अमर सिंह सब-माइनर नहर विवाद में हाईकोर्ट का अहम फैसला, हाईकोर्ट ने कहा आउटलेट सुधार कार्य से कुछ फसल का नुकसान, व्यापक रूप से किसानों के दीर्घकालिक हित में
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने भाखड़ा सिद्धमुख परियोजना की अमर सिंह सब-माइनर शाखा में नहर आउटलेट्स के सुधार कार्य को मिड-क्रॉप सीजन के दौरान रोकने से इनकार करते हुए किसानों की याचिका खारिज कर दी है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने हनुमानगढ़ के किसानों की याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि तकनीकी स्वीकृति वर्ष 2023 में ही दी जा चुकी थी, जिसे समय रहते चुनौती नहीं दी गई। ऐसे में कार्यादेश के अंतिम चरण में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
जस्टिस सुनील बेनीवाल ने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि किसानों ने वर्ष 2023 में जारी तकनीकी स्वीकृति को समय रहते चुनौती नहीं दी और जब कार्य लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है, तब अदालत से हस्तक्षेप की मांग करना स्वीकार्य नहीं है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि “यदि आउटलेट परिवर्तन के कारण कुछ फसल क्षति होती भी है, तो वह व्यापक रूप से किसानों के दीर्घकालिक हित में होगी।”
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि तकनीकी स्वीकृति और कार्यादेश को काफी देरी से चुनौती दी गई है, ऐसे में अब कार्य को रोकने या टालने का कोई आधार नहीं बनता।
नहर प्रणाली और आउटलेट सुधार
हनुमानगढ़ जिले के भद्रा क्षेत्र के किसान पूरी तरह से अमर सिंह सब-माइनर नहर से सिंचाई पर निर्भर हैं।
अमर सिंह सब-माइनर, भाखड़ा सिद्धमुख रेगुलेशन सिस्टम का हिस्सा है। इसमें प्रत्येक “चक” के लिए एक आउटलेट निर्धारित है, जिससे किसानों को सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाता है।
वर्ष 2015 में हुई विभागीय बैठकों में यह निर्णय लिया गया था कि आउटलेट्स में तकनीकी सुधार और लॉकिंग सिस्टम लागू किया जाए।
इसी निर्णय के खिलाफ वर्ष 2016 में लाडूराम बनाम राज्य सहित कई रिट याचिकाएँ दायर की गई थीं।
इन याचिकाओं में विभागीय निर्णयों को चुनौती दी गई थी, लेकिन अंततः 4 नवंबर 2025 को सभी याचिकाएँ खारिज कर दी गईं।
इसके बाद विभाग ने आउटलेट सुधार कार्य के लिए कार्यादेश जारी किया।
अप्रैल 2026 तक स्थगित करने की मांग
प्रशासन ने अमर सिंह सब-माइनर शाखा में आउटलेट्स के सुधार एवं स्थान परिवर्तन का कार्य रबी फसल के बीच में शुरू किया।
इससे किसानों की फसलों के लिए पानी की आपूर्ति बाधित होगी और फसल को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
किसानों ने मांग की कि इस कार्य को अप्रैल 2026 तक स्थगित किया जाए, जब फसल कटाई हो चुकी होगी।
याचिका में तकनीकी स्वीकृति दिनांक 24 जुलाई 2023 और कार्यादेश दिनांक 14 नवंबर 2025 को रद्द करने की भी मांग की गई थी।
साथ ही, यह भी अनुरोध किया गया कि बिना किसानों की सहमति और सुनवाई के आउटलेट्स में बदलाव करना अवैध है।
किसानों की प्रमुख दलीलें
याचिकाकर्ता किसानों की ओर से अधिवक्ता मोती सिंह ने अदालत में दलीलें दी गईं कि मिड-क्रॉप सीजन में कार्य होने से रबी फसल को अपूरणीय क्षति होगी।
वर्ष 1998 और 2007 के सरकारी आदेशों में स्पष्ट किया गया था कि किसानों की सहमति के बिना आउटलेट्स में बदलाव नहीं किया जा सकता।
अधिवक्ता ने कहा कि उन्हें न तो व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया और न ही उनकी आपत्तियों पर विचार किया गया।
याचिका में कहा गया कि 19 दिसंबर 2025 को कार्य स्थगन के लिए प्रतिनिधित्व दिया गया, लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया गया।
इन्हीं आधारों पर कार्य को स्थगित करने की मांग की गई।
राज्य सरकार और विभाग का पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से सिंचाई विभाग ने यह दलीलें दी गईं कि आउटलेट सुधार का निर्णय वर्ष 2017 में ही लिया जा चुका था और तकनीकी स्वीकृति 24 जुलाई 2023 को दी गई, जिसे करीब ढाई साल तक चुनौती नहीं दी गई।
सरकार ने कहा कि कार्यादेश नवंबर 2025 में जारी हुआ और कार्य लगभग अंतिम चरण में है। अब हस्तक्षेप करने से पूरी परियोजना और सार्वजनिक हित प्रभावित होगा।
सरकार ने कहा कि यह सुधार दीर्घकालिक रूप से किसानों के हित में है।
हाईकोर्ट का फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि तकनीकी स्वीकृति को समय रहते चुनौती नहीं दी गई और कार्यादेश के काफी समय बाद याचिका दायर की गई।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब परियोजना अंतिम चरण में हो, तब अदालत का हस्तक्षेप उचित नहीं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पूर्व में समान मुद्दों पर याचिकाएँ खारिज हो चुकी हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल मिड-क्रॉप सीजन का तर्क तब स्वीकार्य नहीं हो सकता, जब याचिकाकर्ता पहले ही देरी कर चुके हों।