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AIIMS जोधपुर के संविदा नर्सिंग कर्मियों की सेवा समाप्ति का आदेश रद्द, CAT ने 3 महीने में नियमितीकरण का दिया आदेश, कहा- भर्ती बैकडोर एंट्री नहीं थी

CAT Quashes Termination of AIIMS Jodhpur Contract Nurses, Directs Regularisation Process Within Three Months

जोधपुर। AIIMS जोधपुर के संविदा नर्सिंग कर्मियों को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), जोधपुर पीठ ने बड़ी राहत दी है।

CAT ने संविदा नर्सिंग कर्मियों की नियमितीकरण की मांग खारिज करने वाले 18 दिसंबर 2024 के AIIMS के ऑर्डर और इसके बाद सेवाएं समाप्त करने वाले 23 दिसंबर 2024 के ऑर्डर को रद्द कर दिया है।

ट्रिब्यूनल ने AIIMS को निर्देश दिया है कि पात्र पाए जाने पर इन कर्मचारियों की सेवाओं को 3 महीने के भीतर नियमों के मुताबिक नियमित करने की प्रक्रिया पूरी की जाए।

2013 में परीक्षा और इंटरव्यू के जरिए हुई थी भर्ती

मामला AIIMS जोधपुर में 2013 में हुई संविदा नर्सिंग कर्मियों की भर्ती से जुड़ा है। AIIMS ने नर्सिंग ग्रेड-I और ग्रेड-II के पदों पर भर्ती के लिए 15 जुलाई 2013 को विज्ञापन जारी किया था।

इन पदों पर नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों से आवेदन लेने के बाद लिखित परीक्षा और इंटरव्यू कराया गया। चयन के बाद 15 जनवरी 2014 से कर्मचारियों को 11 महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त किया गया। विज्ञापन में आपसी सहमति से कॉन्ट्रैक्ट आगे बढ़ाने का प्रावधान भी था।

कर्मचारियों का कहना था कि उनकी नियुक्ति किसी पिछले दरवाजे से नहीं हुई, बल्कि विज्ञापन के बाद तय चयन प्रक्रिया से गुजरकर हुई थी। इसके बाद AIIMS ने उनकी सेवाएं समय-समय पर बढ़ाईं और वे कई वर्षों तक संस्थान में काम करते रहे।

AIIMS जोधपुर में 2017 में भी नियमितीकरण पर हुआ था विचार

नर्सिंग कर्मियों ने अपनी सेवाएं नियमित करने की मांग को लेकर 2015 के आसपास CAT का रुख किया था। इसके बाद नियमितीकरण का यह मामला अलग-अलग स्तर पर चलता रहा।

मामले में यह भी सामने आया कि AIIMS जोधपुर की गवर्निंग बॉडी की 11 मई 2017 को हुई बैठक में संविदा नर्सिंग स्टाफ के नियमितीकरण का मुद्दा रखा गया था। बैठक में इस मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजने की बात कही गई थी।

इसके अलावा AIIMS नई दिल्ली का उदाहरण भी सामने आया। वहां 2014 में गवर्निंग बॉडी की बैठक में 10 से 15 साल तक एडहॉक आधार पर काम कर रहे 193 कर्मचारियों के नियमितीकरण को मंजूरी दी गई थी।

राजस्थान हाईकोर्ट ने भी अपने फैसले में AIIMS जोधपुर के कर्मचारियों की स्थिति को इस मामले से समान माना था।

हाईकोर्ट ने पहले भी AIIMS को दोबारा फैसला लेने को कहा था

वहीं नियमितीकरण का ये मामला पहले भी CAT के सामने पहुंचा था। उस वक्त 12 मार्च 2024 को CAT ने कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग खारिज कर दी थी। इसके बाद कर्मचारी राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचे थे।

वहीं 19 सितंबर 2024 को हाईकोर्ट ने CAT का आदेश रद्द करते हुए AIIMS को नियमितीकरण के मामले पर नए सिरे से फैसला लेने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट ने AIIMS से कहा था कि वह AIIMS नई दिल्ली के फैसले, AIIMS जोधपुर की गवर्निंग बॉडी के 11 मई 2017 के एजेंडा और नियमितीकरण से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को ध्यान में रखकर नया स्पीकिंग ऑर्डर जारी करे।

AIIMS ने दोबारा नियमितीकरण से किया इनकार

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद AIIMS की गवर्निंग बॉडी ने मामले पर विचार किया और इसके बाद 18 दिसंबर 2024 को कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग फिर खारिज कर दी गई।

