नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2025:
राजस्थान की पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में राजस्व मंत्री रहे रामलाल जाट और राज्य के एडीजी आनंद श्रीवास्तव के भाई अरविंद श्रीवास्तव के खिलाफ अब सीबीआइ जांच नहीं होगी.
Supreme Court ने अब राजस्थान सरकार की अपील मंजूर करते हुए CBI जांच की मांग को खारिज कर दिया है।
भीलवाड़ा के करेड़ा थाने में दर्ज 5 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में Rajasthan Highcourt ने CBI जांच का आदेश दिया था।
Rajasthan Highcourt के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने अपील दायर कर Supreme Court में चुनौती दी थी।
राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि Rajasthan Highcourt का आदेश अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर और कानून के अनुसार असंवैधानिक था.
सरकार की दलील
राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने पैरवी करते हुए कहा कि राज्य के मामलों की जांच को CBI को ट्रांसफर नियमित रूप से नहीं होना चाहिए, खासकर ऐसे आधार पर कि राज्य पुलिस पक्षपाती या अक्षम हो सकती है, केवल इसलिए कि वरिष्ठ अधिकारी किसी आरोपी से संबंधित हैं.
सरकार की ओर से दलील दी गयी कि ऐसे सामान्य मामलों में भी पुलिस से जांच CBI को ट्रांसफर करने से ज्य की जांच प्रणाली को कमजोर होती हैं और संविधान में निहित संघीय संतुलन को प्रभावित करते हैं.
ये हैं मामला
17 सितंबर 2022 को कोर्ट के आदेश पर एक खनन व्यवसायी ने उन पर 5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था।
राजसमंद के माइनिंग व्यवसायी परमेश्वर जोशी ने कोर्ट में इस्तगासा दायर कर पूर्व मंत्री रामलाल जाट के खिलाफ केस दर्ज कराया।
कोर्ट के आदेश से भीलवाड़ा के करेड़ा थाने में जयपुर निवासी अरविंद श्रीवास्तव उर्फ मनीष धाबाई, मथुरा निवासी श्यामसुंदर गोयल, गाजियाबाद निवासी चंद्रकांत शुक्ला, जोधपुर निवासी राजकुमार विश्नोई और जयपुर निवासी जितेन्द्र धाबाई के खिलाफ दर्ज किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की ग्रेनाइट माइंस में जाट ने हिस्सा लिया और अपने छोटे भाई के बेटे व उसकी पत्नी के नाम 50% शेयर करवा दिए।
हाईकोर्ट ने दिया था आदेश
मामले में शिकायतकर्ता ने Rajasthan Highcourt में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी.
दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि मामले में पूर्व राजस्व मंत्री रामलाल जाट और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आनंद श्रीवास्तव के भाई अरविंद श्रीवास्तव के जुड़े होने के कारण किसी ने सुनवाई नहीं की.
राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री रामलाल जाट व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आनंद श्रीवास्तव के भाई अरविंद श्रीवास्तव सहित 5 आरोपियों पर लगे चोरी के आरोपों व इससे जुड़े एक अन्य मामले की जांच केंद्सबीआइ) को सौंपने का आदेश दिया था
हाईकोर्ट ने पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जब आरोप प्रभावशाली राजनेता और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़े हों, तो पुलिस एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती.
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर हैरानी जताई थी कि एफआइआर दर्ज होने के 7 माह बाद भी पुलिस उप-अधीक्षक स्तर के अधिकारी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के भाई के मामले में आरोपी होने से अनभिज्ञ बने रहे.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि एसओजी, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और सीआइडी जैसी एजेंसियों से जांच करवाई जा सकती थी लेकिन वे सभी पुलिस महानिदेशक के अधीन होने के कारण निष्पक्षता पर संदेह था.
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राजस्थान सरकार ने Supreme Court में अपील दायर की.
Supreme Court ने इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी और राज्य पुलिस को जांच जारी रखने की अनुमति दी.
Supreme Court ने पाया कि हाईकोर्ट ने 16 जनवरी 2025 के अपने पहले आदेश को “क्लरिकल मिस्टेक” के बहाने वापस लिया, जबकि वास्तव में यह अवैध समीक्षा (review in disguise) थी.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता की पूर्व याचिका खारिज होने के बाद, वही राहत मांगने वाली दूसरी याचिका सुनवाई योग्य नहीं थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार कर दिया और प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दे दी.
Supreme Court ने मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “हाईकोर्ट के पहले आदेश में न तो कोई clerical mistake थी और न ही inadvertent error। बाद में जो किया गया वह disguised review था, जो कानून के तहत अनुमत नहीं है।”