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जयपुर, 25 अक्टूबर
दुनिया में अगर चाह हो, तो कुछ भी असंभव नहीं। कभी-कभी एक फोटो ही आपकी पहचान बना देती है – और यही कहानी है राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता अशोक यादव की।
अशोक यादव बताते हैं कि एक फोटो ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। वकीलों के आंदोलन के दौरान 2008 में राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित वह तस्वीर आज भी उनके लिए प्रेरणा स्रोत है.
“वह फोटो मुझे हर दिन याद दिलाती है कि मैंने वकीलों के हक़ और सम्मान के लिए लड़ने का वादा किया था,” वे मुस्कुराते हुए कहते हैं।

25 साल की चुनावी यात्रा
अशोक यादव ने वर्ष 2000 में राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर में वकालात की शुरुआत की. महज़ पाँच साल बाद, 2005 में पहली बार, बार एसोसिएशन के सांस्कृतिक सचिव पद के लिए चुनाव लड़ा।
तब से अब तक, यह सफर लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है. 25 वर्षों में उन्होंने कुल 19 चुनाव लड़े हैं — जिनमें से 13 में जीत हासिल की और 6 में हार. लेकिन हर हार ने उन्हें और मजबूत बनाया।
2025 का रण – महासचिव पद की नई चुनौती
अब एक बार फिर अशोक यादव राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर BAR एसोसिएशन के महासचिव पद के लिए मैदान में हैं.
इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है। चुनावी माहौल में दीवाली की रौनक के साथ प्रचार की गहमागहमी भी चरम पर है। सभी प्रत्याशी अपने-अपने समर्थकों के साथ पूरे जोश में जुटे हैं।
क्यों है इस बार का चुनाव ख़ास
इस बार का चुनाव सिर्फ एक पद का नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक पड़ाव का प्रतीक है.
दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ अपनी स्थापना के 50वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। ऐसे में आने वाले वर्षभर में कई कार्यक्रम और समारोह आयोजित होंगे, जिनमें बार अध्यक्ष और महासचिव की भूमिका अहम होगी।
अशोक यादव कहते हैं —
“यह सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि एक अवसर है कि हम जयपुर पीठ की स्वर्ण जयंती को गर्व और गरिमा के साथ मना सकें।”
दूसरी कड़ी
‘बार इलेक्शन यात्रा 2025’ की दूसरी कड़ी में हम राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर के इसी जुझारू और अनुभवी अधिवक्ता अशोक यादव से मिलवा रहे हैं — जिनकी पहचान सिर्फ एक वकील के रूप में नहीं, बल्कि बार राजनीति के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में भी है।
उनकी यात्रा संदेश देती है कि
“यदि इरादे साफ़ हों, तो एक तस्वीर भी प्रेरणा बन सकती है, और संघर्षों के बीच जीत की राह दिखा सकती है।”