कार्यवाहक CJ को न्यायिक-प्रशासनिक कार्यों से हटाने की मांग, स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग, ‘टार्गेटेड फाइल सिस्टम’ बंद करने का अल्टीमेटम
जोधपुर। जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में चल रहे न्यायिक विवाद के बीच अब बार और न्यायिक प्रशासन के बीच टकराव और गहरा गया है।
जयपुर में अधिवक्ताओं के विरोध के बाद जोधपुर की भी दोनो प्रमुख बार एसोसिएशनों ने कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है।
वहीं, बड़ी संख्या में अधिवक्ता कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को पद से हटाए जाने तक हड़ताल जारी रखने का दबाव बना रहे हैं।
जनरल हाउस की बैठक बुलाते हुए आगामी रविवार तक राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ की सभी अदालतों में कार्य बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया है।
बार के इस फैसले के बाद अब जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की सभी कोर्ट्स में अधिवक्ता न्यायिक कार्य से दूर रहेंगे।
राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिलीपसिंह उदावत ने Laws and Legals से बातचीत में कहा कि फिलहाल बार एसोसिएशन ने हड़ताल की घोषणा कर दी है।
उन्होंने कहा कि बार के सदस्यों से लगातार चर्चा की जा रही है और इस बात पर विचार किया जा रहा है कि कार्य बहिष्कार को कितने समय तक जारी रखा जाए।

रविवार तक हड़ताल, फिर जनरल हाउस में होगा फैसला
वहीं, राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी ने रविवार को जनरल हाउस की बैठक बुलाए जाने तक कार्य बहिष्कार की घोषणा की है।
महासचिवव विजय चौधरी के अनुसार इस पुरे मामले में अधिवक्ता समुदाय में बहुत ज्यादा आक्रोश हैं अगर हम समय पर इसे नहीं संभाल पाए, तो मामला बढ सकता हैं.
इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में न्यायिक कामकाज पर अधिवक्ताओं के विरोध का सीधा असर देखने को मिल सकता है। रविवार को प्रस्तावित जनरल हाउस की बैठक में आगे की रणनीति पर बड़ा फैसला होने की संभावना है।
ACJ को हटाने तक हड़ताल का दबाव
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अधिवक्ताओं का एक वर्ग कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को हटाए जाने की मांग पर अड़ा हुआ है।
अधिवक्ताओं की ओर से लगातार यह दबाव बनाया जा रहा है कि जब तक जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पद से नहीं हटाया जाता, तब तक कार्य बहिष्कार जारी रखा जाए।
यानी फिलहाल विवाद सिर्फ विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि बार के भीतर आगे की रणनीति और कार्य बहिष्कार की अवधि को लेकर भी गहन मंथन शुरू हो गया है।
तीन बड़ी मांगों को लेकर बार का मोर्चा
आपात बैठक के बाद अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के वरिष्ठ न्यायाधीशों के समक्ष तीन सूत्रीय मांग-पत्र भेजने का निर्णय लिया
पहली मांग: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यों से विरत रखा जाए।
बार का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों और लगाए गए आरोपों को देखते हुए निष्पक्षता तथा संस्थागत विश्वास बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है।
दूसरी मांग: राजस्थान हाईकोर्ट में जल्द से जल्द स्थायी एवं पूर्णकालिक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की जाए।
अधिवक्ताओं का तर्क है कि इससे हाईकोर्ट की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था में स्थिरता, निरंतरता और प्रभावी नेतृत्व सुनिश्चित हो सकेगा।
तीसरी मांग: पूरे राजस्थान में लागू ‘टार्गेटेड फाइल सिस्टम’ को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए।
अधिवक्ताओं ने दावा किया कि लंबे समय से लंबित मामलों को लक्षित तरीके से निस्तारित करने की व्यवस्था से न्यायिक कार्यप्रणाली के साथ-साथ अधिवक्ताओं के सामान्य पेशेवर जीवन पर भी अत्यधिक दबाव पड़ रहा है।

रविवार का जनरल हाउस होगा अहम
अब सभी की निगाहें रविवार को होने वाली जनरल हाउस की बैठक पर टिकी हैं। इस बैठक में यह तय हो सकता है कि कार्य बहिष्कार समाप्त होगा, आगे बढ़ेगा या फिर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
वहीं, यदि अधिवक्ताओं की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को हटाने की मांग पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में राजस्थान हाईकोर्ट में बार और न्यायिक प्रशासन के बीच गतिरोध और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

6 सितंबर तक कोर्ट से दूरी, संघर्ष समिति का गठन
आपात बैठक का सबसे अहम फैसला यह रहा कि 6 सितंबर 2026 तक अधिवक्ता स्वैच्छिक रूप से सभी न्यायालयों में प्रत्यक्ष अथवा वर्चुअल रूप से उपस्थित नहीं होंगे और न्यायिक कार्यों से विरत रहेंगे।
इसके साथ ही आगे की रणनीति तय करने के लिए एक संघर्ष समिति का गठन किया जाएगा।
बार ने दोहराया कि उसका उद्देश्य न्यायपालिका और बार—दोनों की गरिमा को बनाए रखना है।
‘
लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं’
बैठक में बार ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ अभियान चलाना नहीं है।
बार ने कहा कि उसका संघर्ष न्यायिक संस्था की गरिमा, निष्पक्षता, स्वतंत्रता और आम जनता के न्यायपालिका पर विश्वास की रक्षा के लिए है।
बैठक में यह भी कहा गया कि न्यायपालिका संविधान, विधि के शासन और आम नागरिक के अंतिम विश्वास का प्रतीक है।
यदि न्यायिक संस्था से जुड़े गंभीर सवालों का समयबद्ध, निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी समाधान नहीं होता है, तो इसका सीधा असर जनता के न्याय व्यवस्था पर विश्वास पर पड़ सकता है।
पूरे राजस्थान के अधिवक्ताओं से आंदोलन में जुड़ने का आह्वान
दोनों बार एसोसिएशनों ने पूरे राजस्थान के अधिवक्ताओं और बार एसोसिएशनों को इस मुद्दे पर व्यापक रूप से साथ आने का आह्वान करने का निर्णय लिया है।
इसके लिए प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनों को पत्र भेजकर आंदोलन में सहभागी बनने का आग्रह किया जाएगा।