य था.
आवेदक ने आवेदन में लर्निंग लाइसेंस संलग्न किया, जबकि स्थायी लाइसेंस 15 अप्रैल 2024 को जारी किया गया. इसके आधार पर विभाग ने आवेदक का आवेदन 1 जुलाई 2025 को खारिज कर दिया.
राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने विभाग के इस आदेश को सही माना और आवेदक की याचिका को खारिज कर दिया.
आवेदक ने खंडपीठ में इस आदेश के खिलाफ यह कहते हुए अपील दायर की कि सुधार के लिए दिया गया समय अभ्यर्थी से हुई भूल सुधार के लिए हैं जिसमें पात्रता बदलाव भी एक हिस्सा है.
एकलपीठ के आदेश पर मुहर
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर मुहर लगाते हुए कहा कि आवेदन में सुधार केवल नाम, पिता का नाम, शिक्षा, जन्मतिथि और श्रेणी तक ही सीमित है; सुधार प्रक्रिया के माध्यम से पात्रता शर्तों को बदलना संभव नहीं है.
खंडपीठ ने कहा कि “इस बात पर कोई विवाद नहीं हो सकता कि पात्रता का निर्धारण विज्ञापन में घोषित कट-ऑफ तारीख के अनुसार किया जाएगा और अदालत भर्ती के लिए विज्ञापन में निर्दिष्ट कट-ऑफ तारीख को बदल नहीं सकती.”
खंडपीठ ने कहा कि ड्राइविंग प्रशिक्षण पूरा करने से आवेदन वैध नहीं बनता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अपील को खारिज करने के आदेश दिए.