प्रत्येक माह के दो शनिवार कार्यदिवस और रात्रिकालीन अदालतों के मुद्दे पर बार काउंसिल ऑफ राजस्थान की बैठक
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में प्रत्येक माह के दो शनिवार कार्यदिवस घोषित करने का मामला अब तूल पकड़ रहा है। जोधपुर और जयपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के बाद अब बार काउंसिल ऑफ राजस्थान ने भी इस मामले में हाईकोर्ट प्रशासन से पुनर्विचार की मांग की है।
बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष भुवनेश शर्मा की अध्यक्षता में रविवार को राजस्थान हाईकोर्ट परिसर, झालामंड (जोधपुर) स्थित कार्यालय में कार्यकारिणी की आपात बैठक हुई।
बैठक में बार काउंसिल के उपाध्यक्ष, सह-अध्यक्ष, निर्वाचित सदस्य, विशेष आमंत्रित सदस्य एवं विभिन्न वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित रहे।
बैठक में हाल ही में हाईकोर्ट फुल कोर्ट द्वारा प्रत्येक माह के दो शनिवारों को कार्यदिवस घोषित किए जाने के निर्णय एवं रात्रिकालीन अदालतों के संचालन के प्रस्ताव पर चर्चा की गई।

कार्यकारिणी समिति ने सर्वसम्मति से यह मत व्यक्त किया कि दो शनिवारों को कार्यदिवस घोषित किए जाने से अधिवक्ताओं की कार्यक्षमता, स्वास्थ्य तथा पारिवारिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
बार काउंसिल ने कहा कि अधिवक्ताओं के लिए शारीरिक एवं मानसिक संतुलन बनाए रखना न्यायिक प्रक्रिया की गुणवत्ता के लिए आवश्यक है, ऐसे में उन्हें पर्याप्त विश्राम एवं पुनः ऊर्जा प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए।
बार काउंसिल का मत है कि रात्रिकालीन अदालतों का संचालन वर्तमान परिस्थितियों में व्यावहारिक नहीं है। इससे अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा, आधारभूत ढांचे की उपलब्धता, परिवहन व्यवस्था और दूर-दराज से आने वाले पक्षकारों की पहुंच जैसे गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
बार काउंसिल ऑफ राजस्थान ने इस बात पर भी सहमति जताई कि अधिवक्ताओं के लिए अनुकूल वातावरण सृजित करना न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक आवश्यक कदम है। इसके लिए जिला एवं सत्र न्यायालयों सहित सभी न्यायालयों में पांच दिवसीय साप्ताहिक कार्य-पद्धति लागू किए जाने पर विचार किया जाना चाहिए, जिससे न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं दोनों को बेहतर कार्य परिस्थितियां मिल सकें।
बार काउंसिल ऑफ राजस्थान ने राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन से अनुरोध किया है कि दो शनिवारों को कार्यदिवस घोषित किए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए तथा अधीनस्थ अदालतों में भी पांच दिवसीय साप्ताहिक कार्य प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाए।
बार काउंसिल ने भविष्य में न्यायिक कार्य प्रणाली में किसी भी प्रकार के महत्वपूर्ण परिवर्तन से पूर्व अधिवक्ता समुदाय से व्यापक परामर्श सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक के अंत में बार काउंसिल ने यह स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में अधिवक्ताओं की भूमिका सहयोगी एवं सहभागी की है और उनके हितों की अनदेखी कर लिया गया कोई भी निर्णय दीर्घकाल में न्याय व्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।