इसके बाद AIIMS की गवर्निंग बॉडी ने 7 नवंबर 2024 को मामले पर विचार किया और नियमितीकरण से इनकार कर दिया। इसके आधार पर 18 दिसंबर 2024 को स्पीकिंग ऑर्डर जारी कर कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग फिर खारिज कर दी गई।

इसके कुछ ही दिन बाद 23 दिसंबर 2024 को संविदा नर्सिंग कर्मियों की सेवाएं समाप्त भी कर दी गईं।

AIIMS का कहना था कि कर्मचारियों की नियुक्ति संविदा आधार पर हुई थी और संस्थान के भर्ती नियमों में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

AIIMS ने यह भी तर्क दिया कि नियमित नियुक्ति और संविदा नियुक्ति की प्रक्रिया अलग होती है। केवल लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के जरिए चयन होने से यह नहीं माना जा सकता कि कर्मचारियों ने नियमित भर्ती की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली थी।

इसके बाद 23 दिसंबर 2024 को कर्मचारियों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गईं। जिसके खिलाफ कर्मचारियों ने दोबारा CAT का रुख किया।

CAT ने कहा- भर्ती को बैकडोर एंट्री नहीं कहा जा सकता

CAT ने AIIMS के इस तर्क को नहीं माना कि कर्मचारी सिर्फ 11 महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त हुए थे, इसलिए उनका नियमितीकरण नहीं हो सकता।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि 2013 में भर्ती का बाकायदा विज्ञापन निकला था। कर्मचारियों ने लिखित परीक्षा और इंटरव्यू दिया और चयन के बाद उनकी नियुक्ति हुई। इसलिए इसे बैकडोर भर्ती नहीं कहा जा सकता।

राजस्थान हाईकोर्ट भी 19 सितंबर 2024 के फैसले में कह चुका था कि कर्मचारियों की भर्ती विज्ञापन जारी करने के बाद लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के जरिए हुई थी।

यानी उन्हें बिना किसी चयन प्रक्रिया के सीधे नौकरी नहीं दी गई थी। CAT ने कहा कि ऐसे में उनकी नियुक्ति को बैकडोर भर्ती नहीं माना जा सकता।

‘लंबी सेवा को नजरअंदाज कर सेवा खत्म करना सही नहीं‘

CAT ने कर्मचारियों की लंबे समय तक चली सर्विस को भी महत्वपूर्ण माना। ट्रिब्यूनल ने कहा कि कर्मचारी 2014 की शुरुआत से AIIMS जोधपुर में लगातार काम कर रहे थे और उनकी सेवाएं समय-समय पर बढ़ाई जाती रहीं।

कर्मचारियों के पास संबंधित पद के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता थी और AIIMS ने लंबे समय तक उनकी सेवाएं संस्थान के क्लीनिकल और अकादमिक कामकाज में लीं।

इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि उनकी लंबी सर्विस सिर्फ कोर्ट के अंतरिम आदेशों की वजह से चली।

ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का भी हवाला दिया। इनमें कहा गया है कि लंबे समय तक लगातार काम करने वाले कर्मचारियों के दावे को केवल उनकी शुरुआती नियुक्ति संविदा पर होने के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता, खासकर जब नियुक्ति अवैध या पिछले दरवाजे से हुई न हो।

CAT ने यह भी माना कि लंबे समय तक कर्मचारियों की सेवाएं लेने के बाद सिर्फ संविदा की शर्तों का हवाला देकर उन्हें अचानक सेवा से बाहर करना उचित नहीं है।

3 महीने में नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश

CAT ने माना कि AIIMS ने 18 दिसंबर 2024 का ऑर्डर जारी करते समय राजस्थान हाईकोर्ट की टिप्पणियों, AIIMS नई दिल्ली में समान कर्मचारियों के नियमितीकरण और सुप्रीम कोर्ट के संबंधित फैसलों को ध्यान में नहीं रखा।

इसी आधार पर CAT ने नियमितीकरण से इनकार करने वाला 18 दिसंबर 2024 का ऑर्डर और इसके बाद सेवाएं समाप्त करने वाला 23 दिसंबर 2024 का ऑर्डर रद्द कर दिया।

अब AIIMS को इन कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया 3 महीने के भीतर नियमों के मुताबिक पूरी करनी होगी, बशर्ते वे संबंधित पद के लिए अन्य शर्तों के तहत पात्र हों।

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