जयपुर, 20 सितंबर।
राजस्थान हाईकोर्ट ने फार्मासिस्ट भर्ती-2023 में बोनस अंक देने से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा हैं कि बोनस अंक नियमों के तहत एक नीतिगत लाभ हैं, कोई अधिकार नहीं.
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर ने उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कोविड हेल्थ असिस्टेंट (CHA) के रूप में कार्यकाल के आधार पर फार्मासिस्ट भर्ती में बोनस अंक देने से इनकार किए जाने को चुनौती दी थी.
जस्टिस आनंद शर्मा ने कोविड के दौरान नियुक्त हुए कोविड हेल्थ असिस्टेंट के अनुभव को फार्मासिस्ट के समान मानने से इंकार करते हुए याचिकाओं को खारिज करने के आदेश दिए हैं.
याचिकाकर्ता का कहना था कि कोविड अवधि में उन्होंने दवा वितरण का कार्य किया, जो फार्मासिस्ट के समान है, इसलिए उन्हें बोनस अंक मिलने चाहिए।
अदालत ने माना कि फार्मासिस्ट, जो फार्मेसी अधिनियम 1948 के तहत डिप्लोमा धारक और पंजीकृत होना आवश्यक है, की जिम्मेदारियों में दवा सूची प्रबंधन, मरीज परामर्श और चिकित्सकीय सहयोग जैसी पेशेवर भूमिका शामिल होती है.
ये जिम्मेदारियां कोविड हेल्थ असिस्टेंट के सहायक कार्यों से मूल रूप से भिन्न हैं।
फार्मासिस्ट जैसा कार्य नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि सक्षम प्राधिकारी ने स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता ने फार्मासिस्ट जैसा कार्य नहीं किया, इसलिए उसे बोनस अंक देने से इनकार करना न तो मनमाना है और न ही अवैध.
याचिकाकर्ताओं ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक द्वारा 11 मार्च 2025 को पारित आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसके अनुभव के आधार पर बोनस अंक देने के प्रतिनिधित्व को अस्वीकार कर दिया गया था.
याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने 14 जुलाई 2021 से 31 मार्च 2022 तक कोविड हेल्थ असिस्टेंट (CHA) के रूप में कार्य किया और उस दौरान दवा वितरण का कार्य भी किया, जो फार्मासिस्ट के समान है.
याचिका में कहा गया कि इस आधार पर उसने 15 बोनस अंकों की मांग की थी.
उसने अपने समर्थन में 18 मई 2023 को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आनंद नगर, भरतपुर के चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया.
सरकार ने किया विरोध
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उक्त प्रमाण पत्र मान्य नहीं है क्योंकि भर्ती अधिसूचना के अनुसार केवल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ही अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत हैं.
बाद में 29 मई 2023 को CMHO, भरतपुर द्वारा जारी अधिकृत प्रमाण पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि याचिकाकर्ता का कार्य फार्मासिस्ट के समान नहीं था.
दोनो पक्षो की बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि फार्मासिस्ट और कोविड हेल्थ असिस्टेंट के कार्य, योग्यता और जिम्मेदारियां मौलिक रूप से अलग हैं.
फार्मासिस्ट दवा सूची प्रबंधन, रोगियों को परामर्श, सुरक्षित दवा वितरण और क्लीनिकल सहयोग जैसी पेशेवर जिम्मेदारियां निभाता है, जबकि CHA को केवल अस्थायी रूप से कोविड काल में सहायक सेवाओं के लिए नियुक्त किया गया था.
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अनुभव की समानता को भर्ती नियमों के अनुसार ही परखा जा सकता है और अदालतें प्रशासनिक मूल्यांकन में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं.