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BSNL ने लीगल कंसलटेंट भर्ती में NLU लॉ ग्रेज्यूएट को वरियता देने का किया प्रावधान, हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस, 3-Year LL.B. Graduate को दी राहत

Rajasthan High Court Sets Aside Stay Rejection Order Against Hindustan Zinc

3-Year LL.B. Graduate की याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट ने BSNL को जारी किया नोटिस, याचिकाकर्ता को चयन प्रक्रिया में अंतरिम रूप से शामिल करने के आदेश

जयपुर। भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) की Legal Consultant भर्ती में National Law Universities (NLUs) से पांच वर्षीय Integrated LL.B. करने वाले अभ्यर्थियों को कथित अतिरिक्त लाभ दिए जाने के प्रावधान को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि जब तीन वर्षीय और पांच वर्षीय LL.B. दोनों डिग्रियां Bar Council of India (BCI) से मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्राप्त होने पर समान रूप से स्वीकार की जा रही हैं, तो केवल डिग्री की अवधि या संस्थान के आधार पर किसी एक वर्ग को अतिरिक्त लाभ देना भेदभावपूर्ण है।

राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ में जस्टिस समीर जैन ने मामले की सुनवाई करते हुए BSNL को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह में जवाब पेश करने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता आनंद देवंदा को बड़ी अंतरिम राहत देते हुए उसे चल रही चयन प्रक्रिया में प्रोविजनल रूप से शामिल करने के आदेश दिए हैं।

BSNL के 7 जुलाई 2026 के विज्ञापन को चुनौती

याचिका BSNL द्वारा जारी 7 जुलाई 2026 के भर्ती विज्ञापन के प्रावधानों के खिलाफ दायर की गई।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि भर्ती मानदंड में पांच वर्षीय Integrated LL.B. डिग्री, विशेष रूप से National Law Universities से कानून की पढ़ाई करने वाले उम्मीदवारों को अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों से समान कानून की डिग्री हासिल करने वाले उम्मीदवारों की तुलना में अतिरिक्त लाभ दिया जा रहा है।

याचिकाकर्ता स्वयं तीन वर्षीय LL.B. डिग्रीधारक हैं और उन्होंने इस वर्गीकरण को चुनौती देते हुए कहा कि यह समान रूप से योग्य उम्मीदवारों के बीच अनुचित अंतर पैदा करता है।

जब Essential Qualification समान, तो Preference अलग क्यों?

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि BSNL की अनिवार्य पात्रता में LL.B. डिग्री, BCI से मान्यता प्राप्त संस्थान से कानून की डिग्री, न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक और तीन वर्ष का Post-Qualification Experience जैसी शर्तें निर्धारित की गई हैं।

लेकिन BSNL ने यह भी प्रावधान किया कि भारत के किसी भी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (National Law University—NLU) से पांच वर्षीय एकीकृत LL.B. पाठ्यक्रम पूरा करने वाले उम्मीदवारों को इसमें वरीयता दी जाएगी।

इसके साथ ही वर्ष 2023, 2024 या 2025 के PG CLAT में अच्छे स्कोर वाले उम्मीदवारों को भी वरीयता देने की बात कही गई।

याचिका में किया विरोध

याचिकाकर्ता अनमोल देवंदा की ओर से अधिवक्ता डॉ. प्रखर अग्रवाल और अंजलि ने पैरवी करते हुए कहा कि भर्ती में तीन वर्षीय और पांच वर्षीय LL.B. डिग्री दोनों को आवश्यक शैक्षणिक योग्यता के तौर पर स्वीकार किया गया है, तो पांच वर्षीय डिग्री वाले उम्मीदवार को केवल पाठ्यक्रम की अवधि या विश्वविद्यालय के नाम के आधार पर अतिरिक्त लाभ देना तर्कसंगत नहीं माना जा सकता।

याचिका में इस अंतर को संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार के विपरीत बताया गया है।

याचिकाकर्ता की दलील में अनुच्छेद 19 का भी उल्लेख किया गया है।

NLU बनाम अन्य BCI मान्यता प्राप्त संस्थानों का मुद्दा

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि देश में बड़ी संख्या में कानून की शिक्षा देने वाले संस्थान BCI से मान्यता प्राप्त हैं। इन संस्थानों से तीन वर्षीय या पांच वर्षीय LL.B. करने वाले अभ्यर्थी भी कानून की पेशेवर योग्यता रखते हैं।

ऐसे में केवल इस आधार पर कि किसी अभ्यर्थी ने National Law University से पांच वर्षीय Integrated LL.B. की है, उसे अन्य BCI-recognised institutions से कानून की डिग्री लेने वाले उम्मीदवारों पर अतिरिक्त लाभ देना Rational Classification की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वर्तमान प्रावधान में ऐसा कोई तार्किक आधार दिखाई नहीं देता।

PG CLAT Score पर भी सवाल

याचिका में BSNL द्वारा PG CLAT Score को महत्व दिए जाने पर भी सवाल उठाया गया है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि Legal Consultant जैसे पद के लिए, जहां उम्मीदवार से कानून की डिग्री के साथ-साथ तीन वर्ष का Post-Qualification Experience भी मांगा गया है, वहां किसी अकादमिक प्रवेश परीक्षा के स्कोर को पेशेवर क्षमता का निर्णायक पैमाना नहीं बनाया जा सकता।

याचिकाकर्ता के अनुसार, अनुभवी Legal Consultant के चयन में वास्तविक पेशेवर अनुभव और कानून के क्षेत्र में दक्षता अधिक प्रासंगिक मानदंड हो सकते हैं।

अलग-अलग पदों पर अलग मानदंड!

याचिकाकर्ता ने BSNL की भर्ती व्यवस्था के एक अन्य पद का उदाहरण देते हुए कहा कि Real Estate Legal Consultant के पद के लिए तीन वर्षीय और पांच वर्षीय दोनों LL.B. डिग्रियों को स्वीकार किया गया है और वहां इसी प्रकार की अतिरिक्त प्राथमिकता निर्धारित नहीं की गई है।

याचिका में इसी आधार पर सवाल उठाया गया कि एक ही संगठन में समान प्रकृति की कानूनी योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग पदों पर अलग मानदंड क्यों अपनाए गए हैं।

हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

अधिवक्ताओं की दलीलें और रिकॉर्ड देखने के बाद जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने BSNL को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह में जवाब पेश करने का आदेश दिया है।

चयन प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे याचिकाकर्ता

मामले में सबसे महत्वपूर्ण राहत देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल याचिकाकर्ता को चयन प्रक्रिया में प्रोविजनल रूप से भाग लेने की अनुमति दी जाती है।

याचिका के अंतिम निर्णय तक याचिकाकर्ता को केवल विवादित पात्रता/वरीयता के आधार पर भर्ती प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जाएगा।

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